कैसे गलवान में भारतीय सेना से पिट चुके PLA कमांडर को ओलंपिक मशाल थमाना चीन की कूटनीतिक हार है ? जानिए
नई दिल्ली, 4 फरवरी: चीन ने बीजिंग विंटर ओलंपिक खेलों में जो राजनीतिक ओछापन दिखाया है, शायद अब उसे उसपर पछतावा हो रहा होगा। गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों के हाथों पिट चुके अपने सैन्य कमांडर को मशाल थमाकर उसने चाइनीज जनता की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश की थी और साथ ही दुनिया के सामने भी बुलंद चेहरा रखने का प्रयास किया था। लेकिन, भारत ने जिस तरह की कूटनीतिक प्रतिक्रिया दी, वह शायद शी जिनपिंग को अंदाजा भी नहीं रहा होगा। भारत ने दो टूक बता दिया कि ड्रैगन जान ले कि वह जिस वुल्फ वॉरियर डिप्लोमेसी के तहत विस्तारवादी नीति पर चल रहा है, भारत के सामने उसकी दाल अब नहीं गलने वाली है।

पिटे हुए कमांडर को मशाल थमा दिया चीन
जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी हिंसक झड़प के लिए जिम्मेदार पीएलए के कमांडर की फाबाओ को बीजिंग विंटर ओलंपिक 2022 का मशाल थमाकर चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी ने भारत के खिलाफ अपनी हेकड़ी जाहिर करने की कोशिश की है। लेकिन, उसकी इस राजनयिक असंवेदनशीलता में भारत के लिए पूरी तरह से सचेत रहने का संदेश भी छिपा हुआ है। तथ्य यह है कि उस रात गलवान घाटी में भारतीय सेना के साथ हुई हिंसक झड़प में चीन की सेना पीएलए के कम से कम 38 से 45 जवान तक मारे गए थे। कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट बार-बार इसकी पुष्टि कर चुके हैं। वैसे भारतीय सेना के मूल्यांकन के मुताबिक उस झड़प में 80 चीनी सैनिक तक मारे गए थे। चीन ने उस घटना में जान बचाकर भागने वाले अपनी सेना के कमांडर फाबाओ को मशाल थमाकर एक तरह से पीएलए को हौसला देने की कोशिश की है। लेकिन, इसमें उसकी वह खीझ भी छिपी हुई है, कि भारतीय सेना के हाथों वह बुरी तरह पिट चुका है। (मशाल वाली तस्वीर- सौजन्य- ग्लोबल टाइम्स)

भारत के लिए क्या है चीन संदेश ?
लेकिन, भारत और बाकी दुनिया के लिए ओलंपिक के जरिए समझने के लिए जो संदेश है, वो ये कि चीन की सेना पीएलए के पीछे वहां की सीसीपी की सरकार है, जिसके टॉप कमांडर राष्ट्रपति शी जिनपिंग हैं, जो चीन के सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के चेयरमैन भी हैं। भारत के लिए तो दो टूक बात ये है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर लंबे गतिरोध के लिए तैयार रहना होगा और इस भ्रम में अब कभी नहीं रहना है कि पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी और चाइनीज लीडरशिप में कोई अंतर है। क्योंकि, चीन की हरकत उसी तरह की है कि चोर चोरी से जाए, लेकिन हेराफेरी से न जाए। भारत अपने इस पड़ोसी से निश्चिंत नहीं रह सकता!

सीमा विवाद सुलझाने को लेकर गंभीर नहीं लग रहा है चीन
भारत सरकार ने बीजिंग ओलंपिक की ओपनिंग और क्लोजिंग सेरेमनी को जिस तरह से राजनयिक बॉयकॉट किया है, वह ड्रैगन की वुल्फ वॉरियर डिप्लोमेसी (चीन की आक्रामक कूटनीति) को सटीक तमाचा है। नरेंद्र मोदी की सरकार ने अपने इस ऐक्शन से बीजिंग को स्पष्ट बता दिया है कि वह किसी गलतफहमी में ना रहे और भारत को ऐसी स्थिति से कैसे निपटना है, उसे अच्छी तरह से पता है। मौजूदा सरकार ने सीमा विवाद को आपसी बातचीत के जरिए सुलझाने के ड्रैगन को भरपूर मौके दिए हैं और इसके लिए शीर्ष स्तर तक से सकारात्मक कोशिशें भी हुई हैं। लेकिन, शी जिनपिंग के रवैए से अब साफ जाहिर हो चुका है कि उन्हें सीमा विवाद के हल में दिलचस्पी नहीं है और वे इसका इस्तेमाल हमेशा भारत के खिलाफ करने की ख्वाहिश रखते हैं।

भारत के लिए आगे का रास्ता खुला हुआ है
चीन अपने पिट्ठू पाकिस्तान के अलावा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रति भी उदार रवैया अपनाए हुए है। हालांकि, भारत और रूस की अपने एक ऐतिहासिक दोस्ती है और फिलहाल उसे सिरे से खारिज करने की कोई जरूरत नहीं है। लेकिन, चीन के ओलंपिक वाले रवैए पर अमेरिका ने जिस तरह का स्टैंड लिया है, वह भारत के नजरिए से एक सकारात्मक पहल है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अपने भरोसेमंद राजनीतिक दोस्त एरिक गारसेट्टी को भारत में राजदूत बनाकर भेजा है तो जापान और ऑस्ट्रेलिया में भी अपने करीबियों को तैनात किया है। भारत-प्रशांत गठबंधन के लिए यह बहुत बड़ा संकेत है और क्वाड समूह की ताकत बढ़ना भी निश्चित लग रहा है। एक तरह से भारत के लिए आगे का रास्ता खुला हुआ है।

क्यों चीन की कूटनीतिक हार है ?
अमेरिका के लाख दबाव के बावजूद भारत ने रूस से एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदकर पहले ही दुनिया को बता दिया है कि उसके लिए सामरिक स्वायत्तता बहुत अहम है। मोदी सरकार जल,थल और नभ में अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने पर लगातार काम कर रही है तो क्वाड के साथ सहयोग करके भारत-प्रशांत क्षेत्र पर भी उसका फोकस है; और इसके लिए फ्रांस के साथ भी उसकी सामरिक जुगलबंदी है। शायद यही वजह है कि चीन की पैंतरेबाजी और वुल्फ वॉरियर डिप्लोमेसी (चीन की आक्रामक कूटनीति) की दाल गलने के दिन लद चुके हैं और ओलंपिक का राजनीतिक इस्तेमाल करना, चीन की इसी खिसियाहट का परिणाम लग रहा है और यह दांव फिलहाल उलटा पड़ गया है।












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