सोशल मीडिया के लिए सरकार के पास नियामक नियुक्त करने का कोई प्रस्ताव नहीं: रविशंकर प्रसाद
नई दिल्ली। ओटीटी और सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर आपत्तिजनक, विवादित और फेक कंटेंट पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। इस दिशा में सरकार ने बुधवार को संसद में बताया कि आईटी मंत्रालय के पास सोशल मीडिया पर नियामक नियुक्त करने के लिए कोई प्रस्ताव नहीं है। हालांकि सरकार ने यह भी कहा कि आईटी अधिनियम के तहत सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स 2021 जारी किए गए हैं।

संसद में बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफार्म के खिलाफ उठाए गए कदमों के बारे में केंद्रीय आईटी और संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जारी किए गए नए नियमों में सोशल मीडिया संबंधी दिशानिर्देशों का पालन करने की बात कही गई है। रविशंकर प्रसाद के मुताबिक सोशल मीडिया प्लेटफार्म जैसे फेसबुक, व्हाट्सऐप और ट्विटर सहित कंपनियों को मजबूत शिकायत निवारण प्रणाली बनाने के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल मौजूदा समय सरकार के पास सोशल मीडिया के लिए नियामक नियुक्त करने के लिए कोई प्रस्ताव नहीं है।
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गौरतलब है कि पिछले महीने फरवरी नें केंद्र सरकार ने ओटीटी और सोशल मीडिया प्लेटफार्म के खिलाफ कड़े फैसले लेते हुए एक गाइडलाइन जारी की थी। दिशानिर्देशों में कहा गया था कि मीडिया कंपनियों को 36 घंटे के भीरत आपत्तिजनक सामग्री को हटाना होगा, साथ ही शिकायत निवारण तंत्र भी बनाना होगा। सरकार की ये गाइडलाइन ट्विटर और व्हाट्सऐप जैसी कंपनियों के लिए थी। सरकार के निर्देशों के बाद सोशल मीडिया कंपनियों ने जानकारी दी थी कि उन्होंने पिछले वर्ष 2020 में 9849 यूआरएल, अकाउंट और वेबपेज बंद किए हैं। इनमें से ज्यादातर सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर एक्टिव थे। बुधवार को सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री संजय धोत्रे ने भी संसद में बताया कि सरकार ने व्हाट्सएप को अपनी प्रस्तावित गोपनीयता नीति बदलाव की समीक्षा करने को कहा है।












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