FACT CHECK: मोदी सरकार ने दिए संकेत, फिलहाल अभी नहीं आ रहा है एनआरसी?

बेंगलुरू। नागरिकता संशोधन कानून को लेकर पूरे देश में मचे विरोध और बवाल के बीच एक राहत भरी खबर आई है। फिलहाल, मोदी सरकार देश भर में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी एनआरसी (NRC) लागू करने के लिए कानून नहीं लाने जा रही हैं, क्योंकि अभी तक न ही देश में एनआरसी की तैयारी नहीं हो सकी है और न ही इसके लिए कोई ड्राफ्ट तैयार नहीं किया गया है।

NRC

इसकी पुष्टि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी के बयानों से ही नहीं, बल्कि इसके संकेत सरकार ने बुधवार को देश भर के न्यूजपेपरों में छपे उक्त विज्ञापनों में भी दिए हैं, जिसमें सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरूद्ध फैलाए गए भ्रांतियों और गलतफहमियों को दूर करने की कोशिश की है।

गौरतलब है राष्ट्रपति की मुहर के कानून बन चुके नागरिकता संशोधित कानून के खिलाफ पिछले एक हफ्ते से पूरे देश में विरोध-प्रदर्शन शामिल हैं। यह विरोध-प्रदर्शन लोकसभा और राज्यसभा में बिल के पेश किए जाने और बिल के दोनों सदनों में सर्वसम्मति से पास होने के दौरान भी चल रहे थे।

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सीएए के विरोध में विरोध का असर उत्तर पूर्वी राज्यों में अधिक देखा गया, लेकिन राजधानी दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में विरोध-प्रदर्शन ने हिंसक रूप अख्तियार कर लिया और अब यह विरोध-प्रदर्शन देशव्यापी हो चला है, जिसमें अब तक कुल 3 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें मंगलुरू में 2 और उत्तर प्रदेश में एक की मौत की पुष्टि हो चुकी है।

माना जा रहा है कि सीएए के खिलाफ देशभर में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शन के बीच मोदी सरकार फिलहाल एनआरसी को ठंडे बस्ते में डाल सकती है, क्योंकि मोदी सरकार एनआरसी को लेकर जल्दबाजी के मूड में नहीं दिख रही है। दरअसल, गुरूवार को एक सरकारी विज्ञापन में जिन शब्दों को उपयोग किया गया है उससे साफ इशारा मिलता है कि सरकार देशभर में एनआरसी लागू करने की जल्दबाजी में बिल्कुल नहीं है।

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अखबारों में छपे विज्ञापन साफ-साफ कहा गया है, 'अगर कभी एनआरसी घोषणा की जाती है, तो ऐसी स्थिति में नियम और निर्देश ऐसे बनाए जाएंगे ताकि किसी भी भारतीय नागरिक को परेशानी न हो।' इस विज्ञापन से साफ इशारा मिलता है कि फिलहाल एनआरसी नहीं आने वाली है।

उल्लेखनीय है नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इनमें राजधानी दिल्ली से लेकर लखनऊ, पटना, मंगलुरू समेत कई छोटे-बड़े शहर शामिल हैं, जहां प्रदर्शनकारी सड़कों पर निकलकर एक्ट का विरोध कर रहे हैं। गुरूवार को राजधानी लखनऊ में उस वक्त विरोध-प्रदर्शन हिंसक हो गया जब पुलिस की गाड़ी को प्रदर्शनकारियों द्वारा आग के हवाले कर दिया गया।

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उक्त नजारा पुराने लखनऊ में अधिक देखा गया, जहां कई जगह आगजनी और तोड़फोड़ की घटना रिपोर्ट हुई है। वहां भीड़ इतनी बेकाबू थी कि पुलिस को भीड़ को उन्हें काबू करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा। इससे पहले सम्भल जिले में भी यूपी रोडवेज बस को प्रदर्शनकारियों द्वारा फूंक देने की खबर आई थी।

