हरभजन की सिक्योरिटी में अब तैनात होंगे CRPF कमांडो, राघव समेत AAP के 6 बागी सांसदों की कैसी होगी सुरक्षा?
Harbhajan Singh Security Row: पंजाब की राजनीति में इस वक्त 'पावर गेम' अपने चरम पर है। आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर मचे घमासान के बीच सुरक्षा को लेकर एक बड़ी जंग छिड़ गई है। पूर्व क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह की सुरक्षा को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पंजाब सरकार द्वारा सुरक्षा हटाने के कुछ ही घंटों बाद केंद्र सरकार ने उन्हें केंद्रीय सुरक्षा मुहैया कराने का फैसला लिया है।
अब हरभजन सिंह की सुरक्षा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के कमांडो तैनात रहेंगे। बताया जा रहा है कि दिल्ली और पंजाब दोनों जगह उनकी मूवमेंट के दौरान केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां निगरानी रखेंगी। यह बदलाव ऐसे समय पर हुआ है जब राजनीतिक गलियारों में हरभजन सिंह के AAP से दूरी बनाने और भाजपा के करीब आने की चर्चा तेज है।

▶️पंजाब सरकार का कड़ा प्रहार और सुरक्षा की वापसी
25 अप्रैल और 26 अप्रैल का घटनाक्रम किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं रहा। पंजाब सरकार ने अचानक कार्रवाई करते हुए हरभजन सिंह की 'Z+' कैटेगरी की सुरक्षा हटा दी। उनके जालंधर स्थित आवास पर तैनात 9 से 10 पुलिसकर्मियों को वापस बुला लिया गया और उन्हें दी गई सरकारी पायलट कार (पायलट जिप्सी) भी छीन ली गई।
हरभजन सिंह के निजी सहायक (PA) मनदीप सिंह ने इस बात की पुष्टि की है। यह फैसला तब आया जब आम आदमी पार्टी के भीतर से बगावत की खबरें तेज हुईं और हरभजन सिंह के भी पाला बदलने की अटकलें लगने लगीं।
▶️क्यों बढ़ी सुरक्षा की जरूरत?
केंद्रीय गृह मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, हरभजन सिंह को सुरक्षा देने का फैसला हालिया घटनाओं और संभावित खतरे को देखते हुए लिया गया है। पिछले कुछ दिनों में उनके घर के बाहर विरोध प्रदर्शन हुए और राजनीतिक माहौल लगातार तनावपूर्ण बना हुआ है।
सूत्रों का दावा है कि हरभजन सिंह के अलावा कुछ अन्य सांसदों को भी सुरक्षा कवच दिया गया है। इनमें संदीप पाठक, अशोक मित्तल, स्वाति मालीवाल, राजेंद्र गुप्ता और विक्रमजीत साहनी जैसे नाम चर्चा में हैं। इन नेताओं के बारे में कहा जा रहा है कि वे भाजपा के संपर्क में बताए जा रहे हैं।
इन नेताओं के घरों के बाहर विरोध प्रदर्शन और बढ़ती राजनीतिक बयानबाजी को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने खतरे का आकलन किया। इसके बाद केंद्रीय सुरक्षा देने का फैसला लिया गया।
▶️बागी सांसदों को मिला केंद्रीय सुरक्षा कवच
सिर्फ हरभजन सिंह ही नहीं, बल्कि आम आदमी पार्टी से दूरी बनाकर भाजपा के पाले में जाने वाले अन्य सांसदों को भी केंद्र ने अपनी सुरक्षा में ले लिया है। गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, स्वाति मालीवाल, राजेंद्र गुप्ता और विक्रमजीत साहनी को भी अब केंद्रीय सुरक्षा बलों का घेरा मिलेगा।
इन नेताओं के घरों के बाहर हो रहे विरोध प्रदर्शनों और उन पर मंडराते कथित खतरे को देखते हुए गृह मंत्रालय ने यह फैसला लिया है। अब इन सभी नेताओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी पंजाब पुलिस के बजाय सीआरपीएफ (CRPF) के पास होगी।
▶️'पंजाब का गद्दार': हरभजन के घर पर हुआ हंगामा
