जानिए कौन हैं चारा घोटाला में बरी हुए जगन्नाथ मिश्रा, कैसा रहा है उनका राजनीतिक करियर?
नई दिल्ली। 21 साल पुराने चारा घोटाले के एक मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को रांची की सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने दोषी करार दिया है। सजा का ऐलान 3 जनवरी को होगा। इस मामले में लालू यादव और जगन्नाथ मिश्रा समेत 22 लोग आरोपी थे। अदालत ने जगन्नाथ मिश्रा के अलावा बिहार के पूर्व मंत्री विद्यासागर निषाद और पीएसी के तत्कालीन अध्यक्ष ध्रुव भगत, हार्दिक चंद्र चौधरी, सरस्वती चंद्र और साधना सिंह को बरी कर दिया है। आपको बता दें कि साल 1990 से 1994 के बीच देवघर कोषागार से 89 लाख, 27 हजार रुपए का फर्जीवाड़ा करके अवैध ढंग से पशु चारे के नाम पर निकासी के इस मामले में कुल 38 लोग आरोपी थे। जिनके खिलाफ सीबीआई ने 27 अक्तूबर, 1997 को मुकदमा संख्या आरसी 64ए 1996 दर्ज की थी। इसमें 11 की मौत ट्रायल के दौरान हो गई थी। दो आरोपी सरकारी गवाह बन गए और निर्णय के पूर्व ही अपना दोष स्वीकार कर लिया था। आइए आपको जगन्नाथ मिश्रा के बारे में विस्तार से बताते हैं।

कौन हैं जगन्नाथ मिश्रा
जगन्नाथ मिश्रा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं। इसके अलावा को केंद्रीय मंत्रिमंडल में मंत्री भी रहे हैं। कांग्रेस में एक उच्च स्तर पर शामिल होने के बाद उन्हें तीन बार बिहार का मुख्यमंत्री चुना गया। उसके बाद कांग्रेस छोड़कर वो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए और अब जनता दल के नेता हैं।

क्या था जगन्नाथ पर आरोप
जगन्नाथ मिश्रा पर आरोप था कि उन्होंने दुमका और डोरंडा निधि से धोखाधड़ी से रूपये निकाले। 30 सितंबर 2013 को रांची के एक विशेष केंद्रीय जांच ब्यूरो ने उन्हें चारा घोटाले में 44 अन्य लोगों के साथ सजा सुनाई थी। उस वक्त उन्हें चार साल की कारावास और 200,000 रुपये का जुर्माना दिया गया था।

प्राध्यापक के रूप में अपना करियर शुरू किया
जगन्नाथ मिश्रा ने एक प्राध्यापक के रूप में अपना करियर शुरू किया था और बाद में बिहार विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर बन। उन्होंने कई पुस्तकों को भी संपादित किया है। उनके बड़े भाई, ललित नारायण मिश्रा भी राजनीति में थे और रेल मंत्री थे। उनके पुत्र नीतीश मिश्रा भी राजनीति में है और उन्होंने बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में सेवा की है।












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