ग्राउंड रिपोर्ट: क्या अमेठी-रायबरेली में सच में कोई विकास नहीं हुआ?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह जब- जब उत्तर प्रदेश के दौरे पर होते हैं तो ये अफ़सोस ज़रूर ज़ाहिर करते हैं कि सत्तर साल से यहां कोई विकास नहीं हुआ. लेकिन जब वे अमेठी और रायबरेली की बात करते हैं, तो इस अफ़सोस को और ऊंचे स्वर में बयां करते हैं और लोगों से इसी वजह से 'परिवर्तन' की अपील करते हैं.

उत्तर प्रदेश में अमेठी और रायबरेली कांग्रेसी राजनीति के गढ़ माने जाते हैं. भारतीय जनता पार्टी ने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में अस्सी में से तिहत्तर सीटों पर जीत दर्ज की थी लेकिन इन दो सीटों पर उसे बड़े अंतर से हार का सामना करना पड़ा था.

अगले चुनाव को देखते हुए बीजेपी इन दोनों सीटों पर कांग्रेस के सामने कड़ी चुनौती खड़ी करने की कोशिश कर रही और इसके लिए वो विकास को मुद्दा बनाती है.

वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस का दावा है कि अमेठी और रायबरेली में काफी विकास हुआ लेकिन जब से बीजेपी सरकार बनी है, विकास की योजनाएं ठप पड़ गई हैं.

विकास पर क्या कहते हैं रायबरेली वाले?

अमेठी और रायबरेली दोनों ही राजधानी लखनऊ से क़रीब सौ किमी. की दूरी पर हैं. दोनों ज़िले इसलिए ज़्यादा चर्चा में रहते हैं कि यहां से लोकसभा में प्रतिनिधित्व अधिकतर उस परिवार का और उन सदस्यों का रहा है, जो या तो प्रधानमंत्री बने या फिर कांग्रेस पार्टी में काफी शक्तिशाली भूमिका में थे.

पिछले कुछ समय से ये दोनों सीटें भारतीय जनता पार्टी के निशाने पर हैं और यहां होने वाली जनसभाओं में पार्टी के नेता यह बात हर बार दोहराते हैं कि सत्तर साल में यहां कोई विकास नहीं हुआ, लेकिन स्थानीय लोगों की मानें तो ऐसा नहीं है.

अमेठी के रहने वाले राजेंद्र शुक्ल का परिवार कभी कांग्रेस पार्टी का 'घनघोर' समर्थक था लेकिन अब उनकी आस्था कांग्रेस के प्रति वैसी नहीं रही, जैसी पहले थी.

लेकिन विकास की बात से वो इनकार नहीं करते, "जब तक राजीव जी ने यहां का प्रतिनिधित्व किया, ख़ूब विकास हुआ. सड़कों का जाल बिछा, नहरें आईं, फ़ैक्ट्रियां लगीं, लोगों को रोज़गार मिला और सबसे बढ़कर ये कि यहां के लोगों को इस बात का फ़क्र था कि वो प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र के हैं. लेकिन राहुल गांधी जब से यहां से सांसद हैं, विकास की धारा जैसे रुक सी गई है."

राहुल गांधी से नाराज़ अमेठी

हालांकि राजेंद्र शुक्ल इसके लिए कांग्रेस के केंद्र और राज्य की सरकार में न होने की बात भी स्वीकार करते हैं लेकिन इस बात से कुछ आहत नज़र आते हैं कि राजीव गांधी और सोनिया गांधी की तरह राहुल गांधी अमेठी की आम जनता से नहीं मिलते हैं.

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लेकिन रायबरेली की स्थिति इससे कुछ अलग है. फ़िलहाल संसद में यहां का प्रतिनिधित्व सोनिया गांधी कर रही हैं और इससे पहले ये क्षेत्र इंदिरा गांधी और फ़िरोज़ गांधी की संसदीय सीट के रूप में जाना जाता था.

स्थानीय लोग विकास कार्यों की एक लंबी लिस्ट यहां भी गिनाते हैं लेकिन यहां के लोगों को सोनिया गांधी से वैसी शिकायत नहीं है जैसी कि रायबरेली में.

स्थानीय लोगों के मुताबिक अमेठी में जहां हिन्दुस्तान एरोनॉटिकल यानी एचएएल की इकाई, इंडोगल्फ़ फ़र्टिलाइज़र्स, बीएचईएल प्लांट, इंडियन ऑयल की यूनिट और तमाम शैक्षणिक और तकनीकी संस्थान हैं वहीं रायबरेली में भी एनटीपीसी, सीमेंट फ़ैक्ट्री, रेल कोच फ़ैक्ट्री, आईटीआई जैसी तमाम इकाइयां और उद्योग हैं जिनसे यहां के लोगों को रोज़गार मिला है.

