ना बैंड-बाजा ना बारात, दूल्हा-दुल्हन ने मास्क पहन रचाई शादी, लॉकडाउन में गरीबों के लिए दान की ये बड़ी रकम
नई दिल्ली। देशव्यापी लॉकडाउन के बीच देशभर से मानवता और इंसानियत की मिसाल पेश करने वाली खबरें सामने आ रही हैं। भारत में लॉकडाउन का दूसरा चरण चल रह है जिसके चलते सामाजिक कार्यक्रमों के आयोजन और भीड़ इकट्ठा करने पर पाबंदी है। ऐसे में शादी का सीजन होने की वजह से कई लोगों की शादियां भी हो रही हैं लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए लोग साधारण तरीके से कार्यक्रम का आयोजन कर रहे हैं। इसी बीच पश्चिम बंगाल के एक कपल में अपने शादी में कोरोना वायरस से बचाव का संदेश दिया।

बिना तामझाम सिंपल तरीके हुई शादी
गौरतलब है कि अप्रैल में शादियों का सीजन होता है लेकिन लॉकडाउन होने की वजह से कोई अपनी शादी टाल दे रहा है तो कोई साधारण तरीके से घर में ही शादी कर रहा है। पश्चिम बंगाल में भी एक ऐसी ही शादी हुई जिसमें किसी बाहरी मेहमान को न बुलाकर सिर्फ लड़का-लड़की के पक्षवालों ने शादी में भाग लिया। इस दौरान दूल्हा-दुल्हन ने अपने मुंह पर मास्क पहनकर कोरोना वायरस से बचाव का संदेश दिया।

लॉकडाउन के नियमों का पालन किया
पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में लॉकडाउन के दौरान हुई इस शादी ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। बिना किसी तामझाम के सिंपल तरीके से हुई इस शादी में कपल में जिस तरह लॉकडाउन के नियमों का पालन किया वह काबिलेतारीफ है। दुल्हा जिनका नाम सौरव करमाकर है उन्होने बताया कि वह फास्ट फूड का आउटलेट चलाते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी शादी में सिर्फ 15 लोग शामिल हुए थे।

शंख फूंकते वक्त औरतों ने मास्क उतारा
सौरव ने कहा कि दुल्हन की मां दूसरे जिले में रहती हैं इस वजह से वह शादी में नहीं आ सकीं, दुल्हन को उनकी चाची ने विदा किया। शादी में आए सभी गेस्ट ने मास्क पहना हुआ था हालांकि, शंख फूंकते वक्त औरतों ने मास्क उतार दिया था। इतना ही नहीं शादी करना वाले पंडित ने भी मास्क पहना हुआ था।

31,000 रूपए दान में दिए
इस शादी की सबसे खास बात यह रही कि सौरव और उनकी पत्नी ने शादी में खर्च होने वाले पैसों को बचाकर उसे गरीबों के लिए दान में दे दिया। सैरव करमाकर ने बताया कि उन्होंने एक क्लब को 31,000 रूपए दान में दिए ताकि रोजाना 500 लोगों को खाना खिलाया जाए। बता दें कि लॉकडाउन के चलते दिहाड़ी मजदूरों और गरीबो के सामने भोजन और आजीविका की समस्या आ गई है।

दुल्हन ने भी पति को किया सपोर्ट
सैरव करमाकर बताते हैं कि अगर वह सामान्य परिस्थिति में शादी करते तो पैसे खर्च करने ही पड़ते। सैरव कहते हैं कि शादी में खर्च होने वाले पैसों के गरीबों को खाना खिलाने के लिए खर्च किया जाए, जब उन्होंने इस बारे में परिवार से बात की तो वह भी राजी हो गए। दुल्हन ने भी पति को सपोर्ट करते हुए कहा कि 'मुझे बहुत खुशी है कि हमने अपनी शादी में कुछ गरीब लोगों को खिलाने में सहयोग दे पा रहे हैं।
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