कोरोना से जंग में पड़ोसी देशों की मदद करेगा भारत, तैयार हो रही रैपिड रिस्पांस टीम
नई दिल्ली: कोरोना वायरस पूरी दुनिया में तेजी से पैर पसार रहा है। अब तक 25 लाख से ज्यादा लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं। जिसमें से 1.77 लाख लोगों की मौत हुई है। भारत और उसके पड़ोसी देश भी कोरोना से बुरी तरह प्रभावित हैं। कोरोना वायरस से चल रहे इस युद्ध में भारत ने अपने पड़ोसी देशों की मदद का फैसला लिया है। जिसके लिए एक रैपिड रिस्पांस टीम बनाई जा रही है। इससे पहले भी भारत अमेरिका, ब्राजील जैसे देशों की मदद कर चुका है।

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक भारत ने कोरोना संकट के बीच पड़ोसी देश भूटान, श्रीलंका, अफगानिस्तान और बांग्लादेश को मदद को भरोसा दिया था। जिसके लिए अब रैपिड रिस्पांस टीम तैयार की जा रही है। ये टीम इन देशों में कोरोना के प्रकोप को रोकने के लिए काम करेगी। पिछले महीने 14 सदस्यों की एक रैपिड रिस्पांस टीम मालदीव गई थी। इस दौरान टीम ने वहां पर कोरोना जांच के लिए लैब को स्थापित किया था। साथ ही वहां के स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों को कोरोना से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया था। वहीं अप्रैल की शुरूआत में एक 15 सदस्यीय टीम को कुवैत भेजा गया था। इस टीम में भारतीय सेना के स्वास्थ्य कर्मी भी शामिल थे। टीम ने कुवैत में स्वास्थ्य कर्मियों को कोरोना से निपटने के गुण सिखाए थे। वहीं तीन हफ्ते पहले भारत ने 10 टन जीवन रक्षक दवाइयां श्रीलंका भेजी थी।

हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन भेज कर चुका है मदद
कोरोना से लड़ने के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा काफी कारगर मानी जाती है। कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए भारत ने इसके निर्यात पर रोक लगा दी थी। हाल ही में अमेरिका और ब्राजील समेत 55 देशों ने भारत से हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की मांग की थी। जिसके बाद निर्यात से शर्तों के साथ पाबंदी हटा ली गई। मदद मिलने के बाद ब्राजील के राष्ट्रपति बोलसोनारो की तरफ से पीएम मोदी को चिट्ठी लिखी गई थी, जिसमें उन्होंने भारत की तारीफ की थी।












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