हैदराबाद में कैंसर की दवा में मिला जानलेवा बैक्टीरिया, लेबनान-यमन के अधिकारियों ने किया टेस्ट, नोटिस जारी
लेबनान और यमन के हेल्थ अधिकारियों को हैदराबाद की सेलोन लैब्स की ओर से बनाई जाने वाली कैंसर की दवा में जानलेवा बैक्टिरिया मिला है। अब लैब को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

Health News: देश में कोरोना के बढ़ते मामलों के खौफ के बीच हैदराबाद से एक हैरान करने वाली खबर मिली है। यहां लेबनान और यमन के स्वास्थ्य अधिकारियों ने सेलोन लैब्स द्वारा बनाई गई एक कैंसर की दवा को बैन कर दिया है, क्योंकि उन्हें इस मेडिसिन के एक बैच में स्यूडोमोनास नामक जानलेवा बैक्टीरिया मिला है। बैक्टीरिया के मिलने का दावा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने किया है।
बच्चों में प्रतिकूल प्रभाव दिखने पर किया दवा का टेस्ट
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस संबंध में लोकसभा को सूचित किया है और बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चार घटिया और दूषित मेडिसिन के बारे में अलर्ट जारी किया था, जिसमें सेलोन लैब द्वारा बनाई गई मेथोट्रेक्सेट जोकि एक इंजेक्टेबल कीमोथेरेपी और इम्यून सिस्टम सप्रेसेंट में इस्तेमाल की जाकी है। अलर्ट में कहा गया है कि यमन और लेबनान में स्वास्थ्य अधिकारियों ने बच्चों में प्रतिकूल प्रभावों को देखने के बाद दवा का टेस्ट किया और इसे दूषित पाया।
सेलोन लैब्स को कारण बताओ नोटिस जारी
साथ ही बताया कि दवा अनौपचारिक बाजारों के माध्यम से दोनों देशों में पहुंच सकती है। निर्माता उस उत्पाद की सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकता। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि इसे लेकर संगठन चिंतित है कि दवा अनौपचारिक बाजारों के माध्यम से अन्य देशों में भी पहुंच सकती है। तेलंगाना ड्रग कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन के संयुक्त निदेशक जी रामधन ने टीओआई को बताया कि, 'हमने सेलोन लैब्स को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और उन्हें दवा का उत्पादन बंद करने के लिए कहा है। कैंसर की दवा के इस बैच का नंबर MTI2101BAQ है।
इस पहले भी संदेह के घेरे में आ चुकी हैं दवाएं
दरअसल, सेलोन लैब्स (Celon Laboratories) एक विशेष जेनेरिक फर्म है। यूके के सार्वजनिक स्वामित्व वाले इंपैक्ट निवेशक सीडीसी ग्रुप पीएलसी द्वारा समर्थित है। हाल के दिनों में भारतीय दवाओं पर संदेह के घेरे में आने का यह तीसरा उदाहरण था। पिछले अक्टूबर में हरियाणा की मेडेन फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड को तब बंद कर दिया गया था, जब डब्ल्यूएचओ द्वारा निर्मित कफ सिरप को गाम्बिया में 69 बच्चों की मौत से जोड़ा गया था।












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