Year of Millets: विदेशी मेहमानों की थाली में बाजरे की डिश, खूब भाएंगे G20 menu में भारतीय पकवान
केंद्र सरकार ने बाजरे के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए इस वर्ष को बाजरा वर्ष घोषित किया है। जी-20 में भी इसकी एक झलक देखने को मिलेगी। दिल्ली के ताज पैलेस होटल ने अपने मेन्यू में बाजरा ट्विस्ट शामिल किया है।
Year of Millets: भारत G20 18वें शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। सम्मेलन में मिलेट्स के बने फूड के प्रयोग की संयुक्त राष्ट्र महासभा की अनुमति के बाद अब इसे विदेशी मेहमानों के स्वागत में परोसा जाएगा। भारत की ओर मिलेट्स को बढा़वा देने का एक पहला अंतर्राष्ट्रीय स्तर का प्रयास बनेगा।
डिश में मोटे अनाज के पकवान
हाल ही में प्रतिष्ठित ताज पैलेस होटल ने अपने मेनू में बाजरा ट्विस्ट को शामिल किया है। समिट में आने वाले सभी मेहमानों को शुद्ध शाकाहारी खाना ही परोसा जाएगा। सभी के लिए खास तरह की मिलेट्स थाली तैयार की गई है। रिपोर्ट्स की मानें तो खाने के मैन्यू में 100 से भी ज्यादा पकवान शामिल होंगे। जिसमें कई पकवान तो बाजरा, रागी, ज्वार और तिल आदि मोटे अनाज से बने होंगे।
बिहार का लिट्टी-चोखा और राजस्थान का दा चूरमा
स्टार्टर मैन्यू में सबकुछ मिलेट्स से ही तैयार किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक बिहार का लिट्टी-चोखा, राजस्थानी दाल बाटी चूरमा, पंजाबी तड़का, उत्तपम और इडली, बंगाली रसगुल्ले, दक्षिण भारत का मसाला डोसा, जलेबी जैसी कई खास डिशेज और मिठाइयों खास तौर पर परोसा जाएगा।

दरअसल, भारत में बाजरा क्रांति पूरे जोरों पर है। रागी, बाजरा, ज्वार और कोदो और फॉक्सटेल बाजरा जैसे मिलेट्स के आठ किस्मों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।
केंद्र सरकार के प्रयासों के बीच पिछले कुछ वर्षों में ज्वार, बाजरा, रागी और छोटे मोटे अनाजों उत्पादन में आश्चर्यजनक रूप से परिवर्तन देखा गया है। 2012-13 में ज्वार का 53 लाख टन उत्पादन हुआ था। जबकि बाजरे का उत्पादन 87 लाख टन था। वहीं रागी ने 16 लाख टन उत्पादित किया गया था। ज्वार की उत्पादन यात्रा में पिछले कुछ वर्षों में कई उतार-चढ़ाव देखे गए।
2014-15 में भारी गिरावट आई थी, जो कि 2015-16 में भी जारी रही। लेकिन बीच के कुछ वर्षों में काफी सुधार देखा गया। इसके बाद 2018-19 में एक बार फिर गिरावट आई। इसके बाद 2020-21 तक ज्वार का उत्पादन 48 लाख टन तक पहुंच गया।
सरकार ने इस साल को मिलेट्स वर्ष घोषित कर रखा, इसकी झलक जी-20 में भी देखने को मिलेगी। विदेशी के मेहमानों के स्वागत की भव्य तैयारी है। इसको लेकर समिट के विशेष सचिव मुक्तेश परदेशी के मुताबिक, मेहमानों की भोजन प्राथमिकताओं का ख्याल रखना भारत के आतिथ्य मूल्य हैं। जब हम 'अतिथि देवो भवः' की बात करते हैं, तो इसका मतलब है कि अतिथि की आवश्यकताओं का अध्ययन किया जाता है।
मुक्तेश परदेशी ने कहा, "भारत का प्रोटोकॉल विभाग लंबे समय से मिलेट्स की डिश पर काम कर रहा है। यह भी महत्वपूर्ण है कि हम अपने आतिथ्य के माध्यम से सूक्ष्म तरीके से क्या संदेश देना चाह रहे हैं, इसकी भी ट्रेनिंग दी गई है। जी-20 के दौरान कई व्यंजन बनाए गए हैं। इनमें सिर्फ 3 से 4 नहीं, बल्कि सैकड़ों भारतीय व्यंजन दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। जिन्हें उच्च मानकों की गुणवत्ता के साथ तैयार किया जाएगा। विदेशी मेहमानों के सामने डिश में विविधता को प्रदर्शित करना हमारा लक्ष्य है। बाजरा के अंतरराष्ट्रीय वर्ष में हम उस पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इसे मेहमानों के लिए स्ट्रीट फूड की तरह उपलब्ध कराएंगे।"












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