भारत की पहली महिला ट्रांसजेंडर ने दिया इस्तीफा, शिक्षकों और विद्यार्थियों पर आरोप
मानबी ने शिक्षकों और विद्यार्थियों पर असहयोग करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि वह उनके विरोध का सामना करते-करते थक चुकी हैं।
क्रिशनगर। भारत की पहली महिला ट्रांसजेंडर प्रिंसिपल मानबी बंदोपाध्याय ने लगभग डेढ़ साल काम करने के बाद इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने इस्तीफे की वजह बताते हुए कहा है कि शिक्षकों और विद्यार्थियों का एक गुट उनके साथ असहयोग कर रहा है जिससे वह मानसिक तौर पर काफी परेशान हो चुकी हैं। पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के डीएम सुमित गुप्ता ने कहा है कि उनके पास मानबी बंदोपाध्याय ने इस्तीफे का पत्र भेजा है। Read Also: ट्रांसजेंडर को मिला तीसरे जेंडर का दर्जा, रेलवे और IRCTC ने रिजर्वेशन फॉर्म में दिया ऑप्शन

डीएम सुमित गुप्ता ने बताया कि क्रिशनगर महिला कॉलेज की प्रिसिंपल मानबी बंदोपाध्याय ने 27 दिसंबर को पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने इस्तीफे का लेटर राज्य के उच्च शिक्षा विभाग के पास भेज दिया है। मानबी ने अपने इस्तीफे के बारे में बताया है कि उन्होंने 9 जून, 2015 को महिला कॉलेज के प्रिंसिपल का पद संभाला था, तबसे ही शिक्षकों के एक गुट ने उनसे असहयोग करना शुरू कर दिया जिसका सामना करते-करते वह फ्रस्ट्रेट हो चुकी हैं।
दूसरी तरफ, शिक्षकों ने प्रिंसिपल के आरोपों को खारिज करते हुए उल्टे उन पर ही असहयोग करने का आरोप लगाया। शिक्षकों और प्रिंसिपल के बीच विवाद की जांच और सच्चाई का पता लगाने के लिए हाल ही में ज्वाइंट डायरेक्टर ऑफ पब्लिक इंस्ट्रशन आरपी भट्टाचार्य की अगुवाई में चार मेंबर की एक टीम ने कॉलेज विजिट किया था। मानबी ने कहा, 'सहकर्मी मेरे विरोध में चले गए। कुछ स्टूडेंट्स भी मेरे खिलाफ थे। मैंने कॉलेज में अनुशासन लाने की कोशिश की और शिक्षा का माहौल बनाना चाहा। शायद इसलिए सब मेरा विरोध करने लगे। मुझे एडमिनिस्ट्रेशन का साथ मिला लेकिन शिक्षकों और विद्यार्थियों ने कभी मेरा साथ नहीं दिया।'
मानबी ने कहा, 'मैं बहुत ज्यादा मानसिक दबाव झेल रही हूं और इसे मैं और झेल नहीं सकती इसलिए मैंने पद से इस्तीफा दे दिया। शिक्षकों और विद्यार्थियों के विरोध और घेराव का सामना करते-करते मैं थक चुकी हूं। उनकी तरफ से मुझे कई लीगल नोटिस भेजे गए। मैं इस कॉलेज में नई आशा और सपनों के साथ आई थी लेकिन अब मैं हार चुकी हूं।' 51 साल की मानबी पहले सोमनाथ के नाम से जानी जाती थीं। 2003-04 में मानबी कई ऑपरेशन से गुजरने के बाद महिला बनीं। 1995 में उन्होंने देश की पहली ट्रांसजेंडर मैगजीन निकालनी शुरू की जिसका नाम था -ओब-मानब। Read Also: पैसा निकालने गई ट्रांसजेंडर से बैंक स्टाफ ने की बदतमीजी, मैनेजर से नहीं दिया मिलने












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