इसके अलावा अमेठी-रायबरेली जैसे वीआईपी क्षेत्र होने के नाते फ़ुरसतगंज में हवाई पट्टी तो है ही, विमान प्रशिक्षण स्कूल भी है.

रायबरेली में राजीव गांधी पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट जैसे उच्च स्तरीय संस्थान की मौजूदगी इस इलाक़े के राजनीतिक प्रभुत्व को बताती हैं.

रायबरेली और अमेठी झेल रही हैं भेदभाव

जहां तक बात औद्योगिक इकाइयों की है तो स्थानीय लोगों के मुताबिक अकेले जगदीशपुर में कम से कम तीन सौ प्लांट होंगे. जगदीशपुर यहां का औद्योगिक क्षेत्र है. ज़ाहिर है ये सब पिछली कांग्रेस सरकारों के समय में हुआ है.

लेकिन स्थानीय लोगों की ये शिकायत भी है कि अब उनके इलाक़े को भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है. जानकारों के मुताबिक अकेले रायबरेली में छोटी-बड़ी मिलाकर क़रीब चालीस फ़ैक्ट्रियां बंद हो गईं और हज़ारों की संख्या में लोग बेरोज़गार हो गए. कताई मिल बंद पड़ी है, चीनी मिल बंद है, पेपर मिल बंद है.

रायबरेली में कांग्रेस के ज़िलाध्यक्ष वीके शुक्ल आरोप लगाते हैं कि एनडीए सरकार ने यूपीए सरकार के दौरान शुरू की गई परियोजनाओं को या तो इन दोनों जगहों से हटा दिया या फिर उनसे मुंह फेर लिया, जबकि उनसे इस इलाक़े के लोगों का ही भला होता.

स्थानीय लोगों भी इस बात से इनकार नहीं करते कि यूपीए सरकार की कई योजनाओं को मौजूदा सरकार ने आगे नहीं बढ़ाया.

राजनीति का शिकार हुआ विकास

इस संदर्भ में महिला विश्वविद्यालय की स्थापना और रायबरेली में पिछली यूपीए सरकार में स्थापित एम्स का उदाहरण ख़ासतौर पर दिया जाता है, जहां अस्पताल का निर्माण हो जाने के बावजूद उसे शुरू नहीं किया गया है.

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वीके शुक्ल के मुताबिक, "इस बात का ज़िक्र कई बार राहुल गांधी संसद में भी कर चुके हैं लेकिन रायबरेली और अमेठी का विकास राजनीति की भेंट चढ़ गया है. मेगा फ़ूड पार्क, हिंदुस्तान पेपर मिल, आईआईआईटी, होटल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट, तिलोई में 200 बेड का हॉस्पिटल, गौरीगंज में बनने वाला सैनिक स्कूल प्रमुख हैं, आख़िर इन सबसे यहां के लोगों का ही तो फ़ायदा होता. बीजेपी की सरकारों ने ख़ुद तो कुछ किया नहीं है, झूठ अलग बोलते हैं कि सत्तर साल में कुछ नहीं हुआ."

रायबरेली के पत्रकार माधव सिंह कहते हैं कि 2014 के बाद केंद्र सरकार ने यूपीए सरकार की कई योजनाओं को या तो रद्द कर दिया या फिर इन्हें हटाकर कहीं और स्थानांतरित कर दिया.

वो बताते हैं, "आईआईआईटी यानी इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंफ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में तो 11 साल से पढ़ाई हो रही थी, बावजूद इसके इसे यहां से हटाकर इलाहाबाद के कैंपस में स्थानांतरित कर दिया गया और क़रीब 200 छात्रों को भी ज़बरन वहां भेज दिया गया. एआईआईएमएस की बिल्डिंग बन जाने के बाद भी लोगों को इलाज नहीं मिल पा रहा है."

'राहुल गांधी ने नहीं किया कोई काम'

इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने सड़क से लेकर संसद तक शोर मचाया था. लेकिन बीजेपी नेता दयाशंकर पांडेय योजनाओं को यहां से हटाने की बात को 'कोरा झूठ' करार देते हैं.

पांडेय कहते हैं, "राहुल गांधी ने एक काम यहां नहीं किया है और इन योजनाओं के नाम पर सिर्फ़ ज़मीन हड़पने का काम किया है. जहां तक आईआईआईटी का सवाल है तो ये संस्थान अमेठी वालों के किसी काम का नहीं था. यहां बाहर से आकर लोग पढ़ते थे. उसे हटाकर अब आंबेडकर विश्वविद्यालय का सेटेलाइट कैंपस चलाया जा रहा है."

