भूमि बहाली के लिए गांधीनगर रोडमैप क्या है, G20 Summit में इसकी चर्चा क्यों? जानिए
जी20 समिट में ग्लोबल लैंड इनिशिएटिव गांधीनगर रोडमैप के कार्यान्वयन के लिए बेहद अहम है। इस पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के बाद अहम रणनीति तैयार किए जाने की संभावना है।
तेजी से बढ़ते खनन के चलते कई क्षेत्रों में तेजी से जलवायु परिवर्तन देखा गया। जिसका खामियाजा दुनिया के लगभग सभी देशों को उठाना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति ने निपटने के लिए भारत का गांधीनगर रोडमैप अहम साबित हो सकता है। ऐसे में जी 20 समिट में दुनिया के 20 देशों के नेता आर्थिक विकास, रणनीतिक समेत तमाम वैश्विक मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। खनन प्रभावित क्षेत्रों में भूमि बहाली पर भी चर्चा होगा। इसके लिए गांधीनगर रोडमैप को चर्चा में शामिल किया जाता है।
क्या है गांधीनगर रोडमैप
जी20 ग्लोबल लैंड इनिशिएटिव (GLI) को मजबूती देने के लिए भारत ने खास रोडमैप तैयार किया है। जिसे गांधीनगर कार्यान्वयन रोडमैप (GIR) नाम दिया गया है। जिसके तहत गांधीनगर सूचना मंच (GIP) जंगल की आग से प्रभावित क्षेत्रों और खनन प्रभावित क्षेत्रों में पर्यावरण में आने वाले बदलाव पर नजर रखता है। इस रोडमैप को वैश्विक स्तर पर लागू करने के बड़े फायदे हो सकते हैं। इस रोडमैप के दो प्रमुख उद्देश्य हैं।

गांधीनगर रोडमैप के तहत 2030 तक सभी खनन-प्रभावित भूमि क्षेत्रों में भूमि बहाली के साथ वर्ष 2040 तक उनके पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली के प्रयास किए जाएंगे। वहीं दूसरा स्वैच्छिक आधार पर पारिस्थितिकी तंत्र बहाली में तेजी लाने के लिए भाग लेने वाले देशों के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने का भी प्रयास किया जाएगा।












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