‘J-K और लद्दाख भारत का हिस्सा था और रहेगा’, चीन-PAK बयान पर भारत का कड़ा जवाब, CPEC पर भी सुनाई खरी-खरी
विदेश मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर को लेकर चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। भारत ने साफ शब्दों में कहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख देश के "अभिन्न और अविभाज्य अंग" हैं और किसी भी दूसरे देश को इस मुद्दे पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार (26 मई) को कहा कि भारत तथाकथित चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी सीपेक (CPEC) से जुड़े उन प्रोजेक्ट्स का कड़ा विरोध करता है, जो भारत के संप्रभु क्षेत्र में आते हैं।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले हिस्सों में किसी भी तरह की परियोजना भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन है। भारत ने यह भी दोहराया कि उसने कभी भी 1963 में चीन और पाकिस्तान के बीच हुए सीमा समझौते को मान्यता नहीं दी।

MEA ने अपने बयान में क्या-क्या कहा?
- विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से थे, हैं और हमेशा रहेंगे।
- भारत ने साफ कहा कि किसी भी दूसरे देश को इस मुद्दे पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।
- भारत ने तथाकथित चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) परियोजनाओं का भी कड़ा विरोध किया।
- विदेश मंत्रालय ने कहा कि सीपेक की कुछ परियोजनाएं भारत के संप्रभु क्षेत्र में आती हैं, जहां पाकिस्तान ने अवैध कब्जा कर रखा है।
- भारत ने कहा कि किसी भी देश द्वारा पाकिस्तान के इस अवैध कब्जे को वैधता देने की कोशिश भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ है।
- भारत ने यह भी बताया कि इस मुद्दे पर चीन और पाकिस्तान दोनों को कई बार अपनी आपत्ति से अवगत कराया जा चुका है।
- चीन और पाकिस्तान के बीच कथित "ट्रांस-बाउंड्री वाटर रिसोर्स कोऑपरेशन" पर भी भारत ने सवाल उठाए।
- भारत ने कहा कि चीन और पाकिस्तान के बीच कोई साझा सीमा नहीं है, इसलिए ऐसे सहयोग का सवाल ही नहीं उठता।
- भारत ने दोहराया कि उसने कभी भी 1963 में चीन और पाकिस्तान के बीच हुए तथाकथित सीमा समझौते को मान्यता नहीं दी है।
चीन-PAK बयान में क्या कहा गया था?
दरअसल, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif की चीन यात्रा के बाद जारी संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर मुद्दे को "इतिहास से जुड़ा लंबित मामला" बताया गया था। बयान में कहा गया कि इस मुद्दे का समाधान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और द्विपक्षीय समझौतों के तहत शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए। चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping और शहबाज शरीफ के बीच हुई बैठक के बाद जारी इस बयान में दक्षिण एशिया में शांति बनाए रखने और विवादों को बातचीत से हल करने की बात भी कही गई।
पानी और सीमा समझौते पर भी भारत का जवाब
भारत ने चीन और पाकिस्तान के बीच "ट्रांस-बाउंड्री वाटर रिसोर्स कोऑपरेशन" के दावे पर भी सवाल उठाए। विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों देशों के बीच कोई साझा सीमा ही नहीं है, ऐसे में इस तरह के सहयोग का सवाल ही पैदा नहीं होता। भारत का यह बयान ऐसे समय आया है जब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में इंफ्रास्ट्रक्चर और रणनीतिक परियोजनाओं को लेकर क्षेत्रीय राजनीति फिर से चर्चा में है।












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