कोरोना से जूझ रहे गुजरात पर अब मंडराया 'चक्रवात' का खतरा, अरब सागर में सक्रिय 2 तूफान

नई दिल्ली। पिछले हफ्ते ओडिशा और पश्चिम बंगाल में आए चक्रवाती तूफान 'अम्फान' ने जबरदस्त तबाही मचाई थी, इस तूफान की वजह से पश्चिम बंगाल में 85 लोगों की मौत हो गई थी और करोड़ों का आर्थिक नुकसान भी हुआ था, बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कहा था कि ये कोरोना से भी भारी तूफान था, जिसने राज्य को काफी नुकसान पहुंचाया है, इस तबाही से अभी देश उबर भी नहीं पाया है कि एक और चक्रवाती तूफान की आहट ने लोगों को दहशत में ला दिया है, दरअसल मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि गुजरात पर 'चक्रवाती तूफान' का खतरा मंडरा रहा है, मालूम हो कि गुजरात पहले ही कोरोना की वजह से काफी त्रस्त है, यहां पर कोरोना वायरस के संक्रमितों का आंकड़ा 14 हजार पार चला गया है, पिछले 24 घंटों के दरम्यान यहां 400 से ज्यादा नए मामले सामने आए है,ऐसे में तूफान की खबर ने लोगों को परेशान कर दिया है।

गुजरात पर मंडराया 'चक्रवात' का खतरा

गुजरात पर मंडराया 'चक्रवात' का खतरा

दरअसल भारतीय मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि गुजरात के अरब सागर में एक नया चक्रवात पैटर्न उभर रहा है, जो कि 3 जून के आसपास गुजरात के तट से टकरा सकता है, फिलहाल अभी की स्थिति को देखते हुए कहा जा सकता है कि एक शक्तिशाली तूफान जून के पहले सप्ताह में गुजरात के तटों से टकरा सकता है, जिससे कि गुजरात और महाराष्ट्र के कई जिलों में भारी बारिश होने के आसार हैं।

'गुजरात पर एक नहीं दो तूफान का खतरा'

'गुजरात पर एक नहीं दो तूफान का खतरा'

आईएमडी ने कहा कि गुजरात पर एक नहीं दो तूफान का खतरा मंडरा रहा है, विभाग के मुताबिक पहला तूफान 1 से 3 जून के बीच और दूसरा तूफान 6 जून को आने की संभावना है। अगर 1- 3 जून के बीच तूफान आता है, तो तूफान की गति लगभग 110 किमी / घंटा के आस-पास होगी जो कि सौराष्ट्र , पोरबंदर, जूनागढ़, अमरेली, राजकोट और भावनगर जिलों को प्रभावित करेगी, जबकि 6 जून वाला तूफान गुजरात और महाराष्ट्र दोनों राज्यों को प्रभावित करेगा।

 क्यों आते हैं 'चक्रवात'?

क्यों आते हैं 'चक्रवात'?

पृथ्वी के वायुमंडल में हवा होती है, समुद्र के ऊपर भी जमीन की तरह ही हवा होती है, हवा हमेशा उच्च दाब से निम्न दाब वाले क्षेत्र की तरफ बहती है. जब हवा गर्म हो जाती है तो हल्की हो जाती है और ऊपर उठने लगती है, जब समुद्र का पानी गर्म होता है तो इसके ऊपर मौजूद हवा भी गर्म हो जाती है और ऊपर उठने लगती है. इस जगह पर निम्न दाब का क्षेत्र बनने लग जाता है, आस पास मौजूद ठंडी हवा इस निम्न दाब वाले क्षेत्र को भरने के लिए इस तरफ बढ़ने लगती है. लेकिन पृथ्वी अपनी धुरी पर लट्टू की तरह घूमती रहती है, इस वजह से यह हवा सीधी दिशा में ना आकर घूमने लगती है और चक्कर लगाती हुई उस जगह की ओर आगे बढ़ती है, इसे चक्रवात कहते हैं।

 ऐसे रखें जाते हैं तूफानों के नाम

ऐसे रखें जाते हैं तूफानों के नाम

दरअसल 1945 के पहले तक किसी भी चक्रवात का कोई नाम नहीं होता था, लिहाजा मौसम वैज्ञानिकों को बहुत दिक्‍कत होती थी। जब वो अपने अध्‍ययन में किसी चक्रवात का ब्‍योरा देते थे, या चर्चा करते थे, तब वर्ष जरूर लिखना होता था और अगर वर्ष में थोड़ी सी भी चूक हो गई, तो सारी गणित बदल जाती थी। इसी दिक्‍कत से निबटने के लिये 1945 से विश्‍व मौसम संगठन ने चक्रवातों को नाम देने का निर्णय लिया और तब से अब तक जितने भी चक्रवात आये उन्‍हें अलग-अलग नाम दिए जाते हैं।

सम संख्या वाले वर्षों में तूफानों के नाम महिलाओं के नाम

वैसे इससे पहले कहा जाता है कि तूफानों के नाम नाविक अपनी प्रेमिकाओं के नाम पर रखते थे इसलिए शुरुआत में औपचारिक रूप से तूफानों के नाम महिलाओं के नाम से होते थे, 70 के दशक से यह परंपरा बदल गई और तूफानों के नाम महिला और पुरुष दोनों के नाम पर होने लगे, सम संख्या वाले वर्षों में तूफानों के नाम महिलाओं के नाम और विषम संख्या वाले वर्षों में यह पुरुषों के नाम पर होता है।

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