विपक्षी दलों द्वारा CAA को मुस्लिम विरोधी बताया जा रहा है जबकि खुद केंद्रीय गृह मंत्री बार-बार यह दोहरा चुके हैं कि सीएएन नागरिकता लेने का नहीं बल्कि नागरिकता देने का बिल है और एक्ट से किसी भी भारतीय मुसलमान की नागरिकता को कोई खतरा नहीं है, लेकिन विपक्षी दलों द्वारा लगातार यह अफवाह फैलाया जा रहा है कि NRC के लागू होने के बाद सीएए कानून से सबसे ज्यादा मुस्लिम प्रभावित होंगे। यही वजह है कि बिना तथ्यों की पड़ताल किए लोग नए कानून के विरोध में सड़क पर उतरकर विरोध-प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे हैं।

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संशोधित कानून के मुताबिक, 31 दिसंबर, 2014 तक भारत आ चुके पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के नागरिकों को भारतीय नागरिकता दी जाएगी। इसमें 6 समुदाय - हिंदू, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी को जगह दी गई है। मुस्लिमों को इससे बाहर रखा गया है।

सरकार ने मुस्लिमों को बिल से बाहर रखने का सटीक कारण बताया कि चिन्हित जिन तीनों पड़ोसी देशों के प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता देने की बात कानून में कही गई है, वहां मुस्लिम अल्पसंख्यक नहीं है, क्योंकि तीनों राष्ट्र मुस्लिम बहुसंख्यक और एक इस्लामिक राष्ट्र हैं, जहां मुस्लिमों को कोई खतरा नहीं हैं। बावजूद इसके भी अगर कोई मुस्लिम भारत की नागरिकता के लिए आवेदन करता है तो उसे प्रतिबंधित नहीं किया गया है।

अभी हाल में गुजरात में पाकिस्तान से आई हसीना बेन महिला को भारत की नागरिकता दे दी गई है। पाकिस्तान से वापस लौटकर भारत आईं हसीना बेन ने दो साल पहले नागरिकता के लिए आवेदन किया था, जिसके बाद अब उन्हें नागरिकता मिली है।

गुजरात के द्वारका में हसीना बेन ने भारतीय नागरिकता लेने के लिए कलेक्टर को पत्र लिखा था। गत 18 दिसंबर 2019 को द्वारका कलेक्टर डॉ नरेंद्र कुमार मीणा की तरफ से हसीना बेन को भारतीय नागरिकता का प्रमाणपत्र दिया गया। जबकि वर्ष 2019 में 561 पाकिस्तानी नागरिकों को भारत की नागरिकता प्रदान की गई है। इनमें सिंगर अदनान सामी भी शामिल हैं।

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दरअसल, पूरे देश में एनआरसी लागू करने की खबर को हवा तब लगी जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में दिए बयान में कहा था कि असम की तर्ज पर पूरे देश में राष्ट्रीय नागरिक पंजी तैयार करने की कवायद की जाएगी। एक न्यूज चैनल से चर्चा के दौरान भी शाह ने एनआरसी के मुद्दे पर कहा था कि उचित समय आने पर देशभर में एनआरसी लागू किया जाएगा।

हालांकि इसी बीच उन्होंने यह भी कहा कि एनआरसी से किसी भी धर्म के भारतीय नागरिक को डरने की जरूरत नहीं है, आपको कोई बाहर नहीं कर सकता। उन्होंने बताया कि कानून में अल्पसंख्यक समुदाय के लिए सरकार विशेष व्यवस्था करेगी, क्योंकि विपक्ष ने उनमें भय फैलाया है। अंत में शाह ने यह जरूर जोड़ा कि जो घुसपैठिए हैं उन्हें भारत से जाना पड़ेगा।

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मालूम हो, विपक्षी दलों द्वारा देश में NRC और इसके दस्तावेजों को लेकर झूठ फैलाया जा रहा है, जिससे खासकर मुस्लिम अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है। इस बीच गृह राज्यमंत्री जी. किशन रेड्डी ने नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स ऑफ इंडिया (NRC) को लेकर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा है कि फिलहाल केंद्र सरकार देश में NRC लागू करने नहीं जा रही है।

क्योंकि अभी तक नागरिकता संशोधन कानून 2019 के नियमों को भी अभी ड्राफ्ट नहीं किया गया है और गृह मंत्रालय द्वारा इसे जारी करने में भी अभी थोड़ा समय लगेगा। सरकार सीएए से जुड़े नियम व शर्तों को लागू करने से पहले इससे जुड़े सभी लोगों से बात करेगी। कहा जा रहा है कि हालात सामान्य होने के बाद सरकार नागरिकता कानून के नियमों से जुड़े ड्राफ्ट पर सभी से चर्चा करेगी।

