India Alliance Future: खत्म होने के कगार पर इंडिया गठबंधन? पी चिदंबरम के बयान ने बढ़ाया सस्पेंस
India Alliance Future: लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2024) में बीजेपी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने और कांग्रेस के 99 सीटें मिलने के पीछे इंडिया अलायंस को बड़ा कारण माना गया। राजनीतिक विश्लेषक ही नहीं कांग्रेस पार्टी के कई नेताओं ने भी माना कि पार्टी को गठबंधन के साथ चुनाव लड़ने से फायदा हुआ है। यही वजह है कि कांग्रेस बिहार में भी सहयोगी की भूमिका के लिए तैयार है और आरजेडी (RJD) ही बड़े रोल में नजर आ रही है। इंडिया गठबंधन की एकजुटता का दावा कांग्रेस और विपक्षी दल कर रहे हों, लेकिन खुद कांग्रेस के सीनियर लीडर इससे इत्तफाक रखते नजर नहीं आ रहे हैं।
पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पी चिदंबरम ने इंडिया गठबंधन के भविष्य को लेकर बड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा, 'मैं खुद निश्चित तौर पर नहीं कह सकता हूं कि इंडिया गठबंधन आगे जारी रहेगा या फिर नहीं। इंडिया अलायंस का भविष्य बहुत उज्ज्वल नजर नहीं आ रहा है।' चिदंबरम का बयान ऐसे वक्त में आया है जब कुछ ही महीनों में बिहार विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। कांग्रेस के सीनियर नेता का यह बयान बीजेपी के लिए निशाना साधने का एक और अवसर जरूर बन गया है।

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India Alliance पर दिए चिदंबरम के बयान में छिपे हैं संकेत
पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम का बयान सिर्फ राजनीतिक भर नहीं है। इसके पीछे के समीकरणों और अवसरों को टटोला जाए, तो बात काफी हद तक ठीक भी लगती है। इस साल बिहार में आरजेडी और कांग्रेस साथ मिलकर चुनाव लड़ रही हैं। हालांकि, कांग्रेस और आरजेडी के बीच कन्हैया कुमार की सक्रियता से लेकर राहुल गांधी के दलित वोट बैंक पर फोकस करने को लेकर रणनीतिक नूरा कुश्ती साफ दिखती है। अगले साल पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे दो बड़े राज्यों के चुनाव हैं। असल में इंडिया गठबंधन की एकजुटता की परीक्षा इन्हीं दोनों राज्यों में होने वाली है।
इंडिया अलायंस के भविष्य पर चिंदबरम ने क्या कहा?
कांग्रेस के सीनियर नेता पी चिदंबरम ने इंडिया अलायंस में मुद्दों पर सहमति नहीं बनने और बिखराव को लेकर अहम बात कही है। उन्होंने कहा, 'इंडिया गठबंधन एक बहुत मजबूत मशीनरी के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है। यह लड़ाई सभी मोर्चों पर लड़ा जाना चाहिए। मेरा अपना अनुभव और इतिहास के अपने अध्ययन के आधार पर कह सकता हूं कि बीजेपी जितना संगठन के तौर पर मजबूत कोई और राजनीतिक दल नहीं है। यह सिर्फ एक राजनीतिक दल नहीं है। यह एक मशीन के पीछे दूसरी मशीन है और यही दोनों मशीनें भारत की सभी सांस्थानिक मशीनरी को नियंत्रित करती हैं। निर्वाचन आयोग से लेकर देश के सबसे निचले पुलिस स्टेशन तक, वे (भाजपा) इन संस्थानों को नियंत्रित करने में सक्षम हैं। कभी-कभी तो कब्जा भी कर लेते हैं।'
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तमिलनाडु और बंगाल में इंडिया अलायंस का साथ रहना मुश्किल
बीजेपी बंगाल की सत्ता के लिए पूरा जोर लगा रही है और ममता बनर्जी किसी भी सूरत में इंडिया गठबंधन के साथ समझौता करने के मूड में नजर नहीं आ रही हैं. बीजेपी की संगठनात्मक क्षमता में पिछले डेढ़ दशक में जबरदस्त उभार देखने को मिला है। पार्टी ने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में भी अपना सक्रिय संगठन बनाया है। संगठन के साथ ही जीतने वाले कैंडिडेट को अपने दल में शामिल करना हो या फिर सहयोगियों से गठबंधन करना हो, पार्टी हाई कमान तत्परता से फैसले लेती है। तमिलनाडु में एआईएडीएमके और बीजेपी का गठबंधन हो चुका है और बंगाल में तूफानी प्रचार का दौर जारी है। कांग्रेस को 2025 विधानसभा चुनाव में स्टालिन और डीएमके को साथ लेकर चलने में भले ही ज्यादा मुश्किल न हो, लेकिन बंगाल में दीदी को मनाना टेढ़ी खीर ही होगा।












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