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Hottest Year: मौसम के इतिहास का सबसे गर्म साल रहा 2024, गर्मी के बढ़े 41 दिन, 3700 लोगों की गई जान

Hottest Year 2024: उम्‍मीदों भरा नया साल 2025 दस्‍तक दे रहा है। साल 2024 कई अच्‍छी-बुरी यादें देकर विदाई ले रहा है। साल 2024 में सूरज के तेवर नरम नहीं पड़े। नतीजा यह रहा कि साल 2024 को मौसम के इतिहास का सबसे गर्म साल माना गया है। जलवायु परिवर्तन के कारण वर्ष 2024 में दुनियाभर में भीषण गर्मी के दिनों की संख्या में 41 की वृद्धि हुई है।

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वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन के प्रमुख डॉ. फ्रेडरिक ओटो का कहना है कि यह साल 2024 अब तक का सबसे गर्म वर्ष रहा है। इसमें गर्मी की वजह से 3,700 से अधिक लोगों की जान चली गई और लाखों लोगों को गर्मी से संबंधित बीमारियों का शिकार होना पड़ा है। जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान नहीं बढ़ा बल्कि बाढ़, तूफान और सूखे की समस्या भी आई है।

डॉ. ओटो इस बात पर जोर देते हैं कि जब तक जीवाश्म ईंधन जलाए जाते रहेंगे, जलवायु संबंधी समस्याएं और भी बदतर होती जाएंगी। शोध में चेतावनी दी गई है कि अगर तापमान में सालाना 2 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होती है, तो 2040 तक स्थितियां भयावह हो सकती हैं।

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Hottest Year 2024: साल 2024 में 150 से ज्‍यादा दिन पड़ी गर्मी

रिपोर्ट में बताया गया है कि 29 में से 26 प्राकृतिक आपदाएँ जलवायु परिवर्तन से जुड़ी थीं। दुनियाभर के कुछ क्षेत्रों में, गर्मी 150 दिनों से ज़्यादा समय तक बनी रही। जलवायु क्षति को कम करने के लिए तत्काल कार्रवाई ज़रूरी है। वैश्विक गर्मी की लहर लगभग 13 महीने तक चली।

सूडान, नाइजीरिया और कैमरून जैसे अफ्रीकी देशों में भीषण गर्मी के कारण प्राकृतिक आपदाओं से 2,000 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई। उत्तरी कैलिफ़ोर्निया और डेथ वैली में भी अत्यधिक तापमान का सामना करना पड़ा। दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में भीषण गर्मी के कारण स्कूल बंद कर दिए गए।

Hottest Year 2024: जलवायु कार्रवाई के लिए जागरूकता बढ़ाना

क्लाइमेट सेंट्रल की क्रिस्टीना डाहल का कहना है कि कम आबादी वाले और विकसित देश ऐसी घटनाओं से ज़्यादा प्रभावित होते हैं। जलवायु परिवर्तन के मुद्दों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए जागरूकता बढ़ाना बहुत ज़रूरी है।

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने चेतावनी दी है कि अगर कोई कार्रवाई नहीं की गई तो जलवायु से जुड़ी घटनाएं बढ़ सकती हैं। इस साल जीवाश्म ईंधन के जलने के कारण पिछले साल की तुलना में अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन हुआ, जिससे ग्रह और अधिक गर्म हो गया।

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