पीएम केयर्स फंड में कुल राशि का 64 प्रतिशत हिस्सा नहीं हुआ इस्तेमाल, सिर्फ 3976 करोड़ रुपए ही हुए खर्च
नई दिल्ली, फरवरी 07। कोरोना महामारी से लड़ने के उद्देश्य के लिए स्थापित किए गए पीएम केयर्स फंड को लेकर एक अहम जानकारी सामने आई है। दरअसल 27 मार्च 2020 से लेकर 31 मार्च 2021 के बीच कोविड मदद के तौर पर पीएम केयर्स फंड में 10,990 करोड़ रुपए की वित्तीय मदद आई है। अहम जानकारी ये है कि इस कुल राशि का लगभग 64 प्रतिशत हिस्सा इस्तेमाल ही नहीं किया गया है।

मार्च 2021 तक पीएम केयर्स फंड में आए 7014 करोड़ रुपए
NDTV की खबर के मुताबिक, मार्च 2021 तक पीएम केयर्स फंड में 7014 करोड़ रुपए तक की राशि इकट्ठा हुई थी। पीएम केयर्स फंड की स्थापना 1 साल पहले ही की गई थी। किसी भी तरह की आपात स्थिति से निपटने के लिए स्थापित किए गए पीएम केयर्स फंड में पहले साल सिर्फ 3976 करोड़ रुपए खर्च हुए। यह राशि वित्तीय वर्ष 2021 में आए 7679 करोड़ रुपये से अलग थी। वित्तीय वर्ष 2020 की शुरुआत में 3077 करोड़ रुपए डोनेशन में आए थे और इस राशि पर ब्याज के रूप में 235 करोड़ रुपए की इनकम हुई थी।
कहां-कहां हुआ खर्चा
- हालांकि सरकार ने पिछले साल मार्च तक सिर्फ 3976 करोड़ रुपए ही इस फंड से इस्तेमाल किए। इसमें 1,392 करोड़ रुपये का इस्तेमाल 6.6 करोड़ कोविड वैक्सीन की डोज खरीदने में किया गया।
- इसके अलावा सरकार ने 50 हजार वेंटिलेटर खरीदने के लिए 1311 करोड़ रुपए खर्च किए, जिसमें से कई मौकों पर वो वेंटिलेटर खराब पाए गए या फिर ट्रेंड मेडिकल स्टाफ की कमी की वजह से वो इस्तेमाल ही नहीं हुए। जम्मू कश्मीर, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से ऐसे कई मामले सामने आए थे।
- इसके अलावा देश की प्रवासी आबादी के कल्याण के लिए सरकार ने केवल 1000 करोड़ रुपए ही खर्च किए। आपको बता दें कि 2020 के पहले लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों के पलायन की तस्वीरों ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं।
- कोरोना की दूसरी लहर में सरकार ने 162 ऑक्सीजन प्रोडक्शन प्लांट स्थापित किए थे, जिस पर 201.58 करोड़ रुपए का खर्चा आया था। कोविड के टीकों के परीक्षण और रिलीज के लिए सरकार द्वारा संचालित प्रयोगशालाओं के उन्नयन पर 20.41 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
विपक्ष के निशाने पर रहा है पीएम केयर्स फंड
आपको बता दें कि कोरोना महामारी के वक्त पीएम केयर्स फंड की घोषणा के बाद से ही विपक्ष के निशाने पर रहा है। विपक्षी दलों ने कई बार इसके संचालन में पारदर्शिता की मांग की है।












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