Iran America War: 47 साल में जो नहीं हुआ, वो अब हो गया! ईरान का अमेरिका पर सबसे बड़ा दावा, टेंशन में ट्रंप
Iran America War: अमेरिका और ईरान के बीच हाल में हुए सैन्य टकराव के बाद दोनों देशों के रिश्तों में नया मोड़ आता दिख रहा है। ईरान के वरिष्ठ अधिकारी और सुप्रीम लीडर के सैन्य सलाहकार मोहसेन रेज़ाई ने दावा किया है कि 47 साल के इस्लामिक रिपब्लिक ईरान के इतिहास में यह पहली ऐसी लड़ाई है जिसे वह अपनी जीत मानता है।
रेज़ाई के मुताबिक इस संघर्ष के बाद अमेरिका के साथ किसी भी संभावित शांति वार्ता में ईरान की स्थिति पहले से ज्यादा मजबूत हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि अब आगे की दिशा काफी हद तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसलों पर निर्भर करेगी।

47 साल में पहली बार जीत का दावा
मोहसेन रेज़ाई ने कहा कि ईरान ने अपने आधुनिक इतिहास में कई संघर्षों का सामना किया, लेकिन इस बार हालात अलग रहे। उनका दावा है कि अमेरिका के साथ हुए हालिया सैन्य टकराव में ईरान अपने रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने में सफल रहा। इसी वजह से तेहरान इसे अपनी पहली बड़ी सैन्य जीत के रूप में देख रहा है। रेज़ाई का मानना है कि इस नतीजे ने दुनिया के सामने ईरान की ताकत और उसकी सैन्य क्षमता को दिखाया है, जिससे भविष्य की बातचीत में उसका प्रभाव बढ़ेगा।
शांति वार्ता फिलहाल रुकी हुई
रेज़ाई के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच किसी नए समझौते को लेकर बातचीत अभी ठप पड़ी हुई है। दोनों देशों के बीच लागू सीज़फायर को उन्होंने "कमजोर" बताया और कहा कि तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। उनका कहना है कि किसी स्थायी शांति समझौते के लिए दोनों पक्षों के बीच भरोसे का माहौल बनना जरूरी है। जब तक महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति नहीं बनती, तब तक क्षेत्र में अस्थिरता और तनाव बना रह सकता है।
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24 अरब डॉलर फंड बना सबसे बड़ा मुद्दा
ईरान ने शांति प्रक्रिया के लिए एक अहम शर्त रखी है। रेज़ाई के मुताबिक अमेरिका को ईरान के फ्रीज किए गए 24 अरब डॉलर जारी करने होंगे। ईरान चाहता है कि पहले चरण में 12 अरब डॉलर और उसके बाद दूसरे चरण में बाकी 12 अरब डॉलर रिलीज किए जाएं। उनका कहना है कि अगर अमेरिका ऐसा करता है तो यह संकेत होगा कि वॉशिंगटन वास्तव में समझौते और तनाव कम करने के लिए गंभीर है। इस मुद्दे को दोनों देशों के बीच भरोसे की परीक्षा माना जा रहा है।
फिर युद्ध हुआ तो अमेरिकी ठिकाने होंगे निशाने पर
मोहसेन रेज़ाई ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा युद्ध होता है तो ईरान सीधे अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसा संघर्ष केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर फारस की खाड़ी, लाल सागर और भूमध्य सागर तक फैल सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि फिलहाल नए युद्ध की संभावना कम दिखाई देती है, लेकिन क्षेत्रीय तनाव अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
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ट्रंप-मुज्तबा मुलाकात से किया इनकार
रेज़ाई ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम लीडर के उत्तराधिकारी माने जाने वाले Mojtaba Khamenei और Donald Trump के बीच किसी सीधी मुलाकात की कोई योजना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान भविष्य की किसी न्यूक्लियर डील को लेकर सतर्क है क्योंकि उसका आरोप है कि अमेरिका पहले भी कई समझौतों से पीछे हट चुका है। साथ ही ईरान ने संकेत दिया कि वह Strait of Hormuz के प्रबंधन को लेकर Oman के साथ सहयोग जारी रखेगा।












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