GST: अटल से जेटली तक सबको हर बार क्यों जाना पड़ा बंगाल!
नई दिल्ली। देश में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू हो चुका है। 30 जून और 1 जुलाई मध्य रात्रि में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के ऐतिहासिक सेंट्रल हॉल में बटन दबाकर GST लागू होने का ऐलान किया।
लेकिन क्या आपको पता है कि GST के पीछे कितने लोगों की मेहनत और कड़ी लगन लगी है? आइए, 'एक राष्ट्र एक कर' वाले इस ढांचे के विचार को अपने दिल-ओ-दिमाग से संसद तक पहुंचाने वाले लोगों के बारे में आपको बताते हैं।

अपने मंत्री को छोड़ दें
साल 2000 में, भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार में प्रधानमंत्री रहे अटल बिहारी वाजपेयी ने पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु से कहा कि वे अपने वित्त मंत्री असिम दासगुप्ता को छोड़ दें। वाजपेयी जो तब प्रधान मंत्री थे, पूरे देश में एक समान कर के विचार से सहमत थे।

तात्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी
यह घटना वाजपेयी और उनके सलाहकारों की बैठक के दौरान हुई थी, जिसमें आरबीआई के तीन पूर्व गवर्नर आईजी पटेल, बिमल जालान और सी रंगराजन शामिल थे। इसी बैठक में जीएसटी का प्रस्ताव था। पूरे देश में एक समान कर के विचार की पर लंबी चर्चा कर इसे मंजूरी दी गई थी।

असिम दास गुप्ता
जीएसटी मॉडल को डिजाइन करने के लिए दासगुप्ता की अध्यक्षता में 2000 में एक समिति की स्थापना हुई थी। मैसाचुसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान (मैसाचुसेट्स इन्स्टिट्यूट ऑफ टैक्नोलॉजी - एमआईटी) से डॉक्टरेट, दासगुप्ता को भारत का बेहतरीन अर्थशास्त्री माना जाता है। जब डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने, उन्होंने दासगुप्ता को जीएसटी समिति के प्रमुख के रूप में बदलने से इनकार कर दिया। दासगुप्ता ने 7 वर्षों के लिए जीएसटी मॉडल पर काम किया। जीएसटी बिलों की संरचना के लिए उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा गठित एक अन्य समिति का भी अध्यक्ष रखा था।

फिर आए के.एम.मणी
दासगुप्ता के बाद केरल तत्कालीन वित्त मंत्री के. एम मणी के समिति के अध्यक्ष बने और काम आगे जारी रखा। मणि ने जीएसटी बिलों को अंतिम रूप देने पर काम किया। इस दौरान उन्होंने राज्यों के इस डर को भी दूर करने की कोशिश की कि जीएसटी अपनी वित्तीय स्वायत्तता समाप्त कर देगी और कर संग्रहण में बाधा डालती है। मणि ने व्यापारियों के साथ बातचीत के लिए भी उन्हें समझा दिया कि जीएसटी देश में व्यापार को आसान बना देगा। हालांकि साल 2015 में भ्रष्टाचार के घोटाले के कारण मणि को पद छोड़ना।

फिर जाना पड़ा बंगाल
के एम मणी की ओर से जीएसटी समिति के प्रमुख के रूप में इस्तीफा दे दिए जाने के बाद, केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली फिर से ब पश्चिम बंगाल गए। बंगाल के वित्त मंत्री मित्रा को जीएसटी समिति का अध्यक्ष बनाया गया था। चूंकि केंद्र सरकार ने जीएसटी के जुलाई के कार्यान्वयन के लिए जोर देना शुरू कर दिया था, मित्रा ने काम किया और सबसे बड़ा कर सुधार लागू करते हुए अधिक कैलिब्रेटेड दृष्टिकोण की वकालत की। मित्रा ने कहा कि जीएसटी अपने मौजूदा रूप में उन्हें स्वीकार्य नहीं है। (तस्वीर में जेटली के साथ मित्रा)

अरुण जेटली
अरुण जेटली ने जीएसटी के कार्यान्वयन के लिए काम आगे बढ़ाया। साल 2015 में उन्होंने अप्रैल 2016 को जीएसटी को रोलआउट करने की समय सीमा तय की। हालांकि इसे बाद में 1 जुलाई 2017 में बदल दिया गया था। जेटली ने यह सुनिश्चित किया कि सभी चार जीएसटी विधेयक संसद द्वारा अगस्त 2016 तक पारित किए जाएंगे।












Click it and Unblock the Notifications