ICMR की स्टडी: डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ कोरोना से ठीक हो चुके लोगों में वैक्सीन की एक ही डोज काफी
नई दिल्ली, 03 जुलाई। कोरोना वायरस के खिलाफ देश में टीकाकरण अभियान युद्धस्तर पर जारी है, इस बीच कोविड के डेल्टा वेरिएंट को लेकर इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की एक स्टडी सामने आई है। रिचर्स में पाया गया है कि जो लोग कोरोवा वायरस को मात दे चुके हैं और वैक्सीन की एक या दोनों खुराक ले चुके हैं वह कोविड डेल्टा स्ट्रेन से उन लोगों की तुलना में ज्यादा सुरक्षित हैं जो कोविशील्ड की एक या दोनों खुराक ले चुके हैं।

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आईसीएमआर की स्टडी के नतीजों से पता चला है कि कोरोना वायरस के डेल्टा के खिलाफ सुरक्षा मामले में इंसानी शरीर में हॉर्मोनल और कोशिकीय इम्यून सिस्टम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बता दें कि कोरोना का डेल्टा स्ट्रेन अन्य वेरिएंट से ज्यादा खतरनाक पाया गया है। वॉलंटियर्स पर किए गए रिसर्च में पता चला कि डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ सफलता मामले में संक्रमित हो चुके व्यक्ति के शरीर में वैक्सीन की एक खुराफ ने भी बेहतर प्रदर्शन किया है। जबकि कोविशील्ड को दोनों डोज लेने के बाद भी व्यक्ति में डेल्टा वेरिएंट से संक्रमण का खतरा बना रहता है।
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स्टडी में इसके पीछे की वजहों के बारे में बताते हुए कहा गया है कि कोरोना वायरस को मात दे चुके लोगों के शरीर में संक्रमण के खिलाफ एंटीबॉडी पहले की तुलना में और अधिक मजबूत हो जाती है, जो मरीजों को नए स्ट्रेन से लड़ने में मदद करते हैं। ऐसे में कोविड वैक्सीन की एक भी खुराक उन्हें कोविड के खतराक स्ट्रेन डेल्टा से सुरक्षा प्रदान करती है। आपको बता दें कि हाल ही में स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सीन के फाइनल ट्रायल की रिपोर्ट सामने आई है जिसमें दावा किया गया है कि टीका डेल्टा वायरस से भी लोगों की सुरक्षा करता है। कोवैक्सीन डेल्टा वेरिएंट पर 65.2 फीसदी असरदार है।












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