एकता कपूर की बढ़ी मुश्किलें , "XXX सीजन 2" वेब सीरीज के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने से HC ने किया इंकार
एकता कपूर की बढ़ी मुश्किलें , "XXX सीजन 2" वेब सीरीज के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने से HC ने किया इंकार
मुंबई। बॉलीवुड की फेमस डायरेक्टर-प्रड्यूसर एकता कपूर एक बार फिर अपनी एक वेब सीरीज को लेकर विवादों में आ चुकी है। इस विवाद में उनकी मुसीबत बढ़ती हुई नजर आ रही है। पिछले कुछ दिनों से ओटीपी प्लेटफार्म पर प्रसारित हो रहे वेब सीरीज ट्रिपल एक्स का सीजन 2 की सीन पर विवाद मच हुआ था। अब एकता कपूर की विवादित वेब सीरीज XXX: Uncensored 2 को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। बुधवार को मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने ओटीटी प्लेटफॉर्म ऑल्ट बालाजी पर प्रसारित होने वाली इस वेब सीरीज के विवादित दृश्यों को लेकर दर्ज एफआईआर रद्द करने के लिए एकता कपूर की याचिका को खारिज कर दिया है। इस एफआईआर में एकता कपूर पर वेब सीरीज से अश्लीलता, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और राष्ट्रीय प्रतीक चिन्हों के अपमान का आरोप लगाया है।

वेब सीरीज में अश्लीलता परोसने का लगा था आरोप
टीवी निर्माता-सह-फिल्म निर्माता को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और आईपीसी के संबंधित धाराओं के तहत बुक किया गया था। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने एकता कपूर की एक याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने वेब सीरीज "XXX सीजन 2" में कथित आपत्तिजनक अश्लील सामग्री के लिए दायर एक मामले को खारिज करने की मांग की गई थी। बता दें कुछ समय पहले एकता कपूर को इस वेबसीरीज के कारण रेप की धमकी भी मिल चुकी है।

एकता कपूर को इस आरोप से कोर्ट ने दी राहत
एकल पीठ ने अपने निर्णय में कहा कि लगता है कि मुकदमे के तथ्य ऐसे नहीं हैं कि अदालत सीआरपीसी की धारा 482 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कम से कम सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 व 67-ए और भारतीय दंड विधान की धारा 294 (अश्लीलता) के तहत दर्ज प्राथमिकी रद्द कर सकती है। हालांकि कोर्ट ने वेब सीरीज के जरिए धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और राष्ट्रीय प्रतीक चिन्हों के अनुचित इस्तेमाल को लेकर एफआईआर में लगाए गए आरोपों से एकता कपूर को राहत दी है।

कोर्ट ने एकता कपूर की फटकार लगाई
न्यायाधीश शुक्ला ने दो आरोपों के लिए निर्माता को फटकार लगाई।" एकता कपूर पर IPC की धारा 294 (अश्लीलता), 298 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना), और आईटी अधिनियम और भारत के राज्य प्रतीक (निषेध प्रयोग का निषेध) अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधान थे। कोर्ट ने कहा कि ये कहना पर्याप्त रुप से ठीक होगा कि मामले में भारतीय दंड विधान की धारा 298 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना) और भारत के राजकीय प्रतीक (अनुचित प्रयोग का निषेध) अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं पाया गया है।

एकता कपूर के खिलाफ इन्होंने दर्ज करवाई थी एफआईआर
एकता कपूर के खिलाफ इंदौर के बाशिंदों-वाल्मीक सकरगाये और नीरज याग्निक की शिकायत पर भारतीय दंड विधान की धारा 294 (अश्लीलता) और 298 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना) के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम एवं भारत के राजकीय प्रतीक (अनुचित प्रयोग का निषेध) अधिनियम के संबद्ध प्रावधानों के तहत यहां अन्नपूर्णा पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई थी। उनका अरोप था कि एकता कपूर के बालाजी की वेब सीरीज ट्रिपल एक्स के सीजन 2 के जरिए समाज में अश्लीलता फैलाई गई।इसके अलावा धार्मिक भावनाओं को आहत की गया इसके अलावा इंडियन आर्मी और इंडियन पुलिस की वर्दी को आपत्तिजनक तौर पर पेश करते हुए राष्ट्रीय प्रतीक चिन्हों का अपमान किया गया। इसी आधार पर स्थानीय लोगों की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। जिसको रद्द करने के लिए एकता कपूर ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था लेकिन वहां से भी उन्हे बड़ा झटका मिला है।












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