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Haryana Agniveer Reservation: हरियाणा में कांग्रेस की उम्मीदों पर पानी फेर देगा भाजपा का ये दांव?

Haryana Agniveer Reservation: हरियाणा में बीजेपी की जिस दुखती रग को दबाने का कांग्रेस कोई मौका नहीं छोड़ती थी, नायब सिंह सैनी की सरकार ने उसे ही अपना हथियार बना लिया है। अग्निवीर योजना पर हरियाणा सरकार ने ऐसा दांव खेला है, जो 50:50 वाले राज्य की कहानी पलट भी सकता है।

अग्निवीरों के लिए खुला हरियाणा सरकार का द्वार
हरियाणा के सीएम नायब सिंह ने बुधवार को एलान किया है कि अग्निवीरों के लिए राज्य में कॉन्स्टेबल, माइनिंग गार्ड, फॉरेस्ट गार्ड, जेल वार्डन से लेकर एसपीओ तक के पदों पर 10% पद आरक्षित किए जाएंगे।

इतना ही नहीं बीजेपी सरकार ने प्रदेश में अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों में आने के लिए और भी कई तरह की रियायतें दी हैं, साथ ही अपना कारोबार शुरू करने और निजी क्षेत्र में नौकरियां करने के लिए भी अनेकों घोषणाएं की हैं।

haryana agniveer reservation

अग्निपथ योजना को कांग्रेस ने बनाया है बड़ा मुद्दा
हरियाणा में हुए लोकसभा चुनावों में कांग्रेस और बीजेपी दोनों को ही 10 में से 5-5 सीटें मिली हैं। कांग्रेस को प्रदेश में जिस समाजिक उलझनों का सबसे ज्यादा फायदा मिला है, उनमें किसानों की केंद्र और प्रदेश सरकार से कथित नाराजगी और 'अग्निपथ' योजना को लेकर लोगों में मौजूद तमाम तरह की 'भ्रांतियां' शामिल हैं।

लोकसभा चुनाव परिणामों से उत्साहित कांग्रेस हरियाणा विधानसभा चुनावों में बेरोजगारी, अग्निवीर और किसानों के मुद्दे को ही फिर से भुनाने की तैयारी में है। अभी बीजेपी के पास राज्य में कांग्रेस के खिलाफ कानून और व्यवस्था का पिछले 10 साल का रिकॉर्ड, भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई जैसे ही मुद्दे अहम थे।

अग्निवीरों को आरक्षण देकर हरियाणा सरकार खेला है बड़ा दांव
लेकिन, अग्निवीरों के लिए तमाम तरह की घोषणाएं करके बीजेपी सरकार ने कांग्रेस की उम्मीदों पर पानी फेरने की कोशिश की है। क्योंकि, लोकसभा चुनावों में भाजपा की सीटें आधी जरूर हुई हैं, लेकिन अभी भी वह प्रदेश की विधानसभा सीटों पर नंबर वन के स्थान पर बनी हुई है या बहुमत के जादुई आंकड़े को छूती नजर आती है।

राज्य में लोकसभा की 10 सीटों के दायरे में विधानसभा की 90 सीटें हैं। लोकसभा चुनावों में इनमें से 44 विधानसभा सीटों पर भाजपा को बढ़त मिली हुई है। मतलब, वह जादुई आंकड़े के बिल्कुल पास है। अकेले कांग्रेस बीजेपी से पीछे है और आम आदमी पार्टी को मिली बढ़त जोड़ने पर ही इंडिया ब्लॉक का आंकड़ा 46 तक पहुंचता है।

हरियाणा में जातीय गणित दुरुस्त कर चुकी है बीजेपी
उधर बीजेपी विधानसभा चुनावों के हिसाब से जातीय गणित पहले से ही सेट कर रही है। ओबीसी वर्ग से आने वाले सैनी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर हैं। पंजाबी समाज से आने वाले एमएल खट्टर केंद्र में मंत्री बन चुके हैं। ब्राह्मण बिरादरी से आने वाले मोहन लाल बडौली को हाल ही में प्रदेश बीजेपी की कमान दी गई है।

मंगलवार को ही केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह हरियाणा में 'ओबीसी सम्मान सम्मेलन' को संबोधित कर चुके हैं और कांग्रेस को एंटी-ओबीसी पार्टी के तौर पर पेश करने की कोशिश की है।

कांग्रेस के सामने चुनौती
दूसरी तरफ कांग्रेस मुख्य रूप से पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के नेतृत्व पर निर्भर है, जो मोटे तौर पर पार्टी के लिए जाट वोट गोलबंद करने में माहिर बताए जाते हैं। वहां पार्टी को हुड्डा के अलावा रणदीप सुरजेवाला और कुमारी शैलजा के गुटों में तालमेल बिठाए रखने की चुनौती बीजेपी से दो-दो हाथ करने से कम बड़ी नहीं है।

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