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India Pakistan : 'सोने नहीं दिया गया, ब्रश करने से रोका गया', PAK के कब्जे में BSF जवान ने कैसे काटे 20 दिन?

India Pakistan : भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव के बीच बुधवार को बीएसएफ के जवान पूर्णम कुमार शॉ पूरे 20 दिनों बाद सकुशल भारत लौट आए हैं। आपको बता दें कि 20 दिन पहले पाकिस्तान ने BSF जवान पुर्नम कुमार साहू को तब पकड़ा लिया था जब वो पहलगाम हमले के एक दिन बाद गलती से पाकिस्तान बॉर्डर क्रास कर गए थे,इसके बाद भारत ने पाकिस्तान से उन्हें वापस भेजने को कहा था।

लेकिन पड़ोसी मुल्क ने इस बारे में कोई एक्शन नहीं लिया। जवान पूर्णम कुमार शॉ की गर्भवती पत्नी, पति की वापसी के लिए लगातार प्रयास कर रही थीं। कल जब उन्हें अपने पति की वापसी की खबर मिली तो वो बेहद भावुक नजर आईं, उन्होंने इसके लिए पीएम मोदी , सीएम ममता बनर्जी और देश की जनता को दिल से धन्यवाद दिया।

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मीडिया से बात करते हुए पूर्णम कुमार शॉ की पत्नी रजनी साहू ने कहा कि' पीएम मोदी की वजह से ही ये सब संभव हो पाया है, उनकी वजह से आज मेरा सुहाग लौट आया है, मैं और मेरा पूरा परिवार उनका आभार व्यक्त करता है, आज परिवार के लिए बहुत बड़ा दिन है, जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है।'

BSF जवान शॉ ने बताई 20 दिन की आपबीती

आपको बता दें कि बीते 20 दिनों में भारत और पाकिस्तान के बीच काफी कुछ चला है। ऐसे में पूर्णम कुमार शॉ ने, वो बीस दिन कैसे गुजरे, जब वो पाकिस्तान में थे, के बारे में जो बताया है, वो काफी दिल दहलाने वाला है। इंडिया टूडे की खबर के मुताबिक पाकिस्तानी सेना की ओर से पूर्णम शॉ को को मानसिक यातनाएं दी गईं।

'नींद से वंचित रखा गया, उन्हें ब्रश नहीं करने दिया गया'

हिरासत में रहने के दौरान 'उन्हें नींद से वंचित रखा गया, उन्हें ब्रश नहीं करने दिया गया।' खबर के मुताबिक पूर्णम की आंखों पर पट्टी बांधकर तीन अज्ञात स्थानों पर ले जाया गया। एयरबेस के पास एक जगह पर उन्हें विमान की आवाज़ें सुनाई दे रही थीं, एक स्थान पर उन्हें जेल की कोठरी में रखा गया था।

'अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात वरिष्ठ अधिकारियों के बारे में जानकारी मांगी'

उनका कहना है कि 'उनसे जो लोग पूछताछ करने के लिए आते थे, वो सिविल ड्रेस में होते थे। पाकिस्तानी अधिकारियों ने शॉ से सीमा पर बीएसएफ की तैनाती के बारे में पूछताछ की और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात वरिष्ठ अधिकारियों के बारे में जानकारी मांगी।'

पीके शॉ बीएसएफ के 'किसान गार्ड' का हिस्सा थे

गहन पूछताछ के बावजूद शॉ संपर्क विवरण देने में असमर्थ रहे क्योंकि बीएसएफ प्रोटोकॉल के कारण उसके पास मोबाइल फोन नहीं था, हालांकि उन्हें शारीरिक यातनाएं नहीं मिली हैं।

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आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के रहने वाले पीके शॉ बीएसएफ के 'किसान गार्ड' का हिस्सा थे, जो भारतीय किसानों की सुरक्षा के लिए तैनात है। उनकी वापसी पर उनके घर मे उत्सव सा माहौल है, परिवार वालों ने इसके लिए भारत सरकार को धन्यवाद दिया है।

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