एक पशुपति मंदिर दिल्ली में भी: इक्ट्ठा हो रहे हैं नेपाली
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) नेपाल से सैकड़ों किलोमीटर दूर राजधानी में भी है एक पशुपतिनाथ मंदिर। ये ईस्ट दिल्ली के कड़कड़डूमा इलाके में है। इधर का इन दिनों माहौल खुशनुमा नहीं है। आसपास के इलाकों में रहने वाले नेपाली लोग इधर आ रहे है। एक-दूसरे से बतिया रहे हैं। अपने देश में भूकंप से हुई त्रासदी पर बात कर रहे हैं। इधर जब से नेपाल में भूकंप आया है तब से वहां पर घायलों के स्वस्थ होने के लिए पूजा हो रही है।

त्रासदी से बेहद आहत
मंदिर के पंडितजी येसु सरन कहते हैं कि हम भारत में रहने वाले नेपाली अपने देश में हुई त्रासदी से बेहद आहत हैं। जब से नेपाल में भूकंप आया है तब से इधर सैकड़ों नेपाली आ रहे हैं। कुछ देर बैठने और पूजा करने के बाद निकल जाते हैं अपने घरों को।
हजारों नेपाली
राजधानी में हजारों की तादाद में नेपाली रहते हैं। ये अलग-अलग तरीके के काम करते हैं। इस बीच, राजधानी में दिल्ली यूनिवर्सिटी के नेपाली मूल के छात्र नेपाल में भूकंप राहत के लिए लोगों से मदद मांग रहे हैं। ये डीयू और आसपास के इलाकों में घूम रहे हैं।
राजधानी के नेपाल दूतावास के दफ्तर में मौत का सन्नाटा पसरा है। इधर भी रोज बहुत से नेपाली पहुंचकर अपने देश के ताजा सूरते हाल की जानकारी ले रहे हैं। जब से नेपाल को जलजलें ने बर्बाद किया है,तब से इधर का मंजर भी अलग तरह का है। इधर काम करने वाले सभी नेपाली नागरिकों के जेहन में अपने देश और परिवारजनों को लेकर ही ख्याल आ रहे हैं।
स्टाफ सन्न है
कुछ दिन पहले यहां पर काम करने वाले एक डिप्लोमेट श्री एस. छत्री से बात हुई। वे कहने लगे कि नेपाल में जो कुछ हुआ है, उससे सारा स्टाफ सन्न है। स्तब्ध है। सब लोग शोकाकुल है। कुछ समझ नहीं आ रहा कि अब क्या होगा। नेपाल दूतावास में करीब 250 लोगों का स्टाफ है। रोज यहां से काफी लोगों को नेपाल जाने के लिए वीजा जारी होता है।












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