Chandrayaan 3: आखिर क्यों इसरो चंद्रमा के साउथ पोल पर ही भेजता है उपग्रह, क्या है खास
Chandrayaan 3: इसरो आज चंद्रयान-3 का ऐतिहासिक लॉन्च करने जा रहा है। इसे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से दोपहर 2.35 बजे लॉन्च किया जाएगा। यह मिशन चंद्रयान के तहत तीसरा अभियान है।
चंद्रयान 2 को 2019 में लॉन्च किया गया था, मिशन 3 उसी का फॉलोअप है। चंद्रयान दो की बात करें तो यह पूरी तरह से सफल नहीं हो सका था। चंद्रमा की सतह पर लैंडर और रोवर सॉफ्ट लैंडिंग नहीं कर सके थे।

इसरो के अनुसार चंद्रयान 3 30 दिन के भीतर चंद्रमा की ऑर्बिट में पहुंचेगा। इसका रोवर प्रज्ञान और लैंडर विक्रम चांद की सतह पर 23 अगस्त को लैंड करेगा। दिलचस्प बात यह है कि इसरो ने चंद्रयान 3 को साउथ पोल पर 70 डिग्री एल्टिट्यूट पर लैंड कराने का फैसला लिया है, यहीं पर चंद्रयान 2 ने भी लैंडिंग की कोशिश की थी।
अगर सबकुछ ठीक जाता है तो चंद्रयान 3 दुनिया का पहले मिशन होगा जो साउथ पोल पर लैंडिंग करेगा। फिलहाल अभी तक स्पेसक्राफ्ट या तो इक्वेटर पर लैंड किए हैं या फिर साउथ पोल और नॉर्थ पोल से कुछ डिग्री पर लैंड किए हैं।
चांद का पोलर क्षेत्र काफी मुश्किल है। इसके कुछ इलाकों में काफी अंधेरा है, जहां सूरज की रोशनी बिल्कुल नहीं आती है। यह -230 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा ठंडा है। यही वजह है कि यहां पर इलेक्ट्रॉनिक इंस्ट्रूमेंट काम नहीं करते हैं। यही नहीं यहां पर कई किलोमीटर तक गड्ढे भी हैं।
सवाल यह उठता है कि साउथ पोल में ऐसा क्या है। शोध के अनुसार इस क्षेत्र में कई चौंकाने वाली जानकारी मिल सकती है जिससे पूरा वैज्ञानिक समुदाय चकित हो सकता है। भारत के चंद्रयान 1 मिशन ने खुलासा किया था कि यहां पर पानी मौजूद है।
यहां पर हजारों साल तक चीजें सुरक्षित हो सकती हैं क्योंकि यहां का तापमान बहुत कम है। लिहाजा यहां की मिट्टी और पत्थरों से सोल सिस्टम की और विस्तृत जानकारी मिल सकती है।












Click it and Unblock the Notifications