lok sabha election results 2019: इसबार यूपी, बंगाल और ओडिशा के दम पर मोदी बनेंगे पीएम?

नई दिल्ली- बीजेपी को उम्मीद है कि यूपी में उसे जो चुनौती मिल रही है, उसकी भरपाई वो बंगाल और ओडिशा से अच्छे से कर सकती है। पार्टी का अपना अनुमान है कि दोनों राज्यों में उसके उम्मीदवार अंतिम नतीजे आने तक काफी बेहतरीन प्रदर्शन करके दिखाएंगे। इलेक्शन कैंपेन के दौरान ही पार्टी के सीनियर नेताओं को इल्मा था कि अगर उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा और आरएलडी (SP, BSP and RLD) के महागठबंधन (Mahagathbandhan) ने उसके सामने कड़ी चुनौती पेश की तो बंगाल, ओडिशा और कर्नाटक समेत बाकी राज्यों की अतिरिक्त 120 सीटें उसके नुकसानों की भरपाई कर सकती है। क्योंकि, पिछली बार उत्तर प्रदेश में पार्टी और उसकी सहयोगी ने 80 में से 73 सीटें जीती थीं।

यहां पिछला प्रदर्शन दोहराना आसान नहीं

यहां पिछला प्रदर्शन दोहराना आसान नहीं

भाजपा (BJP) को पता है कि यूपी के अलावा कुछ और राज्यों में भी पिछला प्रदर्शन दोहराना लगभग नामुमकिन है। खासकर तब जब पांच वर्षों में वहां के राजनीतिक हालात काफी बदल चुके हैं। जैसे मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान। इन तीनों राज्यों पर पिछले दिसंबर में हुए विधानसभा चुनावों में पार्टी के हाथ से सत्ता छिन चुकी है। यही नहीं, गुजरात में भी पार्टी ने पिछली बार सभी 26 सीटें जीत ली थीं और हो सकता है कि पार्टी यहां भी पिछला प्रदर्शन न दोहरा पाए। लेकिन, पार्टी लीडरशिप यह मान कर चल रही है कि यह लोकसभा का चुनाव हुआ है और इसके नतीजे मोदी फैक्टर पर काम करेंगे।

यहां से भरपाई की उम्मीद

यहां से भरपाई की उम्मीद

मौजूदा सियासी हालातों और जमीनी हकीकत को समझते हुए ही बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह (Amit Shah) ने इस बार दक्षिण और पूर्वी भारत की 120 सीटों पर अपना पूरा फोकस लगाया। हालांकि, चुनाव के बाद के जितने भी सर्वे और एग्जिट पोल आए हैं, उससे साउथ में तो सीटों के लिहाज से बीजेपी के लिए उम्मीदों की कोई खास किरण नहीं दिखाई दे रही है, लेकिन पश्चिम बंगाल (West Bengal) और ओडिशा (Odisha) ने उसकी संभावनाएं उम्मीदों पर खड़ी होती दिखाई गई हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल (West Bengal) में पार्टी का वोट शेयर 17.02 फीसदी और ओडिशा में 18 फीसदी रहा था। बंगाल में बीजेपी को ध्रुवीकरण का फायदा मिलता दिख रहा है, तो ओडिशा (Odisha) में पुलवामा आतंकी हमले (Pulwama terror attack) और बालाकोट एयरस्ट्राइक (Balakot airstrike) ने उसके चांस ज्यादा बढ़ा रखे हैं। ओडिशा में बीजेपी को वैसी चुनौतियों का सामना भी नहीं करना पड़ रहा है, जैसा उसे पश्चिम बंगाल में वहां की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) और उनकी पार्टी टीएमसी (TMC) के आक्रामक प्रतिरोध का सामना करना पड़ा है। एग्जिट पोल के नतीजे बताते हैं कि ओडिशा के वोटरों ने लोकसभा के लिए तो बीजेपी का समर्थन किया है, लेकिन विधानसभा चुनावों में राज्य की सत्ताधारी बीजेडी (BJD) का साथ देती दिख रही है।

कर्नाटक से भी बीजेपी को उम्मीद

कर्नाटक से भी बीजेपी को उम्मीद

तमाम एग्जिट पोल्स के जो नतीजे आए हैं, उससे लगता है कि कर्नाटक में बीजेपी (BJP) इस बार कांग्रेस-जेडीएस (JDS) के गठबंधन के बावजूद उनका सफाया कर सकती है। पिछले विधानसभा चुनाव में भी पार्टी वहां की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन कांग्रेस-जेडीएस (JDS) के बीच गठबंधन हो जाने से वह सरकार नहीं बना पाई। इस तरह से बीजेपी मानकर चली है कि यूपी में जो भी नुकसान होता है, वह ओडिशा, बंगाल, कर्नाटक और नॉर्थ-ईस्ट में पहले से ज्यादा सीटें लाकर फिर से मोदी को प्रधानमंत्री बना सकती है।

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