Formula-E Race Issue: बीआरएस अध्यक्ष केटीआर के खिलाफ FIR दर्ज, ACB ने राज्यपाल से ली अनुमति
Formula-E Race Issue: भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष और विधायक केटी रामा राव के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए एफआईआर दर्ज की है। यह मामला हैदराबाद में पिछली बीआरएस सरकार के दौरान आयोजित फॉर्मूला-ई रेस में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है।
राज्यपाल से अनुमति और एफआईआर का पंजीकरण
एसीबी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। इसमें केटी रामा राव के साथ दो अन्य अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है। तेलंगाना के राज्यपाल जिशनू देव वर्मा ने हाल ही में रामा राव के खिलाफ मामला दर्ज करने की अनुमति दी थी।

नवंबर में राज्य सरकार ने राज्यपाल से इस मामले में एफआईआर दर्ज करने की अनुमति मांगी थी। नगर प्रशासन विभाग ने एसीबी से इन आरोपों की जांच करने का अनुरोध किया था।
अनियमितताओं के आरोप
फॉर्मूला-ई रेस के आयोजन में एक वरिष्ठ नौकरशाह पर बिना उचित प्राधिकरण के आयोजकों के साथ समझौते में प्रवेश करने और 55 करोड़ रुपए का भुगतान करने का आरोप है। इस मामले में केटी रामा राव जो उस समय नगर प्रशासन मंत्री थे। उनकी भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
रेस का रद्द होना
यह रेस जो फरवरी 2023 में आयोजित होने वाली थी। कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद दिसंबर में रद्द कर दी गई। कांग्रेस सरकार ने आयोजन को लेकर बीआरएस सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि इसमें अनियमितताएं थी।
केटी रामा राव की प्रतिक्रिया
रामा राव ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कानूनी रूप से मुकाबला करने का संकेत दिया है। बीआरएस ने भी इस मामले पर कांग्रेस सरकार को आड़े हाथों लिया है। बीआरएस का कहना है कि फॉर्मूला-ई रेस तेलंगाना के विकास को ध्यान में रखकर आयोजित की गई थी और इस पर लगाए गए आरोप आधारहीन हैं।
राजनीतिक तनाव और आरोप-प्रत्यारोप
इस मामले ने तेलंगाना की राजनीति में उथल-पुथल मचा दी है। बीआरएस और कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाजी हो रही है। कांग्रेस सरकार ने बीआरएस पर राज्य के संसाधनों के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। जबकि बीआरएस ने इसे बदले की राजनीति करार दिया है।
एसीबी कर रही मामले की जांच
इस मामले की जांच अब एसीबी के हाथों में है। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है। क्योंकि दोनों पार्टियां इसे लेकर अपनी-अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं। क्या यह मामला केवल कानूनी है या इसके पीछे राजनीति का बड़ा खेल है। यह देखना दिलचस्प होगा।












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