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दिनेश त्रिवेदी को बिना बारी कैसे मिला राज्यसभा में बोलने का मौका, TMC को दिख रही है ये साजिश

नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस ने शुक्रवार को राज्यसभा में उसके सांसद दिनेश त्रिवेदी को बिना बारी के बोलने का मौका दिए जाने का आरोप लगाते हुए सभापति से इस मामले की जांच की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि त्रिवेदी को बजट पर बहस के दौरान सदन में बोलने का मौका दिया गया,जबकि पार्टी ने इसके लिए उनके नाम का प्रस्ताव ही नहीं दिया था। गौरतलब है कि पूर्व रेलमंत्री ने शुक्रवार को सदन में खड़े होकर संसद सदस्यता से अपने इस्तीफे का ऐलान किया था। अब ममता बनर्जी की पार्टी को लग रहा है कि यह सब एक साजिश के तहत किया गया ताकि पार्टी को बदनाम किया जा सके।

बिना बारी के कैसे बोले दिनेश त्रिवेदी-टीएमसी

बिना बारी के कैसे बोले दिनेश त्रिवेदी-टीएमसी

राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू को रविवार को लिखे खत में सदन में टीएमसी के चीफ व्हिप सुखेंदु शेखर रॉय ने कहा है कि पार्टी ने 2021-22 के बजट पर बहस के लिए पार्टी के सिर्फ दो वक्ताओ को बोलने का प्रस्ताव दिया था- अबीर रंजन बिश्वास और खुद उनका। उसमें त्रिवेदी का नाम शामिल नहीं था। पार्टी ने अपने लिए निर्धारित समय पर बोलकर उसका उपयोग कर लिया। ऐसे में उन्होंने सवाल किया है कि फिर त्रिवेदी को बोलने की अनुमति कैसे दी गई। रॉय ने जो खत लिखा है उसके मुताबिक, 'जब माननीया वित्त मंत्री बजट पर हुए बहस का जवाब देने वाली थीं, टीएमसी के एक सदस्य दिनेश त्रिवेदी, जो कि इस्तीफा दे चुके हैं, उन्हें दोपहर बाद 1.25 से 1.29 तक बोलने दिया गया। जबकि, उनका नाम बजट पर बोलने के लिए टीएमसी ने प्रस्तावित नहीं किया था और पार्टी का समय भी नहीं बचा हुआ था।'

क्या पार्टी को बदनाम करने की साजिश रची गई-टीएमसी

क्या पार्टी को बदनाम करने की साजिश रची गई-टीएमसी

उन्होंने आगे लिखा है, 'त्रिवेदी को राज्यसभा की गैलरी में सीट आवंटित की गई थी, लेकिन वह काउंसिल चैंबर तक आ गए और बोलना शुरू कर दिया...अपने निजी राजनीतिक इरादों आदि के लिए अपनी पंसद की सीट पर पहुंचकर और आसन ने बजट पर बहस के दौरान उनके अनाधिकृत हस्तक्षेप के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। वो जिस पार्टी में हैं उसी के खिलाफ बोला और अपने सदन में अपने प्रस्तावित इस्तीफे के नाम पर पार्टी के खिलाफ कुछ बेवजह के आरोप लगा गए।' पार्टी ने राज्यसभा के सभापति से अपील की है कि फौरन इसपर एक जांच बिठाएं कि सदन में यह सब कैसे हुआ और क्या इसके पीछे टीएमसी को बदनाम करने की कोशिश साजिश काम कर रही थी।

'दम घुंटने' की बात कहकर त्रिवेदी ने दिया इस्तीफा

'दम घुंटने' की बात कहकर त्रिवेदी ने दिया इस्तीफा

गौरतलब है कि शुक्रवार को पूर्व रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने राज्यसभा के अंदर अचानक उठकर अपने इस्तीफे की घोषणा कर दी थी। उन्होंने दावा किया था कि वह अब ऐसी स्थिति में पहुंच चुके हैं कि उनका 'दम घुंटने' लगा है। उन्होंने कहा है कि इस फैसले के लिए मजबूर होना पड़ा है और उनके पास अपनी अंतरात्मा के सुनने के अलावा कोई चारा नहीं है। उन्होंने बंगाल में जारी राजनीतिक हिंसा पर गंभीर सवाल उठाए हैं और कहा है कि यह सब देखकर वह शांत नहीं बैठ सकते। बाद में उन्होंने कई इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की खूब तारीफ की है और कहा है कि उन्होंने जिस इरादे से ममता बनर्जी के साथ टीएमसी का गठन किया था, वह पार्टी अब उन मूल्यों को छोड़ चुकी है। यही नहीं उन्होंने कहा कि उन्होंने टीएमसी को नहीं छोड़ा है, बल्कि टीएमसी के मूल्यों ने उन्हें छोड़ दिया है।

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