'मुंबई एयरपोर्ट बेचने के लिए किसी का दबाव नहीं था', राहुल गांधी के दावों पर GVK ग्रुप का जवाब
मुंबई एयरपोर्ट को सरकार की ओर से दबाव डालकर जबरन अडानी को बेचे जाने के राहुल गांधी के आरोपों को GVK Group ने सिरे से खारिज कर दिया है। इसने कहा है कि यह फैसला उसने अपने हित में लिया था।

मुंबई एयरपोर्ट बेचने के लिए 'बाहरी दबाव' के राहुल गांधी के दावों को GVK ग्रुप ने साफ तौर पर झुठला दिया है। यह बयान राहुल गांधी के उन कथित आरोपों के बाद आया है, जिसमें उन्होंने सरकार द्वारा 'एजेंसियों' का इस्तेमाल करके मुंबई एयरपोर्ट 'GVK से दूर करने' का दावा किया था। GVK ग्रुप के वाइस चेयरमैन जीवी संजय रेड्डी ने राहुल गांधी के उन तमाम दावों का सीधे तौर पर खंडन किया है। कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया था कि मुंबई एयरपोर्ट को GVK से हाइजैक कर लिया गया और अडानी (गोतम अडानी) को दे दिया गया। कांग्रेस नेता ने संसद में मोदी सरकार को ऐसे ही आरोपों से घेरने की कोशिश की थी।
GVK ग्रुप के राहुल गांधी के आरोपों को झुठलाया
GVK ग्रुप के वाइस चेयरमैन जीवी संजय रेड्डी ने कहा है, 'जहां तक GVK का संबंध है तो GVK पर कोई दबाव नहीं था, चाहे अडानी ग्रुप की ओर से या फिर किसी भी एजेंसी की ओर से। हमने अपने वाणिज्यिक हितों क देखते हुए एयरपोर्ट बेचा था, कुछ लोन लिए थे, जिन्हें चुकाना था.....'
एजेंसियों के इस्तेमाल के आरोपों का भी किया खंडन
जीवी संजय रेड्डी ने आगे कहा है कि 'ऐसा कुछ भी नहीं था। किसी की तरफ से भी बिल्कुल कोई भी दबाव नहीं था, हमने मुख्य रूप से अपने हितों को देखते हुए फैसला लिया। ' रेड्डी ने अडानी ग्रुप को मुंबई एयरपोर्ट बेचने के लिए सीबीआई, ईडी जैसी एजेंसियों के इस्तेमाल के आरोपों को नकारते हुए यह स्पष्टीकरण दिया है।
ग्रुप पर बाहरी दबाव का सवाल ही नहीं- GVK
उधर ग्रुप के प्रवक्ता ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा है कि 'GVK ने यह बात दोहरायी है कि मुंबई एयरपोर्ट में अपनी हिस्सेदारी अडानी को बेचने का फैसला इसके मैनेजमेंट की ओर से लिया गया था और ग्रुप के ऊपर किसी बाहरी दबाव होने का कोई सवाल ही नहीं था।' GVK ग्रुप ने मुंबई एयरपोर्ट और नवी मुंबई एयरपोर्ट में अपनी हिस्सेदारी अडानी इंटरप्राइजेज को देने का करार 31 अगस्त, 2020 को किया था।
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राहुल ने अडानी को देने का लगाया था आरोप
इससे पहले कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने लोकसभा में आरोप लगाया था कि 'ऐसा नियम था कि कोई भी जिसे एयरपोर्ट से संबंधित पहले से अनुभव नहीं है, वह एयरपोर्ट का विकास नहीं कर सकता। सरकार ने इस नियम को बदल दिया....और अडानी को 6 एयरपोर्ट दे दिए गए। इसके बाद भारत का सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक एयरपोर्ट, कमाई वाला एयरपोर्ट...मुंबई एयरपोर्ट GVK से वापस ले लिया गया.....एजेंसियों का इस्तेमाल करके हाइजैक कर लिया गया....सीबीआई और ईडी का इस्तेमाल करके जीवीके पर दबाव डालकर....सरकार ने उस एयरपोर्ट को अडानी को दे दिया....'












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