डायरेक्‍टर राजेश नंदा का वृद्धाश्रम में निधन, परिवार ने पहचानने से भी किया इंकार

1962 में आई पीक पॉकेट और 1965 में आई संत तुकाराम नामक फिल्‍म का निर्देशन उन्‍होंने ही किया था। इसके बाद 1969 में उन्‍होंने विनोद खन्‍ना को कास्‍ट कर नतीजा नामक हिंदी फिल्‍म बनाई।

मुंबई। बीते जमाने के जाने-माने फिल्‍म डायरेक्‍टर और प्रोड्यूसर राजेश नंदा का आकुर्डी के एक वृद्धाश्रम में निधन हो गया। उनकी उम्र 80 साल थी। बताया जा रहा है कि कई सालों से राजेश नंदा का उनके परिवारवालों और रिश्‍तेदारों से संबंध टूटा हुआ था। सबसे दर्दनाक बात तो यह रही कि जब राजेश नंदा के निधन की सूचना आश्रम की ओर से उनके परिजनों को दी गई तो कोई भी उनके अंतिम संस्‍कार के लिए नहीं आया।

डायरेक्‍टर राजेश नंदा का वृद्धाश्रम में निधन, परिवार ने पहचानने से भी किया इंकार

आपको बता दें कि राजेश नंदा 60-70 दशक के जाने माने निर्माता-निर्देशक थे। हालांकि उन्होंने काफी कम फिल्में बनाई, लेकिन उनकी कला शैली ने उन्हें फिल्म जगत में उस जमाने में दिग्गजों की कतार में खड़ा कर दिया था 1962 में आई पीक पॉकेट और 1965 में आई संत तुकाराम नामक फिल्‍म का निर्देशन उन्‍होंने ही किया था। इसके बाद 1969 में उन्‍होंने विनोद खन्‍ना को कास्‍ट कर नतीजा नामक हिंदी फिल्‍म बनाई। इस फिल्म में विनोद खन्ना के साथ जुनियर मेहमूद, बिंदु ने भी काम किया था। पढ़ेंं- मां ने डांंटा तो बेटे ने कर दी हत्‍या, खून से दीवार पर बनाई स्‍माइली और लिखा ये मैसेज

कैसे पहुंचे थे वृद्धाश्रम

जानकारी के मुताबिक करीब एक साल पहले राजेश नंदा को प्रसिद्ध शायर अशोक खोसला उन्हें आकुर्डी के संत बाबा मोनी साहेब वृद्ध आनंदाश्रम में लेकर आए थे। अशोक खोसला ही इस वृद्धाश्रम के संचालक है। राजेश नंदा की मृत्यु पर खोसला ने कहा कि एक साल पहले मुझे प्रसिद्ध कवि सुधाकर शर्मा का फोन आया था। उन्होंने मुझे बताया कि निर्देशक राजेश नंदा एक अस्पताल में भर्ती है।

उनके पास उनका कोई रिश्तेदार आदि नहीं है। जब खोसला ने रिश्तेदारों के संपर्क करने की कोशिश की, तो उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। बाद में एक रिश्तेदार से संपर्क होने पर उसने पहचानने से भी इनकार कर दिया। इसके बाद मैं राजेश नंदा को लेकर वृद्धाश्रम आ गया। वे बीमार थे और आश्रम ने उनकी अंतिम समय तक पूरी तरह से देखभाल की।

भाई और भांजी ने लूट ली संपत्ति

बताया जाता है कि वृद्धाश्रम में आने के बाद नंदा ज्यादा किसी से बात नहीं करते थे। कभी कभी उनके मुंह से सिर्फ इतना ही निकलता था कि उनके भाई और भांजी ने उनकी संपत्ति लूट ली। शनिवार को उनकी मृत्यु के बाद उनके रिश्तेदारों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन किसी से भी संपर्क नहीं हो सका। इस कारण आश्रम की ओर से से राजेश नंदा का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

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