ICJ के जज के लिए फिर से भारत ने जताया दलवीर सिंह भंडारी पर भरोसा
नई दिल्ली। भारत ने एक बार फिर से इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) के लिए दलवीर सिंह भंडारी पर भरोसा किया है। भारत ने एक बार फिर से भंडारी को आईसीजे के लिए जज नामांकित किया है। आईसीजे, यूनाइटेड नेशंस (यूएन) की प्रमुख कानूनी शाखा है।

पहली बार वर्ष 2012 में चुने गए
69 वर्ष के भंडारी को पहली बार अप्रैल 2012 में एक साथ यूएन की महासभा और सिक्योरिटी काउंसिल के लिए चुना गया था। उस समय भी वह यहां पर आईसीजे के लिए चुने गए थे जिसे वर्ल्ड कोर्ट के नाम से जानते हैं। उनका वर्तमान कार्यकाल फरवरी 2018 तक होगा। भारत की ओर से सोमवार को यूएन के सेक्रेटरी जनरल एंटोनिया गुटारेश के सामने उनका नामांकन भेजा गया। नामांकन की आखिरी तारीख तीन जुलाई थी। आईसीजे के लिए जज का चुनाव नवंबर में होना है और अगर वह फिर से चुने जाते हैं तो अगले नौ वर्षों तक इस पद पर रहेंगे। अपने कार्यकाल के दौरान भंडारी कोर्ट के सभी कार्यों में काफी सक्रिय रहे हैं। उन्होंने एक दो नहीं बल्कि 11 केसेज में अपना व्यक्तिग मत दिए हैं। जिन फैसलों में भंडारी ने अपने मत दिए उनमें से मैरीटाइम विवाद, अंर्टाकटिका में व्हेल का शिकार, नरसंहार का अपराध, परमाणु भेदभाव, आतंकवाद की आर्थिक मदद और मूलभूत अधिकारों के उल्लंघन जैसे केस शामिल थे।
कौन हैं भंडारी
आईसीजे से पहले भंडारी भारत में उच्च न्यायालय में जज रहे चुके हैं। उन्होंने 20 वर्षों से भी ज्यादा समय तक इस क्षेत्र में अपनी सेवाएं दीं। सुप्रीम कोर्ट में उनके पास वरिष्ठ जज के तौर पर अपनी सेवाएं देने का अनुभव है। आईसीजे में 15 जज होते हैं जिनमें हर जज का कार्यकाल नौ वर्षों का होता है। इन जजों को यूएन की जनरल एसेंबली और सिक्योरिटी काउंसिल की ओर से चुना जाता है। किसी भी नामांकित जज को दोनों सदनों से पूर्ण बहुमत हासिल होना चाहिए तभी वह इस पद के योग्य माना जाता है। आईसीजे की वेबसाइट के मुताबिक जिन जजों को चुना जाता है उनका चरित्र अच्छा होना चाहिए उनके पास इस पद के लिए सर्वोच्च न्यायिक योग्यताएं होती हैं। जजों को उनकी योग्यता के आधार पर चुना जाता है न कि राष्ट्रीयता के आधार पर। दो जज एक ही राष्ट्रीयता के भी हो सकते हैं।












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