हरभजन सिंह के घर के बाहर का नजारा बेहद तनावपूर्ण रहा। शनिवार को प्रदर्शनकारियों ने उनके घर की दीवार पर काले स्प्रे से 'पंजाब का गद्दार' लिख दिया। चौंकाने वाली बात यह थी कि वहां मौजूद पंजाब पुलिस मूकदर्शक बनी रही और उसने किसी को रोकने की जहमत नहीं उठाई। इस वीडियो के वायरल होने के बाद गृह मंत्रालय ने सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी।
दरअसल, राघव चड्ढा ने दावा किया है कि 'आप' के 10 में से 7 सांसद बीजेपी में शामिल हो रहे हैं, जिससे केजरीवाल और भगवंत मान की पार्टी को भारी झटका लगा है।
▶️राघव चड्ढा के दावे से क्यों बढ़ा विवाद? (How Raghav Chadha Crisis)
इस पूरे घटनाक्रम को और बड़ा तब माना गया जब राघव चड्ढा ने दावा किया कि आम आदमी पार्टी के कई राज्यसभा सांसद भाजपा के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के कुल 10 सांसदों में से 7 सांसद अलग रास्ता चुन सकते हैं।
इसके बाद राजनीतिक चर्चाओं में हरभजन सिंह का नाम प्रमुखता से आने लगा। हालांकि उन्होंने अब तक सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है, लेकिन सुरक्षा से जुड़ी घटनाएं अटकलों को और मजबूत कर रही हैं।
संदीप पाठक, अशोक मित्तल, स्वाति मालीवाल और विक्रमजीत साहनी जैसे नामों को भी इस पूरे विवाद में जोड़ा जा रहा है। ऐसे में यह मामला सिर्फ पार्टी बदलने की चर्चा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सुरक्षा और राजनीतिक दबाव की बहस भी बन गया है।
▶️भगवंत मान का 'गद्दार' वाला वार
मुख्यमंत्री भगवंत मान इस बगावत से बेहद खफा नजर आ रहे हैं। उन्होंने चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी छोड़ने वाले सांसदों पर तीखा हमला बोला। मान ने उन्हें सीधे तौर पर 'गद्दार' करार देते हुए कहा कि इन लोगों ने न केवल पार्टी, बल्कि पंजाब की भोली-भाली जनता के भरोसे का भी कत्ल किया है।
भगवंत मान ने आरोप लगाया कि भाजपा पंजाब के हितों को बाधित करने के लिए ऐसी चालें चल रही है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि आम आदमी पार्टी किसी व्यक्ति विशेष से नहीं चलती और कुछ लोगों के जाने से पंजाब की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
▶️क्यों मची है यह सियासी हलचल?
इस पूरे विवाद की जड़ें राज्यसभा की सीटों और पंजाब के आगामी विधानसभा चुनाव से जुड़ी हैं। राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल के बीजेपी में जाने के बाद स्वाति मालीवाल और विक्रमजीत सहनी ने भी इस दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं।
हरभजन सिंह ने हालांकि अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन जिस तरह से पंजाब सरकार ने उनकी सुरक्षा हटाई और केंद्र ने उन्हें तुरंत कवर दिया, उससे संकेत मिल रहे हैं कि 'टर्बनेटर' की नई पारी की पिच तैयार हो चुकी है।
▶️अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. हरभजन सिंह को कौन सी सुरक्षा दी गई है?
हरभजन सिंह को अब केंद्र सरकार द्वारा सीआरपीएफ (CRPF) की सुरक्षा दी गई है, जिसमें विशेष रूप से प्रशिक्षित कमांडो शामिल होंगे।
2. पंजाब सरकार ने सुरक्षा क्यों हटाई?
आधिकारिक तौर पर सुरक्षा समीक्षा का हवाला दिया गया है, लेकिन सियासी गलियारों में इसे हरभजन सिंह की बीजेपी के साथ नजदीकियों और 'आप' से बगावत के बाद की 'सजा' के तौर पर देखा जा रहा है।
3. क्या अन्य बागी सांसदों को भी सुरक्षा मिलेगी?
जी हां, गृह मंत्रालय ने संदीप पाठक, स्वाति मालीवाल और अशोक मित्तल जैसे अन्य सांसदों को भी खतरे के आकलन के आधार पर केंद्रीय सुरक्षा घेरा प्रदान किया है।















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