Farmers Protest: 101 किसानों का जत्था पदैल करेगा दिल्ली कूच, शंभू बॉर्ड पर बढ़ी सुरक्षा
Farmers Protest News: अपनी मांगों को लेकर हरियाणा-पंजाब के किसान एक बार से दिल्ली कूच करने की तैयारी में है। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने गुरुवार को कहा कि 101 किसानों का एक जत्था शुक्रवार को दोपहर एक बजे शंभू बॉर्डर विरोध स्थल से दिल्ली के लिए पैदल मार्च शुरू करेगा।
किसानों के अल्टीमेटम के बाद हरियाणा सीमा पर अर्धसैनिक बलों को तैनात कर दिया गया है। वहीं, अंबाला जिला प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक लगा दी है। इतना ही नहीं, उपायुक्त द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अगले आदेश तक पैदल, वाहन या अन्य साधनों से जुलूस निकालने पर रोक लगा दी गई है।

अंबाला में पुलिस ने भी किसानों की दिल्ली कूच की योजना को लेकर गुरुवार को अलर्ट जारी किया। साथ ही, सुरक्षा स्थिति का आकलन करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को सीमा पर पहुंचे। इतना ही नहीं, हरियाणा सीमा पर बहुस्तरीय बैरिकेडिंग के साथ केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को भी तैनात किया गया है।
पीटीआई की खबर के मुताबिक, अंबाला जिला प्रशासन ने किसानों से अपने मार्च पर पुनर्विचार करने के लिए कहा है। इस बीच, गुरुवार को शंभू बॉर्ड पर प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि जत्था दिल्ली की ओर (शुक्रवार को) कूच करेगा। सरकार क्या करेगी, यह उन्हें तय करना है।
हम शंभू सीमा से दोपहर 1 बजे दिल्ली की ओर अपना मार्च शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर सरकार उन्हें मार्च निकालने से रोकती है तो यह किसानों की "नैतिक जीत" होगी। किसान नेता पंधेर ने कहा कि केंद्र और राज्यों में उनके नेता नियमित रूप से कह रहे हैं कि अगर किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली नहीं लाते हैं, तो कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
इसलिए अगर हम पैदल दिल्ली जाते हैं, तो किसानों को रोकने का कोई कारण नहीं होना चाहिए। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा के बैनर तले एकत्र हुए किसानों ने पहले कई अन्य मांगों के अलावा फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए कानूनी गारंटी की मांग को लेकर राष्ट्रीय राजधानी तक पैदल मार्च की घोषणा की थी।
सुरक्षा बलों द्वारा दिल्ली कूच रोक दिए जाने के बाद 13 फरवरी से वे पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू और खनौरी सीमा पर डेरा डाले हुए हैं। बीएनएसएस की धारा 163 को लागू करते हुए, अंबाला के डिप्टी कमिश्नर-कम-जिला मजिस्ट्रेट ने 30 नवंबर के आदेश में पांच या अधिक व्यक्तियों के गैरकानूनी रूप से एकत्र होने, तथा पैदल, वाहन या किसी अन्य माध्यम से जुलूस निकालने पर रोक लगा दी।
आदेश में कहा गया है कि यह आशंका है कि बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी पंजाब और हरियाणा से आएंगे और दिल्ली की ओर जाने के लिए शंभू सीमा पर इकट्ठा होंगे। इसलिए, सीमा बिंदुओं पर और जिले के भीतर उचित कदम उठाए जाने की जरूरत है, जिसमें बीएनएसएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा जारी करना शामिल है।
ताकि, बिना पूर्व अनुमति के ऐसे किसी भी व्यक्ति की आवाजाही न हो सके। आदेश में आगे कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति या समूह द्वारा पैदल या वाहनों से सार्वजनिक/निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और/या कानून प्रवर्तन एजेंसियों से टकराव करने, जिससे शांति और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने में बाधा उत्पन्न हो, पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
इसमें कहा गया है कि यह आदेश कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए ड्यूटी पर तैनात पुलिस एवं अन्य लोक सेवकों पर लागू नहीं होगा। इतना ही नहीं, आदेश में कहा गया है कि यह आदेश 30.11.2024 से लागू होगा और अगले आदेश तक जारी रहेगा। ऐसी जानकारी है कि आंदोलनकारी संसद का घेराव कर सकते हैं।
या फिर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की ओर जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्थायी रूप से डेरा डाल सकते हैं। साथ ही, कहा गया है कि आंदोलनकारियों ने हरियाणा पुलिस अधिनियम की धारा 69 के तहत कोई अनुमति नहीं ली है। गुरुवार को अंबाला में पत्रकारों से बात करते हुए पुलिस अधीक्षक सुरिंदर सिंह भोरिया ने सभी किसानों से शांति बनाए रखने की अपील की।
इसके अलावा, उन्होंने किसानों से दिल्ली मार्च करने की अनुमति लेने की अपील भी की। किसान नेताओं ने कहा है कि उनमें से 101 लोग शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली कूच करेंगे, तो भोरिया ने कहा, "जैसा कि मैंने आपको बताया है, कानून का पालन करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। कानून के जो भी प्रावधान हों, उनका पालन किया जाना चाहिए।"












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