चेहरे पर लगी गोली, फिर भी नहीं रुके कदम! लांस नायक मीनाची सुंदरम की कहानी, कैसे किया आतंकियों को ढेर?
Lance Naik Meenatchi Sundaram A: दक्षिण कश्मीर की कठिन पहाड़ियों और घने इलाकों में आतंकवाद के खिलाफ चलने वाले अभियानों में हर कदम पर खतरा होता है। यहां तैनात जवानों को कई बार ऐसे हालात का सामना करना पड़ता है जहां एक पल की हिचकिचाहट भी भारी पड़ सकती है।
ऐसे ही एक ऑपरेशन में भारतीय सेना के एक जवान ने ऐसी बहादुरी दिखाई, जिसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है। कई बार युद्धभूमि में कुछ पल ऐसे आते हैं जो किसी सैनिक की पूरी जिंदगी और पहचान बदल देते हैं। दक्षिण कश्मीर में एक आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान भी ऐसा ही एक पल आया।

गोलियों की गड़गड़ाहट के बीच लांस नायक मीनाची सुंदरम ए (Lance Naik Meenatchi Sundaram A) ने ऐसा फैसला लिया जिसने न सिर्फ ऑपरेशन की दिशा बदल दी, बल्कि उन्हें देश के सबसे बड़े वीरता पुरस्कारों में से एक तक पहुंचा दिया। उस दिन हालात इतने मुश्किल थे कि किसी के लिए भी आगे बढ़ना आसान नहीं था, लेकिन इस जवान ने जो किया, उसने उसे भारतीय सेना के सबसे बहादुर सैनिकों की कतार में खड़ा कर दिया। आखिर कौन हैं लांस नायक मीनाची सुंदरम ए और किस घटना ने उन्हें कीर्ति चक्र का सम्मान दिलाया, पढ़िए पूरी कहानी।
कौन हैं लांस नायक मीनाची सुंदरम? (Lance Naik Meenatchi Sundaram A)
लांस नायक मीनाची सुंदरम ए भारतीय सेना की रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी से जुड़े हैं। वह उस समय 34 राष्ट्रीय राइफल्स (34 RR) के साथ तैनात थे। राष्ट्रीय राइफल्स की इकाइयां जम्मू-कश्मीर के संवेदनशील इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियानों की जिम्मेदारी संभालती हैं। दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जैसे क्षेत्रों में ये जवान लगातार सर्च ऑपरेशन, घेराबंदी और आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करती है।
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19 दिसंबर 2024 को सुरक्षा एजेंसियों को आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। इसके बाद कुलगाम जिले में एक विशेष अभियान शुरू किया गया। लांस नायक मीनाची सुंदरम उस टीम का हिस्सा थे, जिसे आतंकवादियों तक पहुंचने और उन्हें घेरने की जिम्मेदारी दी गई थी। ऑपरेशन के दौरान जवानों का आतंकवादियों से आमना-सामना हो गया। देखते ही देखते दोनों ओर से गोलीबारी शुरू हो गई और इलाका युद्ध क्षेत्र में बदल गया।
चेहरे और कंधे में लगी गोली
मुठभेड़ के दौरान आतंकवादियों की गोली लांस नायक मीनाची सुंदरम के चेहरे और दाहिने कंधे में लगी। यह चोट इतनी गंभीर थी कि सामान्य परिस्थितियों में कोई भी व्यक्ति लड़ने की स्थिति में नहीं रहता। लेकिन उन्होंने खुद को पीछे नहीं हटने दिया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने अपनी स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखा। उन्होंने न केवल लड़ाई जारी रखी बल्कि बेहद नजदीक से एक आतंकवादी पर सटीक निशाना साधकर उसे ढेर कर दिया।
सेना के अधिकारियों के अनुसार, जिस स्थिति में वह घायल हुए थे, उसमें उनका लड़ाई जारी रखना अपने आप में असाधारण साहस का उदाहरण था। उनकी कार्रवाई ने ऑपरेशन की दिशा बदल दी और साथी जवानों को आगे बढ़ने का मौका मिला। रक्षा मामलों से जुड़े कई विशेषज्ञों और पूर्व सैनिकों ने उनकी बहादुरी की सराहना करते हुए उन्हें "मैन ऑफ स्टील" तक कहा। उनका यह जज्बा बताता है कि भारतीय सेना के जवान किस तरह अपने कर्तव्य को सबसे ऊपर रखते हैं।
कीर्ति चक्र से किया गया सम्मानित
लांस नायक मीनाची सुंदरम की बहादुरी को देश ने भी सलाम किया। 14 अगस्त 2025 को 79वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर भारत के राष्ट्रपति ने भारतीय सेना के लिए चार कीर्ति चक्र पुरस्कारों को मंजूरी दी थी। इनमें एक नाम लांस नायक मीनाची सुंदरम ए का भी था। उनके अलावा यह सम्मान पैरा स्पेशल फोर्सेज और सिक्किम स्काउट्स के कुछ अन्य वीर सैनिकों को भी प्रदान किया गया।
राष्ट्रपति भवन में मिला सम्मान
8 जून 2026 को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित डिफेंस इन्वेस्टिचर सेरेमनी 2026 (फेज-1) के दौरान राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से कीर्ति चक्र प्रदान किया। इस समारोह में उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और सेना के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। सम्मान पत्र में उनकी "अटूट इच्छाशक्ति और असाधारण बहादुरी" पर विशेष जोर दिया गया।
क्या है कीर्ति चक्र?
कीर्ति चक्र भारत का दूसरा सबसे बड़ा शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है। यह उन सैन्यकर्मियों और अन्य सुरक्षा कर्मियों को दिया जाता है जिन्होंने बेहद जोखिम भरी परिस्थितियों में असाधारण साहस का प्रदर्शन किया हो। आतंकवाद विरोधी अभियानों में दिखाई गई वीरता के लिए यह सम्मान कई बार उन सैनिकों को दिया जाता है जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना मिशन को सफल बनाया।
युवाओं के लिए प्रेरणा बनी मीनाची सुंदरम की कहानी
लांस नायक मीनाची सुंदरम की कहानी केवल एक सैन्य अभियान की सफलता तक सीमित नहीं है। यह साहस, धैर्य, कर्तव्यनिष्ठा और मानसिक मजबूती का उदाहरण भी है। सेना में जाने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए उनकी बहादुरी कई महत्वपूर्ण गुणों को सामने लाती है। इनमें मुश्किल हालात में निर्णय लेने की क्षमता, दबाव में शांत रहना, साथियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना और लक्ष्य पूरा करने का संकल्प शामिल है।
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