HIV एड्स एक्ट 2017 हुआ लागू, जानिए इसके बारे में सबकुछ

नई दिल्ली। 10 सितंबर से HIV एड्स एक्ट 2017 को लागू कर दिया गया है। इसकी जानकारी परिवार कल्याण मंत्रालय ने मंगलवार को दी। इस बिल को लोकसभा और राज्यसभा में मंजूरी मिलने के बाद 10 सितंबर से लागू कर दिया गया है। इस बिल को मार्च में राज्यसभा में मंजूरी मिल गई थी। इस बिल में एड्स के मरीजों से भेदभाव को अपराध माना गया है। इस बिल को भारत के लिए काफी अहम माना जा रहा है।

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भेदभाव करना माना जाएगा अपराध

भेदभाव करना माना जाएगा अपराध

1. इस एक्ट के लागू होने के बाद एड्स पीड़ितों को संपत्‍ति में पूरे अधिकार के साथ स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं से जुड़ी हर मदद मिलेगी।

2. इस तरह के मरीजों से भेदभाव को अपराध माना जाएगा। HIV एड्स एक्ट 2017 के तहत भेदभाव के दोषी पाए जाने पर सजा के रूप में तीन महीने से लेकर दो साल तक की जेल और एक लाख तक के जुर्माने का प्रावधान है।

3.HIV एड्स एक्ट 2017 के अनुसार, किसी मरीज को उसकी सहमति के बिना एचआईवी टेस्ट या किसी मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है।

4. एचआईवी पॉजिटिव शख्स अपना स्टेटस उजागर करने पर मजबूर होगा, जब इसके लिए कोर्ट का ऑर्डर लिया जाएगा।

दो साल तक की सजा का भी प्रावधान

दो साल तक की सजा का भी प्रावधान

5. इसके लिए लाइसेंस्ड ब्लड बैंक और मेडिकल रिसर्च के उद्देश्यों के लिए सहमति जरूरी नहीं, जब तक उस व्यक्ति के एचआईवी स्टेटस को पब्लिक न किया जाए।

6. एचआईवी पीड़ित नाबालिग को उसके परिवार के साथ रहने की अनुमति मिलेगी।

7. ये एक्ट द्वारा पीड़ित मरीज के खिलाफ भेदभाव और नफरत फैलाने से रोकने में कारगर साबित होगा।

10 सितंबर से एक्ट हुआ लागू

10 सितंबर से एक्ट हुआ लागू

8. मरीज को एंटी-रेट्रोवाइरल थेरेपी का न्यायिक अधिकार भी मिलेगा। इसके तहत हर मरीज को एचआईवी प्रिवेंशन, टेस्टिंग, ट्रीटमेंट आदि का अधिकार मिलेगा। ये राज्य और केंद्र की जिम्मेदारी है कि मरीजों में इंफेक्शन रोकने और उनके उचित उपचार में मदद करें।

9. सरकारों को इन मरीजों के लिए कल्याणकारी योजनाएं शुरू करने को भी कहा गया।

10. मरीजों को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य प्रॉपर्टी, किराए पर मकान जैसी सुविधाओं को देने से इनकार करना आदि भी भेदभाव ही माना जाएगा। किसी को नौकरी, शिक्षा या स्वास्थ्य सुविधा देने से पहले एचआईवी टेस्ट करवाना भी भेदभाव के तहत माना जाएगा।

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