बोगोटा बुक फेयर में भारत का जलवा: लैटिन अमेरिका में गूंजी भारतीय साहित्य की धमक
कोलंबिया के बोगोटा में 21 अप्रैल से 4 मई तक चलने वाले 'बोगोटा इंटरनेशनल बुक फेयर 2026' (FILBo) में भारत 'गेस्ट ऑफ ऑनर' देश के तौर पर शामिल हुआ है। दुनिया के सबसे बड़े पुस्तक मेलों में शुमार FILBo में इस बार भारत की धूम है। इस मेले में करीब 25 देशों के लेखक, प्रकाशक, संपादक और अनुवादक हिस्सा ले रहे हैं, जहां 2,000 से ज्यादा साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।

इंडिया पवेलियन का उद्घाटन 21 अप्रैल को कोलंबिया की संस्कृति, कला और ज्ञान मंत्री यानई कदामानी फोंरोडोना और कोलंबिया व इक्वाडोर में भारत के राजदूत वनलालहुमा ने किया। भारत की इस भागीदारी का आयोजन शिक्षा मंत्रालय और कोलंबिया में भारतीय दूतावास के सहयोग से किया जा रहा है, जिसकी जिम्मेदारी नेशनल बुक ट्रस्ट (NBT) संभाल रहा है।
NBT के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे के नेतृत्व में लेखकों, चित्रकारों, प्रकाशकों और अधिकारियों का 50 सदस्यीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल इस कार्यक्रम में हिस्सा ले रहा है। अधिकारियों का कहना है कि FILBo में भारत की मौजूदगी से भारतीय साहित्य को लैटिन अमेरिकी पाठकों तक पहुंचाने और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत करने का एक शानदार मौका मिला है।
भारतीय संस्कृति और साहित्य का भव्य प्रदर्शन
3,000 वर्ग मीटर में फैला इंडिया पवेलियन भारत की साहित्यिक विरासत, सांस्कृतिक विविधता और आधुनिक उपलब्धियों का एक जीवंत संगम है। 'रीड एंड एक्सप्लोर इंडिया' (भारत को पढ़ें और जानें) थीम पर आधारित इस पवेलियन में 100 से ज्यादा साहित्यिक सत्र, प्रदर्शनियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
पवेलियन का डिजाइन भारतीय कला और वास्तुकला से प्रेरित है, जिसमें आमेर किला, केरल की नालुकेट्टू शैली और हम्पी बाजार की झलक देखने को मिलती है। कालीघाट कला में बना एक खास शुभंकर (मैस्कॉट) परिवारों में कहानी सुनाने की परंपरा को दर्शाता है। वहीं, पवेलियन के बाहरी हिस्से पर पतंगों की आकृतियां बनाई गई हैं, जो भारत और कोलंबिया की साझा संस्कृति का प्रतीक हैं।
चिंतन और 'मौन' की थीम
FILBo 2026 की मुख्य थीम 'एक-दूसरे को सुनना ही एक-दूसरे को पढ़ना है' रखी गई है, जो मौन, चिंतन और समझ पर केंद्रित है। इंडिया पवेलियन भी इसी थीम के साथ तालमेल बिठाते हुए भारतीय दर्शन, ध्यान और ज्ञान परंपराओं में 'मौन' के महत्व पर विशेष सत्र और प्रदर्शनियां आयोजित कर रहा है।
प्रदर्शनियों में दिखी भारत की विरासत
पवेलियन के केंद्र में सात मुख्य प्रदर्शनियां हैं, जो भारत की सभ्यता और आधुनिक प्रगति को दर्शाती हैं। इनमें प्राचीन से आधुनिक काल तक की भारतीय महिला विचारकों, महात्मा गांधी की साहित्यिक विरासत और रवींद्रनाथ टैगोर, प्रेमचंद व महादेवी वर्मा जैसे दिग्गज साहित्यकारों के योगदान को प्रदर्शित किया गया है।
इसके अलावा, भारतीय ज्ञान प्रणाली, चित्रकला परंपरा और अंतरिक्ष व बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में भारत की प्रगति को भी दिखाया गया है। एक खास प्रदर्शनी में कोलंबियाई फोटोग्राफर के नजरिए से हिमालय की खूबसूरती को पेश किया गया है, जो सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक बेहतरीन उदाहरण है।
100 से ज्यादा कार्यक्रम और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
इंडिया पवेलियन में साहित्यिक चर्चाओं, कविता पाठ, बच्चों की वर्कशॉप और सांस्कृतिक कार्यक्रमों सहित 100 से अधिक इवेंट्स हो रहे हैं। इसमें भारत और कोलंबिया के 75 से ज्यादा वक्ता भारतीय ज्ञान प्रणाली, सिनेमा, बहुभाषी साहित्य और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों पर चर्चा कर रहे हैं। कोलंबियाई दर्शकों के लिए लोकप्रिय भारतीय फिल्मों और डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग भी की जा रही है।
अनुवाद और वैश्विक पहुंच पर जोर
भारत की भागीदारी का एक मुख्य आकर्षण बच्चों की 50 से अधिक भारतीय पुस्तकों का स्पेनिश में अनुवादित संस्करण लॉन्च करना है। इस पहल का मकसद लैटिन अमेरिकी पाठकों को भारतीय कहानियों से परिचित कराना और भारतीय साहित्य की वैश्विक पहुंच को बढ़ाना है।
इंटरएक्टिव अनुभव और सांस्कृतिक रंग
पवेलियन में आने वाले लोग विभिन्न विषयों की लगभग 3,000 पुस्तकों को देख सकते हैं। बच्चों के लिए खास जोन, कहानी सुनाने के सत्र और क्रिएटिव वर्कशॉप भी आकर्षण का केंद्र हैं। यहां AI-आधारित कियोस्क, ऑडियो-विजुअल बूथ और सेल्फी पॉइंट्स के साथ-साथ भारतीय व्यंजनों का लुत्फ उठाने के लिए एक रेस्टोरेंट भी बनाया गया है। भरतनाट्यम, कथक, राजस्थान के लोक नृत्य और हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियां दर्शकों को भारत के रंगों से सराबोर कर रही हैं।
मजबूत होते सांस्कृतिक संबंध
FILBo 2026 में भारत की यह भागीदारी वैश्विक स्तर पर एक 'नॉलेज हब' के रूप में उसकी उभरती भूमिका को दर्शाती है। साहित्य, कला और नवाचार के जरिए इंडिया पवेलियन न केवल देश की समृद्ध विरासत का जश्न मना रहा है, बल्कि भारत और कोलंबिया के बीच बौद्धिक और सांस्कृतिक संबंधों को भी नई ऊंचाई दे रहा है।












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