Karnataka Politics: रामंलिंगा रेड्डी ने इस्तीफा लिया वापस, आखिर क्यों लिया यूटर्न?
Ramalinga Reddy resignation: कर्नाटक की राजनीति में चल रहा ड्रामा खत्म हो गया है। राज्य के मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने इस्तीफा दे दिया था। पर अब खबर है कि उन्होंने इस्तीफा वापस ले लिया है। कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने यह बड़ी जानकारी दी। अब सब कुछ ठीक हो गया है। रेड्डी अपनी कैबिनेट में बने रहेंगे। कर्नाटक कांग्रेस नेता रामलिंगा रेड्डी ने इस्तीफा वापस ले लिया है।
एआईसीसी प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने इसकी पुष्टि करते हुए इसे एक छोटी गलतफहमी बताया है। उन्होंने कहा रेड्डी अपने मंत्री पद पर बने रहेंगे। वे पार्टी के वफादार सिपाही बने रहेंगे।

आलाकमान से बातचीत के बाद यह फैसला हुआ। सुरजेवाला ने रेड्डी के अनुभव को अहम बताया। यह कदम कैबिनेट की स्थिरता के लिए जरूरी था। कांग्रेस का दावा है कि बीजेपी इससे हैरान है। पार्टी में अब सब कुछ सामान्य हो गया है। उन्होंने कहा पार्टी अब अपने चुनावी काम पर ध्यान दे रही है। बीके हरिप्रसाद ने राज्यसभा के लिए नामांकन भरा है। अन्य नेताओं ने भी आज अपने पर्चे भरे हैं। राज्य इकाई ने मजबूती और एकजुटता दिखाई है। पार्टी का अब पूरा ध्यान काम पर है।
शपथ के एक दिन बाद रामलिंगा ने दिया था इस्तीफा
रामलिंगारेड्डी ने 3 जून को मंत्री पद की शपथ ली थी। शपथ के कुछ दिन बाद ही उन्होंने इस्तीफा दिया। उन्हें सिंचाई मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई थी। वह बेंगलुरु विकास विभाग मंत्रालय चाहते थे। लेकिन अब पार्टी ने इस मामले को सुलझा लिया है। सब कुछ पहले जैसा सामान्य हो गया है।
सीएम डीके ने रामलिंगा को बताया अपना करीबी दोस्त
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी पूरी स्थिति साफ़ की। उन्होंने कहा कि मामला अब पूरी तरह सुलझ गया है। रेड्डी उनके पुराने और करीबी दोस्त हैं। उन्होंने मीडिया से अफवाहें नहीं फैलाने को कहा। उन्होंने पुरानी बातों को अब बेकार बताया। कांग्रेस पार्टी पूरी तरह एकजुट नज़र आ रही है।
सुरजेवाला ने बीजेपी पर साधा निशाना
सुरजेवाला ने बीजेपी पर भी तीखा तंज कसा। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी सरकार गिराना चाहती थी। वे राज्य में सत्ता हस्तांतरण रोकना चाहते थे। लेकिन उनका यह दांव खाली गया। रेड्डी 53 साल से पार्टी के साथ हैं। इस पूरे मामले को सिर्फ एक गलतफहमी माना जा रहा है।
क्या बोले रामलिंगा रेड्डी?
वही रामलिंगा रेड्डी ने साफ किया कि उन्होंने पार्टी छोड़ी नहीं। उन्होंने सिर्फ मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। लेकिन अब वह अपनी पूरी जिम्मेदारी निभाएंगे। कांग्रेस पार्टी को उनके अनुभव की बहुत जरूरत है। वह कांग्रेस के एक वफादार सिपाही बने रहेंगे। कर्नाटक कैबिनेट का यह विवाद अब खत्म हो गया है।














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