Guwahati Metro Update: कम खर्च में आधुनिक तकनीक और ज्यादा सुविधा, गुवाहाटी का नियो मेट्रो है वाकई में बेजोड़
Guwahati Metro Update: असम की राजधानी गुवाहाटी में प्रस्तावित नियो मेट्रो (Metro Neo) परियोजना की चर्चा पूरे देश में हो रही है। इससे शहर की ट्रैफिक समस्या का समाधान होगा और यह काफी किफायती और आधुनिक टेक्नोलॉजी से लैस है। पारंपरिक हेवी मेट्रो की तुलना में यह सस्ती है। गुवाहाटी जैसे टियर-2 शहरों की भौगोलिक परिस्थितियों के लिहाज से भी नियो मेट्रो बेहतर विकल्प है।
गुवाहाटी शहर का बड़ा हिस्सा पहाड़ियों से घिरा है। शहर के अंदर संकरी गलियां हैं और बरसात में बड़े पैमाने पर पानी जमाव की भी समस्या होती है। पहाड़ी इलाकों और सीमित सड़कों वाले शहरों में नियो मेट्रो की हल्की संरचना और शार्प मोड़ लेने की क्षमता ज्यादा भरोसेमंद होती है।

Guwahati Metro Update: हेवी मेट्रो की तुलना में 60 से 70 फीसदी कम
- लागत के लिहाज से देखें तो नियो मेट्रो पारंपरिक मेट्रो से 60 से 70 प्रतिशत तक सस्ती है। एक हेवी मेट्रो लाइन बनाने में करीब ₹222 करोड़ प्रति किलोमीटर खर्च आता है। इसकी तुलना में नियो मेट्रो को लगभग ₹71 करोड़ प्रति किलोमीटर में तैयार किया जा सकता है।
- यह बजट मेट्रो के दूसरे विकल्प मेट्रोलाइट से भी 40-50 प्रतिशत सस्ती है। इसका निर्माण खर्च करीब ₹140 करोड़ प्रति किलोमीटर होता है।
- कम लागत का फायदा यह है कि सीमित बजट में ज्यादा लंबा नेटवर्क विकसित किया जा सकता है।
Guwahati Neo Metro: लोहे के टायर के बजाय रबर टायर होंगे इस्तेमाल
नियो मेट्रो की एक बड़ी खासियत इसके रबर टायर वाले कोच होते हैं। ये पारंपरिक लोहे के पहियों की बजाय कंक्रीट ट्रैक यानी रोड स्लैब पर चलते हैं। रबर के टायर होने की वजह से शोर और कंपन कम होता है और यात्रियों को आरामदेह सफर का अनुभव मिलेगा। यह प्रणाली पूरी तरह से बिजली से संचालित होती है और ओवरहेड ट्रैक्शन से ऊर्जा लेती है। इसके अलावा, इनमें बैटरी बैकअप भी होता है, जिससे ये बिना बिजली के तार के भी करीब 20 किलोमीटर तक चल सकती हैं।
Guwahati Neo Metro Update: प्रति घंटे 10,000 यात्रियों को ले जाने में सक्षम
गुवाहाटी के नियो मेट्रो की ट्रैफिक क्षमता भी बेहतरीन होगी। नियो मेट्रो एक दिशा में प्रति घंटे लगभग 8,000 से 10,000 यात्रियों को ले जाने में सक्षम है। यह क्षमता गुवाहाटी जैसे शहरों के लिए पर्याप्त मानी जा रही है। यहां भीड़ पारंपरिक मेट्रो वाले मेगासिटीज जितनी नहीं होती है। सुरक्षा के लिहाज से भी यह तकनीक आधुनिक है। इसमें ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) और एंटी-कोलिजन सिस्टम जैसे फीचर्स होंगे।
नियो मेट्रो के लिए तैयार होने वाले स्टेशनों का डिजाइन भी सरल और किफायती होता है। पारंपरिक मेट्रो की तरह भारी-भरकम ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन गेट्स या स्क्रीन डोर्स की जरूरत नहीं होती है। इससे बड़े पैमाने पर बिजली और मेंटेनेंस का खर्च बचता है। टिकटिंग के लिए नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड या QR कोड आधारित सिस्टम की सुविधा मिल सकती है। नियो मेट्रो गुवाहाटी के लिए कम खर्च में आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल ट्रांसपोर्ट सिस्टम का विकल्प है। आने वाले वर्षों में शहर की यातायात व्यवस्था को नई दिशा दे सकती है।
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