आपने देखी क्या आनंद महिंद्रा की जवानी की Photo? 1972 की ये दिलचस्प स्टोरी आपको भी आएगी पसंद
मुंबई, 13 नवंबर। भारत के दिग्गज उद्योगपति आनंद महिंद्रा को हाल ही में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्म भूषण के सम्मान से नवाजा। भारत का यह तीसरा सर्वोच्च नागरिक अवॉर्ड व्यापार और उद्योग जगत में उनके योगदान और काम के लिए दिया गया। आनंद महिंद्रा अपनी सफलता से तो लोगों को प्रेरित करते ही है, साथ-साथ ही साथ वह सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहते हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी युवावस्था की तस्वीर साझा की जिसमें उनकी उम्र सिर्फ 17 साल है।

आनंद महिंद्रा की पोस्ट वायरल
66 वर्षीय उद्योगपति आनंद महिंद्रा आज भी यंग नजर आते हैं लेकिन जिस ब्लैक एंड ह्वाइट फोटो को उन्होंने शेयर किया, उसमें जवानी की ओर कदम बढ़ाते आनंद महिंद्रा नजर आ रहे हैं। फोटो के साथ आनंद महिंद्रा ने यह भी बताया कि वह 17 साल की उम्र में अपने वीकेंड पर क्या करते थे। आनंद महिंद्रा का यह पोस्ट अब तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। लोगों को उनकी फोटो खूब पसंद आ रही है।

'72 में-मैं 17 साल का'
आनंद महिंद्रा की यह तस्वीर 1972 में ली गई थी जब वह सिर्फ 17 साल के थे। आनंद महिंद्रा ने कैप्शन में लिखा, 'मेरी जवानी के सबसे अच्छे वीकेंड को याद करते हुए। '72 में-मैं 17 साल का था। एक दोस्त और मैं अक्सर ट्रकों पर सवारी करके 'बॉम्बे' से 'पूणा' तक सहयात्री हुआ करते थे। शायद तभी मुझमें खुली सड़क के लिए इतना प्यार उमड़ा। उस दौरान फिल्म 'परिचय' आई थी और हम 'मुसाफिर हूं यारों' गा रहे थे।'

यूजर ने पूछा- आप दोनों के बीच क्या हुआ?
क्या इस पोस्ट ने आपको अपने बचपन की सुनहरी यादों के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया? लगभग दो घंटे पहले शेयर किए जाने के बाद से इस पोस्ट को 6,400 से अधिक लाइक्स मिल चुके हैं। जहां कुछ ने कमेंट बॉक्स में अपनी बेशकीमती यादें साझा कीं, वहीं अन्य ने उद्योगपति के ट्वीट की तारीफ की। एक यूजर ने कहा, तो 'मुसाफिर हूं यारों' और महिंद्रा के बीच क्या हुआ?' इसका जवाब आनंद ने एक और खूबसूरत लाइन से दिया। उन्होंने लिखा, 'मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंजिल मगर लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया...'

मैं इस अवार्ड के लिए "अयोग्य" हूं: महिंद्रा
लोग उस समय चौंक गए थे जब आनंद महिंद्र ने पद्म पुरस्कार लेने के बाद कहा कि मैं इसके अयोग्य हूं। उन्होंने ट्वीट में लिखा, 'इस सरकार ने पद्म अवार्ड प्राप्त करने वालों ने प्रकृति को लेकर लंबे से लंबित परिवर्तनकारी बदलाव किया है। अब जमीनी स्तर पर महत्वपूर्ण योगदान देने वाले और सुधार करने वाले व्यक्तियों पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित किया जाता है। मैं वास्तव में उस कैटेगरी में शामिल होने लिए स्वयं को योग्य महसूस नहीं कर रहा हूं।'
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