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'जल्द आ सकती है Good news', केंद्रीय मंत्री पियूष गोयल ने आखिर किस मुद्दें को लेकर दिया ये बयान

India US Trade Deal: केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए दोनों देश तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि इस अहम समझौते को लेकर आने वाले कुछ दिनों में अच्छी खबर मिल सकती है।

पीटीआई को दिए एक खास इंटरव्यू में गोयल ने कहा कि हर मुक्त व्यापार समझौता अपने आप में अहम होता है और भारत-अमेरिका के बीच बातचीत काफी सकारात्मक माहौल में चल रही है। उन्होंने बताया कि अमेरिका में उनके समकक्ष के साथ उनका कामकाजी रिश्ता भी शानदार है और व्यक्तिगत तौर पर भी अच्छी दोस्ती है।

India US Trade Deal

मोदी-ट्रंप की दोस्ती का भी जिक्र

गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच गहरी दोस्ती किसी से छिपी नहीं है। उनके मुताबिक, इसी वजह से उन्हें पूरा भरोसा है कि निकट भविष्य में इस ट्रेड डील पर सकारात्मक घोषणा हो सकती है।

"ट्रेड डील पर कभी डेडलाइन नहीं होती"

मंत्री ने एक बार फिर साफ किया कि व्यापार समझौतों पर कभी किसी तय समय-सीमा में बातचीत नहीं की जाती।
उनका कहना था कि यह समझौता सही समय पर और दोनों देशों के व्यापक हितों को ध्यान में रखकर ही पूरा किया जाएगा।

लंबे समय से चल रही है भारत-अमेरिका बातचीत

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता काफी समय से जारी है।
पिछले साल दिसंबर में अमेरिकी उप व्यापार प्रतिनिधि राजदूत रिक स्विट्जर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली आया था। यह यात्रा उस समय हुई थी जब ट्रंप प्रशासन ने व्यापार असंतुलन और भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद को लेकर 50% टैरिफ लगाया था।

यूरोपीय संघ के साथ समझौते की भी तारीफ

पीयूष गोयल ने यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ होने वाले मुक्त व्यापार समझौते को भी "सभी सौदों की जननी" बताया।
उन्होंने कहा कि भारत का ईयू के साथ पहले से ही वस्तुओं और सेवाओं में व्यापार अधिशेष है और उम्मीद है कि अगले पांच साल में भारत का निर्यात दोगुना हो सकता है।

"न सख्त, न नरम - एक दयालु समझौता"

गोयल ने इस समझौते को दिलचस्प अंदाज में समझाते हुए कहा कि यह न तो बहुत सख्त होगा और न ही बहुत नरम। उनके शब्दों में, यह एक "दयालु और स्नेही जननी" होगी, जो यह सुनिश्चित करेगी कि यूरोप के 27 देश और भारत - सभी 28 साझेदार - इस समझौते का फायदा उठाएं।

एमएसएमई के लिए यूरोप में बड़े मौके

मंत्री ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) से अपील की कि वे यूरोप जैसे बड़े और उच्च आय वाले बाजारों की ओर देखें। सरकार ने एमएसएमई की परिभाषा में बदलाव किया है ताकि कारोबारी सिर्फ छोटे बने रहने को मजबूर न हों, बल्कि आगे बढ़ें और वैश्विक बाजारों में कदम रखें।

सरकार का एमएसएमई पर लगातार फोकस

गोयल ने कहा कि सरकार लगातार कई योजनाओं के जरिए एमएसएमई को सपोर्ट कर रही है।
उन्होंने याद दिलाया कि मुद्रा ऋण योजना का मकसद भी एमएसएमई को औपचारिक व्यवस्था से जोड़ना था।
इसके अलावा पीएम स्वनिधि योजना के जरिए रेहड़ी-पटरी वालों को भी इस दायरे में लाया गया है।

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