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Budget 2026 से Home Loan EMI घटेगी? मिडिल क्लास को मिल सकती है सबसे बड़ी राहत!

Budget 2026 Home Loan EMI: बजट 2026 से पहले रियल एस्टेट सेक्टर में हलचल तेज हो गई है। महंगाई और ऊंची ब्याज दरों के बीच अपने घर का सपना देख रहे मिडिल क्लास के लिए अच्छी खबर बन सकती है। देश की प्रमुख रियल एस्टेट संस्थाएं सरकार से ऐसे सुझाव रख रही हैं, जिन पर अमल हुआ तो Home Loan EMI कम हो सकती है और घर खरीदना पहले से कहीं आसान हो जाएगा।

होम लोन पर टैक्स छूट बढ़ाने की मांग

नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल यानी NAREDCO ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के सामने बड़ा प्रस्ताव रखा है। संगठन का कहना है कि होम लोन पर ब्याज में मिलने वाली टैक्स छूट की सीमा अभी 2 लाख रुपये है, जिसे बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया जाना चाहिए।

Budget 2026 Home Loan EMI

रियल एस्टेट सेक्टर का तर्क है कि यह सीमा करीब 12 साल पहले तय की गई थी। तब घरों की कीमतें और ब्याज दरें आज जैसी नहीं थीं। मौजूदा हालात में यह सीमा नाकाफी हो चुकी है।

GST घटा तो घर खरीदना होगा सस्ता (GST on Housing)

NAREDCO ने सिर्फ टैक्स छूट ही नहीं, बल्कि GST कम करने की भी सिफारिश की है। संगठन का मानना है कि अगर किफायती और मिडिल इनकम हाउसिंग पर टैक्स का बोझ घटाया गया, तो घरों की डिमांड तेजी से बढ़ेगी। इसका सीधा फायदा मिडिल क्लास को मिलेगा और रियल एस्टेट सेक्टर को भी नई रफ्तार मिलेगी।

किफायती आवास की परिभाषा बदलने की मांग (Union Budget 2026 Housing)

बजट 2026 से पहले एक अहम मांग यह भी उठी है कि किफायती आवास की कीमत सीमा बदली जाए। फिलहाल 45 लाख रुपये तक के घरों को ही अफोर्डेबल हाउसिंग माना जाता है। NAREDCO का सुझाव है कि इस सीमा को बढ़ाकर 90 लाख रुपये किया जाना चाहिए।

सेक्टर का कहना है कि जमीन और निर्माण लागत काफी बढ़ चुकी है। ऐसे में पुरानी परिभाषा अब बाजार की सच्चाई से मेल नहीं खाती।

सरकारी जमीन से बने सस्ते घर

NAREDCO के चेयरमैन निरंजन हीरानंदानी ने सरकार को सलाह दी है कि शहरी इलाकों में खाली पड़ी सरकारी जमीन का इस्तेमाल किफायती और मिडिल इनकम हाउसिंग के लिए किया जाए। इसके लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल अपनाया जा सकता है। इससे शहरों में घरों की कमी दूर करने में मदद मिलेगी।

रियल एस्टेट को उद्योग का दर्जा क्यों जरूरी

रियल एस्टेट संगठनों की लंबे समय से मांग है कि इस सेक्टर को Industry Status दिया जाए। NAREDCO का कहना है कि इससे डेवलपर्स को सस्ते लोन मिलेंगे, निर्माण लागत घटेगी और इसका फायदा आखिरकार घर खरीदने वालों को मिलेगा। अनुमान है कि भारतीय रियल एस्टेट उद्योग 2030 तक 1000 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच सकता है।

CREDAI की मांग, नेशनल रेंटल हाउसिंग मिशन

NAREDCO के साथ-साथ रियल एस्टेट की दूसरी बड़ी संस्था CREDAI ने भी सरकार के सामने मांगों की लंबी सूची रखी है। CREDAI ने बजट 2026 में National Rental Housing Mission शुरू करने की अपील की है।

संगठन का कहना है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और प्रवासी आबादी के कारण किराये के घरों की मांग बढ़ रही है, लेकिन संगठित सप्लाई अब भी कम है।

EMI कैसे हो सकती है कम

अगर सरकार होम लोन पर ब्याज में टैक्स छूट बढ़ाती है, तो मिडिल क्लास की टैक्स देनदारी घटेगी। इसके अलावा अगर GST और ब्याज दरों में राहत मिलती है, तो नई EMI पहले से कम हो सकती है। इससे लाखों परिवारों के मासिक बजट पर दबाव घटेगा।

मिडिल क्लास के लिए क्यों अहम है Budget 2026

Housing सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार और शहरी विकास का बड़ा आधार है। बजट 2026 में अगर सरकार रियल एस्टेट की इन मांगों पर गौर करती है, तो मिडिल क्लास को सीधी राहत मिल सकती है। यही वजह है कि इस बजट को लेकर होम बायर्स और डेवलपर्स दोनों की नजरें टिकी हैं।

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