बारिश ने बढ़ाई किसानों की मुसीबत तो वेस्ट यूपी से बढ़े मदद के हाथ, गाजीपुर पहुंचे लकड़ियों के भरे ट्रक
दिल्ली की सीमाओं पर विरोध-प्रदर्शन कर रहे किसानों के लिए अब आस-पास के इलाकों से मदद के हाथ बढ़ने शुरू हो गए हैं।
नई दिल्ली। Farmers protest against farm laws. केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले एक महीने से भी ज्यादा समय से दिल्ली की सीमाओं पर हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों के किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है। किसान संगठनों और केंद्र सरकार में जारी गतिरोध के बीच आज दिल्ली के विज्ञान भवन में 8वें दौर की बातचीत होगी। वहीं, पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश और ठंड ने कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों की मुसीबत को और ज्यादा बढ़ा दिया है। ऐसे में विरोध-प्रदर्शन कर रहे किसानों के लिए अब दिल्ली से सटे आस-पास के इलाकों से मदद के हाथ बढ़ने शुरू हो गए हैं।

यूपी के इन जिलों से बढ़े मदद के हाथ
इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक, गुरुवार को दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों को कड़कड़ाती ठंड से निजात दिलाने के मकसद से अलाव जलाने के लिए लकड़ियों से भरे ट्रक कई पहुंचे। किसानों की मदद के लिए ये ट्रक पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुजफ्फरनगर, गौतम बुद्ध नगर, बागपत और दिल्ली से सटे आसपास के इलाकों से भेजे गए थे।

गाजीपुर बॉर्डर पर लकड़ियां लेकर पहुंचे रणवीर तेवतिया
लकड़ियों से भरा ट्रक लेकर दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पहुंचे मेरठ के रणवीर तेवतिया ने बताया, 'हमारे पास घरों में जलाने के लिए काफी लकड़ियां रखी हैं और हमारे किसान भाई यहां बारिश और ठंड की वजह से परेशान हो रहे हैं, इसलिए हम वो लकड़ियां यहां लेकर आए हैं। अभी तक हम लकड़ियों से भरी चार ट्रैक्टर ट्रॉ़ली लेकर गाजीपुर बॉर्डर आ चुके हैं, जरूरत पड़ी तो और लकड़ियां लेकर आएंगे।'

बारिश और ठंड से जूझ रहे किसान
आपको बता दें कि दिल्ली में हुई बारिश के चलते विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों को पिछले कई दिनों से भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के कारण ना केवल किसानों के कैंपों में पानी भर गया है, बल्कि लकड़ियां गीली होने की वजह से खाना बनाने में भी दिक्कत आ रही है। गाजीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसान सतेंद्र तोमर ने बताया, 'दिल्ली में सर्द रातों से लड़ने के लिए अभी तक हम लोग अलाव जला रहे थे, लेकिन बारिश के कारण हमारी आधी से ज्यादा लकड़ियां गीली हो गई हैं। अब बड़ी संख्या में हमारे किसान भाई जलाने के लिए लकड़ियां लेकर पहुंचे हैं और हमारी मदद कर रहे हैं।'












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