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India China Clash: तो क्या उस रात होने वाला था भारत-चीन युद्ध? जनरल नरवणे की किताब में क्या छपा? पूरा पढ़ें

India China Clash: सोमवार के दिन संसद में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर गंभीर ऐसे सवाल उठाए कि सत्ता पक्ष के कई नेता गुस्से में आग बबूला होने लगे। ये सवाल देश की सुरक्षा से जुड़े हुए जिसमें राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे की किताब के कुछ अंश को पढ़ने की कोशिश की। राहुल गांधी के हाथ में जो पन्ने थे उन्हें The Caravan मैग्जीन ने जनरल नरवणे की आने वाली किताब का हिस्सा होने के दावे के साथ छापा है।

मैग्जीन में घटना के बारे में क्या छपा?

दिसंबर 2019 से अप्रैल 2022 तक भारतीय सेना के प्रमुख रहे जनरल मनोज मुकुंद नरवणे से जुड़ा एक बेहद महत्वपूर्ण घटनाक्रम 31 अगस्त 2020 की रात सामने आया। यह वही दौर था जब पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच तनाव चरम पर था और हालात किसी भी समय टकराव में बदल सकते थे।

India China Clash

एक फोन कॉल जिसने हालात बदल दिए

31 अगस्त 2020 की रात करीब 8:15 बजे, भारतीय सेना की उत्तरी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल योगेश जोशी को एक फोन कॉल मिला। इस कॉल में जो जानकारी दी गई, वह बेहद चिंताजनक थी। बताया गया कि चार चीनी टैंक, पैदल सेना के सहयोग से, पूर्वी लद्दाख में रेचिन ला की ओर एक खड़ी पहाड़ी रास्ते से आगे बढ़ रहे हैं।

कैलाश रेंज के पास पहुंच चुके थे चीनी टैंक

लेफ्टिनेंट जनरल योगेश जोशी ने तुरंत इस सूचना को तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे तक पहुंचाया। नरवणे ने हालात की गंभीरता को तुरंत समझ लिया। ये चीनी टैंक कैलाश रेंज पर भारतीय ठिकानों से सिर्फ कुछ सौ मीटर की दूरी पर थे। यह वही रणनीतिक ऊंचाई थी, जिस पर भारतीय सेना ने कुछ घंटे पहले ही चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ एक खतरनाक दौड़ के बाद कब्जा किया था।

LAC पर ऊंचाई का हर मीटर क्यों था अहम?

विवादित वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के इस इलाके में ऊंचाई का हर मीटर सामरिक बढ़त देता है। कैलाश रेंज पर नियंत्रण का मतलब था कि भारतीय सेना को क्षेत्र पर बेहतर निगरानी और रणनीतिक मजबूती मिलना। यही वजह थी कि चीनी टैंकों की यह हरकत हालात को बेहद संवेदनशील बना रही थी।

चेतावनी के लिए दागा गया रोशनी वाला गोला

स्थिति को संभालने के लिए भारतीय सैनिकों ने चेतावनी के तौर पर एक रोशनी वाला गोला (illumination round) दागा। लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। चीनी सैनिक और टैंक बिना रुके आगे बढ़ते रहे, जिससे टकराव की आशंका और बढ़ गई।

नरवणे तत्काल किए एक के बाद एक तीन कॉल

हालात बिगड़ते देख जनरल नरवणे ने भारत के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के शीर्ष अधिकारियों को तुरंत फोन कॉल करने शुरू कर दिए। इनमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत, और विदेश मंत्री एस. जयशंकर शामिल थे।

"मेरे लिए क्या आदेश है?"- नरवणे

अपनी अब तक अप्रकाशित संस्मरण पुस्तक 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' में जनरल नरवणे लिखते हैं कि उस समय उन्होंने हर एक वरिष्ठ अधिकारी से सिर्फ एक ही सवाल पूछा था - "मेरे आदेश क्या हैं?" स्थिति तेजी से बिगड़ रही थी और ऐसे हालात में स्पष्ट निर्देश बेहद जरूरी थे।

गोली न चलाने का स्पष्ट आदेश, लेकिन आगे क्या?

मौजूदा प्रोटोकॉल के तहत जनरल नरवणे को यह साफ निर्देश था कि शीर्ष स्तर से मंजूरी मिलने तक गोलीबारी नहीं की जाएगी। हालांकि, इस गंभीर स्थिति में उनके वरिष्ठों की ओर से कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिया गया, जिससे असमंजस और बढ़ गया।

रात 9:10 बजे फिर आई खतरनाक अपडेट

समय बीतता गया और रात 9:10 बजे लेफ्टिनेंट जनरल योगेश जोशी का फिर से फोन आया।
उन्होंने बताया कि चीनी टैंक लगातार आगे बढ़ रहे हैं और अब वे दर्रे से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर रह गए हैं। यह स्थिति सीधे टकराव की ओर इशारा कर रही थी।

रात 9:25 बजे फिर मांगे गए स्पष्ट निर्देश

हालात की गंभीरता को देखते हुए रात 9:25 बजे जनरल नरवणे ने एक बार फिर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को फोन किया। उन्होंने "स्पष्ट दिशा-निर्देश" की मांग की, ताकि आगे की कार्रवाई तय की जा सके। लेकिन इस कॉल पर भी कोई ठोस आदेश नहीं मिला, जिससे उस रात का तनाव और गहरा गया।

संसद में क्या बोले रहे थे राहुल?

राहुल गांधी ने कहा कि बीजेपी कांग्रेस पार्टी की देशभक्ति पर सवाल उठाती है, लेकिन सशस्त्र बलों के एक शीर्ष अधिकारी द्वारा लिखी गई किताब को रोक रही है। जैसे ही उन्होंने संस्मरण से चीन और डोकलाम पर लाइनें पढ़ना शुरू किया, सत्ता पक्ष की बेंचों से जोरदार विरोध शुरू हो गया। राहुल गांधी ने कहा- चीनी टैंक भारतीय सीमा कि और बढ़ रहे थे। राहुल इसके आगे पढ़ पाते गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया।

कब आएगी जनरल नरवणे की किताब?

जनरल M M नरवणे अपनी किताब लिख चुके हैं। लेकिन पब्लिश होने से पहले इसे रक्षा मंत्रालय ने इसे साल 2023 ड्राफ्ट पढ़ने के तौर पर मंगाया था। तब से लेकर अभी तक सेना और रक्षा मंत्रालय ने इसे छापने को लेकर पब्लिशर और जनरल नरवणे को अभी तक क्लीन चिट का इंतजार कर रहे हैं।

Note:- इस खबर में दी गई पूरी जानकारी The Caravan मैग्जीन के हवाले से है। वनइंडिया इसके सही या गलत होने को लेकर कोई दावा नहीं करता। यदि इस पर पूर्व सेना प्रमुख M. M. नरवणे की कोई प्रतिक्रिया आती है तो उसे भी अपडेट किया जाएगा।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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