DMK को धूल चटाने के लिए अमित शाह ने मानी AIADMK की ये 2 शर्तें! पढ़ें BJP के साथ गठबंधन की INSIDE स्टोरी
AIADMK-BJP Alliance Tamil Nadu: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से लगभग साल भर पहले 11 अप्रैल 2025 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने AIADMK के साथ अपने चुनावी संबंधों को फिर से जीवंत कर दिया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की कि राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव भाजपा और AIADMK साथ मिलकर लड़ेगी और 'गठबंधन सरकार' बनेगी। अमित शाह ने साफ-साफ कहा कि 2026 का चुनाव AIADMK महासचिव एडप्पाडी करुप्पा पलानीस्वामी के नेतृत्व में लड़ा जाएगा।
अब चर्चा इस बात कि है कि आखिर तमिलनाडु में ये खेला हुआ कैसे? DMK को आने वाले चुनाव में धूल चटाने के लिए अमित शाह ये पूरी प्लानिंग कैसे की? अभी एक हफ्ते पहले की बात है, जब 3 अप्रैल को राज्यसभा में AIADMK के सभी चार सांसदों ने नरेंद्र मोदी सरकार के लाए गए बिल वक्फ संशोधन विधेयक का विरोध किया था और विपक्ष में वोट डाले थे। एक हफ्ते बाद 11 अप्रैल को एडप्पाडी करुप्पा पलानीस्वामी चेन्नई में अमित शाह के बगल में बैठे थे, जहां गठबंधन की घोषणा की गई।

तो ऐसे में सवाल तो बनता है कि आखिर एक हफ्ते में ऐसा क्या हो गया कि AIADMK भाजपा के साथ गठबंधन करने को तैयार हो गई। आइए समझते हैं BJP-AIADMK गठबंधन की इनसाइड स्टोरी...?
इन 2 वजहों से BJP-AIADMK के बीच हुआ गठबंधन
भाजपा के सूत्रों का कहना है कि भाजपा ने AIADMK को दो बड़े आश्वासन दिए हैं, जिसकी वजह से AIADMK का हृदय परिवर्तन हुआ है। पहला AIADMK के धुर विरोधी के. अन्नामलाई को तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के पद से हटाकर नैनार नागेंद्रन को भाजपा के राज्य प्रमुख बनाया गया है। असल में भाजपा और के बीच पहले भी गठबंधन रह चुका है, लेकिन सितंबर 2023 में यह टूट गया था। जिसकी सबसे बड़ी वजह के. अन्नामलाई द्वारा AIADMK के दिवंगत नेताओं पर की गई विवादास्पद टिप्पणियां थीं। अन्नामलाई की वजह से ही भाजपा और AIADMK में दूरी बढ़ी थी।
दूसरी वजह है परिसीमन...जी हां, भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने आश्वासन दिया है कि परिसीमन तमिलनाडु के हितों को नुकसान नहीं पहुंचाएगा। ऐसे भी ये परिसीमन का मुद्दा...कम से कम तीन या चार साल दूर है, क्योंकि अगली जनगणना को प्रकाशित होने में भी तीन साल लगेंगे। भाजपा ने ईपीएस के आलोचकों शशिकला और टीटीवी दिनाकरन से भी दूरी बनाए रखने का फैसला किया है। कहा जा रहा है कि ये दो बड़ी शर्तें मानकर ही अमित शाह ने AIADMK को गठबंधन के लिए मनाया है।
भाजपा की रणनीति ने DMK को किया हैरान
यह भाजपा की जीतने की रणनीति है, जिसने डीएमके को भी हैरान कर दिया है। डीएमके को लगा था कि एमके स्टालिन ने राज्य में 'हिंदी थोपने' और परिसीमन को लेकर जो माहौल बनाया है, उसे देखते हुए AIADMK भाजपा के साथ गठबंधन नहीं करेगी। लेकिन भाजपा का हाईकमान स्टालिन के मार्च को रोकने के महत्व को जानते थे और विपक्षी राजनीतिक ताकतों को एकजुट करने के उनके हालिया कदमों से आशंकित थे।
एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने मीडिया चैनल से कहा कि 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद इंडिया ब्लॉक अब तक एक बैठक भी आयोजित नहीं कर पाई है लेकिन स्टालिन विपक्षी नेताओं की एक सभा आयोजित करने में कामयाब रहे।
विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा और AIADMK का यह नया गठबंधन तमिलनाडु की राजनीति में एक नया अध्याय लिखेगा या नहीं...ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह गठबंधन आगामी चुनावों में कितना प्रभावी होता है।












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