आखिरकार सिद्धू को ही पंजाब का 'कैप्टन' मानने वाले अमरिंदर हैं कितनी प्रॉपर्टी के मालिक

सीएम अमरिंदर सिंह के पास दुबई में भी एक घर है, जिसकी कीमत करीब 96 लाख रुपए है।

नई दिल्ली, 22 जुलाई: अपनी ही पार्टी में कलह का लंबा दौर झेलने के बाद आखिकार पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने नवजोत सिंह सिद्धू को सूबे के नए 'कैप्टन' के तौर पर स्वीकार कर लिया है। इससे पहले दोनों नेताओं के बीच तगड़ा सियासी घमासान चला और दिल्ली में बैठे कांग्रेस नेताओं को पंजाब तक दौड़ लगानी पड़ी। कई दौर की बैठकों के बाद जब कोई हल निकलता हुआ नजर नहीं आया तो कांग्रेस आलाकमान ने सिद्धू को पंजाब कांग्रेस की कमान सौंप दी। हालांकि 2022 का पंजाब विधानसभा चुनाव कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। इस बीच आइए जानते हैं कि पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह कितनी प्रॉपर्टी के मालिक हैं?

इतने करोड़ के मालिक हैं अमरिंदर

इतने करोड़ के मालिक हैं अमरिंदर

कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब की पटियाला विधानसभा सीट से विधायक हैं। 2017 के विधासनभा चुनाव में इलेक्शन कमीशन को दिए अपने शपथ-पत्र में अमरिंदर सिंह ने कुल 48 करोड़ 31 लाख रुपए की प्रॉपर्टी का खुलासा किया था। अमरिंदर सिंह के नाम पर कोई गाड़ी नहीं है, लेकिन उनके परिवार के लोगों के पास 16 लाख रुपए कीमत की दो गाड़ियां हैं। इसके अलावा अमरिंदर सिंह और उनके परिवार के लोगों के पास करीब 1 करोड़ पांच लाख रुपए की ज्वैलरी है।

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    अमरिंदर के पास दुबई में 96 लाख रुपए का घर

    अमरिंदर के पास दुबई में 96 लाख रुपए का घर

    अचल संपत्ति के तौर पर पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह और उनकी फैमिली के नाम पर 3 करोड़ 53 लाख रुपए की कृषि भूमि है। इसके अलावा उनकी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर करीब 73 लाख रुपए की गैर-कृषि भूमि भी है। अमरिंदर सिंह और उनके पारिवारिक लोग करीब 38 करोड़ रुपए की तीन आवासीय बिल्डिंग के मालिक हैं, जिनमें से एक दुबई में और उसकी कीमत 96 लाख रुपए है।

    जब अमरिंदर को मिले महज 856 वोट

    जब अमरिंदर को मिले महज 856 वोट

    1980 में कांग्रेस में शामिल हुए अमरिंदर सिंह ने 1984 में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार के विरोध में पार्टी और लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद वो कांग्रेस छोड़कर शिरोमणि अकाली दल से जुड़े, लेकिन 1992 में वहां से भी इस्तीफा देकर अपने नए राजनीतिक दल 'शिरोमणि अकाली दल (पंथिक)' का गठन किया। हालांकि, 1998 में अमरिंदर सिंह को उस वक्त तगड़ा झटका लगा, जब अपनी ही विधानसभा में उन्हें महज 856 वोट मिले। इसके बाद अमरिंदर सिंह ने अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में कर दिया।

    सिद्धू-अमरिंदर के बीच कैसे पलटा पासा

    सिद्धू-अमरिंदर के बीच कैसे पलटा पासा

    दिल्ली में जैसे ही इस बात का फैसला हुआ कि पंजाब के अगले कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू होंगे, अमरिंदर सिंह की नाराजगी की खबरें भी मीडिया में आने लगीं। यहां तक कि सिद्धू के ताजपोशी कार्यक्रम में भी अमरिंदर सिंह के ना शामिल होने के संकेत मिले। अमरिंदर से जुड़े सूत्रों ने बताया कि जब तक सिद्धू अपने ट्वीट और बयानों को लेकर उनसे माफी नहीं मांगेंगे, वो कार्यक्रम में नहीं जाएंगे। लेकिन, जब कांग्रेस के 58 विधायकों ने अपने हस्ताक्षर वाला निमंत्रण कार्ड अमरिंदर सिंह को भेजा तो पासा पूरी तरह पलट गया।

