गॉडफादर ना होने के कारण हो रही है आलोचना, चुनाव लड़ने के लिए सुशांत जैसे मामलों की जरूरत नहीं: गुप्तेश्वर पांडे

पटना। बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गुप्तेश्वर पांडे ने बुधवार को कहा था कि अगर मौका मिला तो वह चुनाव लड़ेंगे क्योंकि वह राजनीति को लोगों की सेवा करने का सबसे बड़ा मंच मानते हैं, जिसके बाद वो आलोचनाओं के केंद्र में हैं, जिस पर आज उन्होंने कहा कि यह तो होगा ही क्‍योंकि मेरा कोई गॉडफादर नहीं है, कोई पॉलिटिकल बैकग्राउंड नहीं है। हम खेती-किसानी करते थे, भैंसे चराते थे। वहां से आए हैं, यह कुछ लोगों को स्‍वीकार्य नहीं लेकिन मैं पीछे हटने वालों में से नहीं हूं और ना ही आलोचनाओं से घबराता हूं, मालूम हो कि पांडेय ने मंगलवार को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ले ली थी।

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    'वे लोग निर्णय करेंगे जो हमारी मिट्टी के हैं'

    'वे लोग निर्णय करेंगे जो हमारी मिट्टी के हैं'

    मालूम हो कि एक दिन पहले ही गुप्तेश्वर पांडेय ने सोशल मीडिया पर 'मेरी कहानी मेरी जुबानी' शीर्षक के तहत लोगों के साथ संवाद करते हुए कहा था कि अगर मौका मिला और इस योग्य समझा गया कि मुझे राजनीति में आना चाहिए तो मैं आ सकता हूं लेकिन वे लोग निर्णय करेंगे जो हमारी मिट्टी के हैं, बिहार की जनता हैं और उसमें पहला हक तो बक्सर के लोगों का है जहां मैं पला-बढ़ा हूं। उन्होंने कहा कि राजनीति में आने का अब मेरा मन हो गया है, अब स्थिति ऐसी बन गई है कि मुझे लगता है कि अब इसमें आ जाना चाहिए।

    बोले गुप्तेश्वर पांडे- क्या चुनाव लड़ना एक पाप है?

    बोले गुप्तेश्वर पांडे- क्या चुनाव लड़ना एक पाप है?

    उन्होंने कहा कि हर कोई पूछ रहा था कि क्या मैं चुनाव लड़ूंगा। हालांकि मैं अभी तक किसी भी राजनीतिक पार्टी में शामिल नहीं हुआ हूं... मैं सिर्फ यह पूछना चाहता हूं कि क्या चुनाव लड़ना एक पाप है? क्या मैं वीआरएस लेने के बाद चुनाव लड़ने वाला पहला व्यक्ति होऊंगा? क्या ऐसा करना (चुनाव लड़ना) असंवैधानिक, गैरकानूनी या अनैतिक है?

    मैंने कोई राजनीतिक पार्टी ज्वाइन की है: गुप्तेश्वर पांडे

    मैंने कोई राजनीतिक पार्टी ज्वाइन की है: गुप्तेश्वर पांडे

    जबकि कल सुबह की प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा था कि मैंने ना कोई राजनीतिक पार्टी ज्वाइन की है, ना मैं कोई राजनेता हूं, अगर राजनीति ज्वाइन करूंगा तो आप सबको बताकर ज्वाइन करूंगा, समाज की सेवा करने के लिए राजनीति ही सिर्फ एक माध्यम नहीं है, अगर मैं खुद को चुनाव के लायक समझूंगा को सबको जरूर बताऊंगा, जो कुछ भी कहा जा रहा, वो सिर्फ अटकलें हैं। आपको बता दें कि गुप्तेश्वर पांडे के नौकरी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद से ही चर्चा गर्म है कि उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर VRS लिया है, वो राजनीति में प्रवेश करना चाहते हैं, और वो इस बार बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं।

    मेरे VRS का सुशांत मामले से कोई लेना-देना नहीं-गुप्तेश्वर पांडे

    गुप्तेश्वर पांडे ने कहा कि कई लोग मुझे ट्रोल कर रहे हैं, मेरे वीआरएस से सुशांत मामले का कोई लेना देना नहीं है, मैंने सुशांत के निराश और हताश पिता की मदद की लेकिन मेरी सीबीआई की अनुशंसा पर भी सवाल उठे, हमने हंगामा तब किया जब हमारी पुलिस के साथ गलत हुआ, मैंने सुशांत के इंसाफ के लिये लड़ाई लड़ी, उसे लोग राजनीति से जोड़ रहे हैं जो गलत है।मैंने उस मामले में जो भी किया कानूनी हैसियत और राज्य के पुलिस महानिदेशक की हैसियत से किया, जो इस पद आसीन रहने वाले को बिहार के स्वाभिमान के लिए करना चाहिए, हमारी लड़ाई किसी मराठी या महाराष्ट्र के किसी व्यक्ति से नहीं है, हमारी लड़ाई मुठ्ठी भर उन लोगों से है जिनके निहित स्वार्थ इस केस में लिप्त हैं और ऐसे ही लोग मुझे बदनाम करने की कोशिश करते हैं तथा सुशांत मामले से मेरे वीआरएस को जोड़ने की कोशिश करते हैं।

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