Naravane Book: क्यों नहीं छपी पूर्व सेना प्रमुख की किताब? अब वायरल वीडियो में बोले– ‘भारत ने जमीन नहीं खोई'
Former Army Chief Manoj Mukund Naravane Book Controversy: पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। वजह है उनकी वह किताब 'द कैंटोनमेंट कॉन्स्पिरेसीः ए मिलिट्री थ्रिलर', जो अब तक प्रकाशित नहीं हो पाई, और साथ ही उनका एक पुराना वीडियो, जो अचानक सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
ये मुद्दा तब सुर्खियों में आया जब सोमवार (2 फरवरी) को लोकसभा में राहुल गांधी ने नरवणे की किताब को लेकर चीन और डोकलामा अपनी बात रखी। इसी विवाद के बीच नरवणे का एक पुराना वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत ने एक इंच भी जमीन अपनी नहीं खोई थी।

संसद से लेकर सोशल मीडिया तक, हर जगह एक ही सवाल गूंज रहा है कि आखिर उस किताब में ऐसा क्या है, जिसकी वजह से वह अब तक छप नहीं सकी। किताब ऐसा क्या लिखा था, जिसका जिक्र राहुल गांधी संसद में करना चाहते थे। ऐसे में आइए समझते हैं कि पूरा विवाद क्या है और आखिर क्यों नरवणे की किताब नहीं छप पाई है।
▶️ संसद में राहुल गांधी ने क्यों किया नरवणे की किताब की जिक्र, अमित शाह और राजनाथ भड़के
सोमवार (2 फरवरी) को लोकसभा में उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया, जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान बोलने के लिए खड़े हुए। अपने भाषण में उन्होंने डोकलाम मुद्दे का जिक्र किया और पूर्व सेना प्रमुख मनोज नरवणे की एक किताब में लिखे गए कथित संस्मरणों का हवाला देने लगे। बस यहीं से विवाद शुरू हो गया।
गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री ने राजनाथ सिंह ने तुरंत आपत्ति जताई और कहा कि किसी ऐसी किताब का संदर्भ सदन में नहीं दिया जा सकता, जो अब तक प्रकाशित ही नहीं हुई हो। देखते ही देखते बहस तेज हो गई और सदन में शोरगुल बढ़ता चला गया।
▶️नरवणे की कौन सी किताब है, जो अब तक नहीं छप पाई? (Naravane Unpublished Book)
यह किताब है 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी', बताया जाता है कि यह किताब एक साल से ज्यादा समय से केंद्र सरकार की मंजूरी का इंतजार कर रही है। जब इस देरी को लेकर खुद जनरल नरवणे से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने साफ कहा था कि उनका काम किताब लिखना और पब्लिशर को सौंपना था। आगे की प्रक्रिया रक्षा मंत्रालय की मंजूरी से जुड़ी है। उनके मुताबिक, पब्लिशर ने किताब रक्षा मंत्रालय को सौंप दी है और वह लंबे समय से रिव्यू में है। यानी लेखक के हाथ में अब ज्यादा कुछ नहीं है।
एक लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान, जब नरवणे से सीधे सवाल किया गया कि उनकी किताब अब तक बाजार में क्यों नहीं आई, तो उन्होंने बेहद साधारण शब्दों में जवाब दिया, ''मेरा काम किताब लिखना और उसे पब्लिशर्स को देना था,जो मैंने कर दिया है। पब्लिशर्स को MOD से इजाजत लेनी थी। उन्होंने किताब उन्हें दे दी है। यह रिव्यू में है, यह अभी भी एक साल से ज्यादा समय से रिव्यू में है।"
▶️ राहुल गांधी के बयान के बाद नरवणे का पुराना वीडियो वायरल, जिसमें बोले- 'भारत की एक इंच भी जमीन नहीं गई'
राहुल गांधी के बयान और लोकसभा में हंगामे के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पूर्व सेना प्रमुख नरवणे का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया। यह वीडियो डोकलाम विवाद के समय का बताया जा रहा है। इसमें मनोज नरवणे साफ कहते दिख रहे हैं कि भारत की एक इंच जमीन भी नहीं गई है। वीडियो सामने आते ही बहस ने नया मोड़ ले लिया।
वीडियो में पूर्व सेना प्रमुख यह समझाते नजर आ रहे हैं कि,
''लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर हालात वैसे ही हैं, जैसे तनाव शुरू होने से पहले थे। भारत ने किसी भी तरह का क्षेत्रीय नुकसान नहीं उठाया है। भारत ने अपनी एक इंच भी जमीन नहीं खोई है। जो भी समझौते हुए, वे आपसी और समान सुरक्षा के सिद्धांत पर आधारित थे। डिसएंगेजमेंट प्रक्रिया को एक व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया, ताकि सीमा पर शांति बनी रहे और भविष्य में टकराव की आशंका कम हो।''
▶️ नरवणे की किताब को लेकर राजनीति क्यों गरमा गई?
इस पूरे मामले ने राजनीतिक रंग इसलिए भी ले लिया क्योंकि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बयान दिए गए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी की टिप्पणी पर कड़ा ऐतराज जताया। सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद लोकसभा अध्यक्ष को बैठक स्थगित करनी पड़ी। भाजपा नेताओं का कहना है कि पूर्व सेना प्रमुख के शब्दों पर भरोसा किया जाना चाहिए, न कि अप्रमाणित संदर्भों पर।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर पूर्व सेना प्रमुख खुद कह चुके हैं कि भारत की एक इंच जमीन भी नहीं गई, तो फिर उनकी किताब को लेकर इतना विवाद क्यों है। क्या किताब में ऐसे तथ्य हैं, जिन पर आधिकारिक मंजूरी जरूरी है। या फिर यह पूरी बहस राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित है। फिलहाल इतना साफ है कि जब तक 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' प्रकाशित नहीं होती, तब तक इस सवाल का जवाब अधूरा ही रहेगा।
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