IAS: इंजीनियरिंग के बाद पास किया UPSC, फिर एक विवाद ने बदली जिंदगी! चर्चा में क्यों कुत्ता टहलाने वाले ऑफिसर?
IAS Sanjeev Khirwar: दिल्ली का त्यागराज स्टेडियम और शाम के वक्त खाली मैदान में टहलता एक कुत्ता... साल 2022 की इस तस्वीर ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के गलियारों में हलचल मचा दी थी। 1994 बैच के अनुभवी एजीएमयूटी (AGMUT) कैडर के अधिकारी संजीव खिरवार, जो कभी दिल्ली सरकार के सबसे ताकतवर अफसरों में गिने जाते थे, रातों-रात विवादों के केंद्र में आ गए।
एथलीट्स को समय से पहले बाहर निकालकर स्टेडियम में कुत्ता टहलाने के आरोप ने उन्हें लद्दाख की ठंडी वादियों में 'पनिशमेंट पोस्टिंग' पर भेज दिया था। लेकिन अब, करीब तीन साल बाद केंद्र सरकार ने संजीव खिरवार को वापस दिल्ली ट्रांसफर कर दिया है। उनकी यह वापसी प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। यह उनके करियर का एक बड़ा यू-टर्न माना जा रहा है।

बीटेक से आईएएस तक, मेधावी छात्र की प्रशासनिक यात्रा
संजीव खिरवार का जन्म दिल्ली में ही हुआ और उनकी शुरुआती शिक्षा-दीक्षा काफी शानदार रही। उन्होंने कंप्यूटर साइंस में बीटेक (B.Tech) की डिग्री हासिल की, जो उनकी तकनीकी समझ को दर्शाती है। इसके बाद उन्होंने अर्थशास्त्र (Economics) में मास्टर डिग्री ली।
पढ़ाई में उनकी इसी प्रतिभा का नतीजा था कि 1994 में उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास की और आईएएस अधिकारी (IAS) बने। उनकी पहली पोस्टिंग चंडीगढ़ में एसडीएम (SDM) के तौर पर हुई थी, जहां से उनके 28 साल लंबे प्रशासनिक सफर की शुरुआत हुई।
महत्वपूर्ण पदों और मंत्रालयों का अनुभव
अपने लंबे करियर में खिरवार ने कई राज्यों और विभागों में काम किया है:
- केंद्र सरकार में भूमिका: 2009 से 2014 के बीच वे महिला एवं बाल विकास मंत्री के निजी सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहे।
- राज्यों में सेवाएं: वे गोवा में उत्पाद शुल्क और वित्त आयुक्त रहे। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश और अंडमान-निकोबार में सचिव के रूप में अपनी सेवाएं दीं।
- दिल्ली में दबदबा: दिल्ली में उन्होंने स्वास्थ्य, राजस्व, वित्त और सामान्य प्रशासन जैसे भारी-भरकम विभाग संभाले। कोरोना काल के दौरान वे दिल्ली के डिविजनल कमिश्नर थे, जो मुख्य सचिव के बाद प्रशासन का सबसे अहम चेहरा होता है।
त्यागराज स्टेडियम विवाद, एक 'वॉक' जो पड़ी भारी
मई 2022 में इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट ने दावा किया कि त्यागराज स्टेडियम में खिलाड़ियों और कोचों को शाम 7 बजे तक ट्रेनिंग खत्म करने को मजबूर किया जाता था। ताकि आईएएस संजीव खिरवार और उनकी पत्नी रिंकू दुग्गा, वह भी आईएएस अधिकारी थी, वहां अपने कुत्ते को टहला सकें।
इस खबर के साथ वायरल हुए वीडियो और फोटो ने देशभर में नाराजगी पैदा कर दी। हालांकि खिरवार ने कुत्ता टहलाने की बात मानी लेकिन खिलाड़ियों की प्रैक्टिस रोकने के आरोपों को नकारा। लेकिन नैतिकता के आधार पर सरकार ने कड़ा फैसला लेते हुए उन्हें लद्दाख और उनकी पत्नी को अरुणाचल प्रदेश भेज दिया।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और अनिवार्य रिटायरमेंट
इस तबादले पर राजनीति भी खूब हुई। किरण बेदी ने जांच पूरी होने तक छुट्टी पर भेजने की बात कही, तो उमर अब्दुल्ला और महुआ मोइत्रा जैसे नेताओं ने लद्दाख और नॉर्थ-ईस्ट को 'सजा की जगह' के तौर पर पेश किए जाने पर आपत्ति जताई थी। इस विवाद का असर उनकी पत्नी रिंकू दुग्गा पर भी पड़ा, जिन्हें बाद में सरकार द्वारा अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) दे दी गई।
दिल्ली वापसी और करियर का नया अध्याय
लद्दाख में सेवा देने के बाद अब संजीव खिरवार की दिल्ली वापसी को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। एजीएमयूटी कैडर के नियमों और प्रशासनिक जरूरतों के तहत हुए इस ट्रांसफर ने एक बार फिर पुरानी यादें ताजा कर दी हैं।
एक सख्त और कार्यकुशल अधिकारी की छवि रखने वाले खिरवार के लिए यह वापसी चुनौतियों भरी हो सकती है। त्यागराज स्टेडियम का वह विवाद आज भी उनके नाम के साथ जुड़ा हुआ है। यह मामला सिविल सेवा के अधिकारियों के लिए एक मिसाल है कि कैसे सार्वजनिक संसाधनों का निजी इस्तेमाल करियर की दिशा बदल सकता है।
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