    और इस वजह से राजी हुए अमरिंदर सिंह

    और इस वजह से राजी हुए अमरिंदर सिंह

    इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक, इन 58 विधायकों ने स्पष्ट तौर पर कहा कि वो कैप्टन अमरिंदर सिंह का सम्मान करते हैं, लेकिन उनका रुख कांग्रेस आलाकमान के निर्देशों के खिलाफ है। इसके साथ ही पहले दिन से सिद्धू के साथ नजर आए कैप्टन से नाराज चारों कैबिनेट मंत्री त्रिपत राजिंदर सिंह बाजवा, सुखजिंदर सिंह रंधावा, चरणजीत सिंह चन्नी और सुखविंदर सिंह सरकारिया ने पर्सनली मुख्यमंत्री अमरिंदर से मुलाकात की और उन्हें कार्यक्रम में आने के लिए कहा। अमरिंदर सिंह को यह भी अंदेशा था कि अगर वो ताजपोशी कार्यक्रम में शामिल नहीं होते हैं तो कांग्रेस कैडर के बीच उन्हें लेकर एक नेगेटिव मैसेज जाएगा। इसके बाद ताजपोशी कार्यक्रम को लेकर अमरिंदर सिंह का रुख बदल गया।

    तो क्या पिघल गया है सिद्धू को लेकर अमरिंदर का दिल?

    तो क्या पिघल गया है सिद्धू को लेकर अमरिंदर का दिल?

    सिद्धू की ताजपोशी के कार्यक्रम के लिए सीएम अमरिंदर सिंह को दो निमंत्रण पत्र भेजे गए थे। इनमें से एक निमंत्रण पत्र पर नवजोत सिंह सिद्धू, चारों कार्यकारी अध्यक्ष और कांग्रेस के 58 विधायकों के हस्ताक्षर थे, जबकि दूसरा निमंत्रण सिद्धू ने खुद साइन करके पर्सनली भेजा था। इस निमंत्रण पत्र में सिद्धू ने स्पष्ट तौर पर लिखा कि उनका कोई भी व्यक्तिगत एजेंडा नहीं है और वो उन्हें पंजाब कांग्रेस में सबसे बड़ा मानते हैं। इसके तुरंत बाद अमरिंदर सिंह ने दो सीनियर नेताओं के साथ मुलाकात और कांग्रेस के सभी सांसदों-विधायकों को चाय पार्टी का निमंत्रण भेज दिया।

    अमरिंदर ने ताजपोशी के जरिए साधे दो निशाने

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    माना जा रहा है कि सिद्धू के ताजपोशी कार्यक्रम में शामिल होकर अमरिंदर सिंह ने पार्टी में अपनी 'बड़े भाई' की इमेज को कायम रखने की कोशिश की है। इसके साथ ही उन्होंने विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए विरोधी खेमे को यह भी दिखाने की कोशिश की है कि पार्टी एकजुट हैं। चाय पार्टी में कैप्टन अमरिंदर सिंह केवल नवजोत सिंह सिद्धू से ही नहीं मिले, बल्कि उन्हें प्रदेश कांग्रेस के सभी नेताओं से भी मुलाकात की। यानी सिद्धू को लेकर अमरिंदर सिंह का दिल वाकई पिघल गया है या नहीं, इसे लेकर आने वाले कुछ दिनों में स्पष्ट संकेत मिल जाएंगे।

    चाय पर मिटे सिद्धू-अमरिंदर के गिले-शिकवे

    चाय पर मिटे सिद्धू-अमरिंदर के गिले-शिकवे

    नवजोत सिंह सिद्धू की ताजपोशी से पहले मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने शुक्रवार को पंजाब भवन में पार्टी के सभी सांसदों और विधायकों को चाय पर आमंत्रित किया। चाय का दौर चला तो नवजोत सिंह सिद्धू भी अमरिंदर सिंह और पंजाब के प्रभारी महासचिव हरीश रावत के साथ बैठकर चर्चा करते हुए नजर आए। दोनों की फोटो मीडिया में जारी हुई और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बयान दिया कि पंजाब में पार्टी का संकट अब सुलझ गया है।

    अमरिंदर से सामने ही मंच से सिद्धू ने 'मारा शॉट'

    अमरिंदर से सामने ही मंच से सिद्धू ने 'मारा शॉट'

    पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर नवजोत सिंह सिद्धू की ताजपोशी हुई तो उनके अंदर का क्रिकेटर भी जाग गया। शुक्रवार को ताजपोशी के दौरान जब नवजोत सिंह सिद्धू भाषण देने के लिए उठे, तो उन्होंने मंच पर सीएम अमरिंदर सिंह से सामने ही अपने दोनों हाथ घुमाते हुए शॉट लगाने के अंदाज में पोज दिया। इसके बाद वो भाषण देने गए और मंच से कहा कि कांग्रेस के सारे कार्यकर्ता और नेता एकजुट हैं और सब मिलकर दिल्ली मॉडल के परखच्चे उड़ा देंगे।

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