जस्टिस वर्मा के खिलाफ चलेगा महाभियोग? किरेन रिजिजू ने दिया बड़ा जवाब, जानिए क्या होता है Impeachment Motion?
Impeachment Motion: आगामी मानसून सत्र के दौरान संसद में एक बड़ा घटनाक्रम देखने को मिल सकता है, कैश कांड मामले में जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ केंद्र सरकार संसद में महाभियोग प्रस्ताव ला सकती है। महाभियोग के लिए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सभी पार्टियों से बात करनी शुरू भी कर दी है। 'द हिंदू' से बात करते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पुष्टि की।
उन्होंने कहा, "मैंने राजनीतिक दलों से संपर्क करना शुरू कर दिया है क्योंकि यह एक गैर-राजनीतिक मुद्दा है और सभी दलों के लिए इसमें शामिल होना बेहतर होगा।" आपको बता दें कि सरकार ने संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से 12 अगस्त 2025 तक चलाने का निर्णय लिया है।

आपको बता दें कि कुछ सांसदों ने जस्टिस वर्मा पर पद के दुरुपयोग, न्यायिक आचरण की मर्यादा के उल्लंघन और फैसलों में कथित पक्षपात का आरोप लगाया है। अगर यह प्रस्ताव सदन में आता है तो यह भारतीय न्यायिक इतिहास में एक बड़ी संवैधानिक प्रक्रिया की शुरुआत होगी।
क्या है महाभियोग प्रस्ताव? (Impeachment Motion)
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124(4) के तहत सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के किसी भी न्यायाधीश को महाभियोग के माध्यम से हटाया जा सकता है, यदि वे साबित तौर पर "दुराचार" या "कार्य में अक्षमता" के दोषी पाए जाएं। इसके लिए संसद के दोनों सदनों - लोकसभा और राज्यसभा - में दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित होना आवश्यक है।
क्या है जस्टिस वर्मा पर आरोप (Impeachment Motion)
आपको बता दें कि 14 मार्च 2025 को जस्टिस वर्मा के लुटियंस दिल्ली स्थित घर में आग लगी थी, उस वक्त उनके घर से 500-500 रुपए के जले नोटों के बंडल मिले थे, जिसे देखकर हर कोई हैरान था। सभी के मन में केवल एक यही सवाल था कि जस्टिम वर्मा के घर इतना कैश कहां से आया? सियासी गलियारों में इसे लेकर प्रश्न किए गए थे और इसी बीच जस्टिम वर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया था।
तत्कालीन CJI संजीव खन्ना ने जांच समिति बनाई (Impeachment Motion)
लेकिन विवाद बढ़ने के बाद 22 मार्च को इस मामले में तत्कालीन CJI संजीव खन्ना ने जांच समिति बनाई थी। कमेटी ने 3 मई को रिपोर्ट तैयार की और 4 मई को CJI को सौंपी थी। कमेटी ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ आरोपों को सही पाया और उन्हें दोषी ठहराया था। इसके बागद 8 मई को संजीव खन्ना ने राष्ट्रपति मुर्मू और पीएम मोदी को चिठ्ठी लिखी थी, जिसमें वर्मा के खिलाफ महाअभियोग चलाने की बात कही गई थी।
विपक्ष ने मचाया हंगामा, मांगा सरकार से जवाब
जस्टिस वर्मा को लेकर विरोधी दलों ने काफी हंगामा किया था और सरकार से भी इस बारे में सवाल किए गए थे। विपक्ष के कुछ सदस्यों द्वारा आरोप लगाया गया है कि जस्टिस वर्मा ने कुछ मामलों में निष्पक्षता की भावना को ठेस पहुंचाई है।
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