लेकिन दयाशंकर पांडेय दबे मन से ये ज़रूर स्वीकार करते हैं कि राजीव गांधी के समय कुछ काम हुआ था. वो कहते हैं, "अमेठी में जो कुछ भी काम हुआ है वो माननीय सांसद वरुण गांधी के पिता और माननीय मंत्री मेनका गांधी के स्वर्गीय पति संजय गांधी ने शुरू कराए थे. हां, उन्हें पूरा कराने का काम ज़रूर राजीव गांधी ने किया."

अमेठी और रायबरेली के स्थानीय लोग बताते हैं कि भारतीय जनता पार्टी को इस बात का मलाल है कि वो मोदी लहर में भी ये दोनों सीटें क्यों नहीं जीत पाई? इन लोगों के मुताबिक, इसीलिए वो उन तमाम कामों को लोगों की निग़ाह से ग़ायब करना चाहती है जो कि राजीव गांधी, सोनिया गांधी या फिर राहुल गांधी के प्रयासों से किए गए हैं.

कांग्रेस का विकास 30 साल पुराना

लखनऊ में वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्र कहते हैं, "बीस साल पहले अमेठी और रायबरेली को जो लोग जानते हैं, उन्हें वहां के विकास के बारे में पता है. तीस साल होने को हैं, राज्य में कांग्रेस सरकार नहीं है. केंद्र में वो दस साल रही भी लेकिन विकास के तमाम कार्यों के लिए राज्य सरकारों का सहयोग ज़रूरी होता है. फिर भी ये कहना कि विकास नहीं हुआ, सिवाए राजनीतिक विद्वेष के और कुछ नहीं है."

योगेश मिश्र ये भी कहते हैं कि बीजेपी जिस तरह से अमेठी और अब रायबरेली में कांग्रेस को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है, वह स्वस्थ राजनीति भी नहीं कही जाएगी और उसे इसका नुक़सान भी उठाना पड़ सकता है.

दरअसल, पिछले दिनों कांग्रेस पार्टी के एमएलसी दिनेश सिंह और उनके भाइयों को पार्टी में शामिल कराने के लिए ख़ुद अमित शाह और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी अपने तमाम मंत्रियों-विधायकों के साथ रायबरेली आए थे. उसी कार्यक्रम में एक बुज़ुर्ग व्यक्ति ने बीजेपी के एक नेता की बात को काटते हुए ये तक कह दिया था, "ऐसा नहीं है, कांग्रेस नेताओं ने यहां के लिए बहुत कुछ किया है, अब ये अलग बात है कि वो पॉवर में नहीं हैं."

संजय-राजीव जितने प्रभावशाली नहीं राहुल

रायबरेली के पत्रकार माधव सिंह कहते हैं कि विकास की तो बात यहां विपक्षी भी स्वीकार करते हैं, सामने भले ही कुछ कहें. माधव सिंह के मुताबिक, "ये ज़रूर है कि जो विकास कांग्रेस के शासन के समय में हुआ, वो अब नहीं हो रहा है और उसके लिए राहुल गांधी और सोनिया गांधी को दोषी भी नहीं ठहराया जा सकता."

हालांकि अमेठी के पत्रकार योगेश श्रीवास्तव की राय इससे अलग है. उनका कहना है, "यूपीए सरकार के समय भी राहुल गांधी अमेठी में उस तरह का काम नहीं कर पाए जैसा कि उनके पिता राजीव गांधी और चाचा संजय गांधी ने किया था. जबकि यूपीए सरकार में वो राजनीतिक रूप से बेहद शक्तिशाली थे."

योगेश श्रीवास्तव भी इस बात से इनकार नहीं करते कि एनडीए सरकार में इन दोनों ही लोकसभा क्षेत्रों में विकास कार्य राजनीति का शिकार हुए हैं. उनके मुताबिक, यूपीए सरकार की कई परियोजनाओं का उद्घाटन करने का श्रेय भी बीजेपी नेताओं, ख़ासकर अमेठी से लोकसभा चुनाव लड़ीं केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने लिया. योगेश श्रीवास्तव अमेठी के एक अस्पताल का उदाहरण देते हैं कि वो दो तीन साल पहले ही शुरू हो चुका था लेकिन उसका उद्घाटन फिर से कुछ दिन पहले हुआ जब अमित शाह और बीजेपी नेताओं की भारी-भरकम टीम यहां आई थी.

अमेठी और रायबरेली में सड़कों का जाल पहले से ही बिछा हुआ है, ये अलग बात है कि अब बहुत सी ऐसी सड़कें मिलेंगी जिनमें बड़े-बड़े गड्ढे हैं और उन पर चलना आसान नहीं है. लेकिन जानकारों के मुताबिक इसके लिए यहां के सांसदों की बजाय राज्य सरकारें दोषी हैं और राज्य में पिछले क़रीब तीन दशक से कांग्रेस पार्टी सत्ता से बाहर है.

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