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केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किशन रेड्डी के मुताबिक अभी तक NRC की सूची को लागू करने की समय-सीमा पर काम नहीं शुरू किया गया है और केंद्र सरकार एनआरसी के विरूद्ध देश में फैलाए जा रहे भ्रम और गलतफहमियो को देखते हुए मुद्दे पर किसी से भी बात करने को तैयार है।

उन्होंने बताया कि पूरे देश में एनआरसी कब लागू किया जाएगा, अभी उक्त विषय में कुछ कह नहीं जा सकता, क्योंकि न अभी एनआरसी तैयारी नहीं हो सकी है और न ही इसके लिए कोई ड्राफ्ट तैयार नहीं किया गया है। वहीं, न ही एनआरसी को अभी कैबिनेट से अप्रूवल मिला है और न ही इसका कानूनी खांका तैयार किया गया है।

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भारत में सबसे पहले एनआरसी असम में लागू किया गया है। राज्य में ग़ैर क़ानूनी रूप से रह रहे लोगों को चिह्नित करने के लिए लागू किए राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर कानून के तहत 30 जुलाई 2018 में सरकार ने एक फ़ाइनल ड्राफ़्ट प्रकाशित किया था जिसमें तकरीबन 41 लाख लोगों का नाम नहीं थे। ये 41 लाख लोग वो हैं, जो असम में रह रहे हैं, इसमें बंगाली लोग हैं, जिनमें हिंदू और मुस्लिम दोनों शामिल हैं। इसी साल की 26 जून को फिर प्रकाशित हुई एक नई अतिरिक्त लिस्ट में तक़रीबन एक लाख नए नामों को सूची से बाहर किया गया।

हालांकि केंद्र सरकार और असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने असम के लोगों को हालांकि भरोसा दिलाया है कि लिस्ट में नाम न होने पर किसी भी व्यक्ति को हिरासत में नहीं लिया जाएगा और उसे अपनी नागरिकता साबित करने का हरसंभव मौका दिया जाएगा।

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इन काग़ज़ों में 1951 की एनआरसी में आया उनका नाम, 1971 तक की वोटिंग लिस्ट में आए नाम, ज़मीन के काग़ज़, स्कूल और यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के सबूत, जन्म प्रमाण पत्र और माता-पिता के वोटर कार्ड, राशन कार्ड, एलआईसी पॉलिसी, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, रेफ़्यूजी रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट जैसी चीज़ें शामिल हैं।

यह भी पढ़ें- गृह राज्यमंत्री ने NRC पर दिया बयान, कहा- अभी एनआरसी लागू करने की कोई योजना नहीं

गृह राज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी ने बताया एनआरसी फिलहाल नहीं

गृह राज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी ने बताया एनआरसी फिलहाल नहीं

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी के बयानों से ही नहीं, बल्कि इसके संकेत सरकार ने बुधवार को देश भर के न्यूजपेपरों में छपे उक्त विज्ञापनों में भी दिए हैं, जिसमें सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरूद्ध फैलाए गए भ्रांतियों और गलतफहमियों को दूर करने की कोशिश की है।

फिलहाल एनआरसी को ठंडे बस्ते में चली गई है एनआरसी

फिलहाल एनआरसी को ठंडे बस्ते में चली गई है एनआरसी

सीएए के खिलाफ देशभर में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शन के बीच मोदी सरकार फिलहाल एनआरसी को ठंडे बस्ते में डाल सकती है, क्योंकि मोदी सरकार एनआरसी को लेकर जल्दबाजी के मूड में नहीं दिख रही है।

सरकारी विज्ञापन में एनआरसी मुद्दे पर सरकार ने दिए हैं संकेत

सरकारी विज्ञापन में एनआरसी मुद्दे पर सरकार ने दिए हैं संकेत

बुधवार को एक सरकारी विज्ञापन में जिन शब्दों को उपयोग किया गया है उससे साफ इशारा मिलता है कि सरकार देशभर में एनआरसी लागू करने की जल्दबाजी में बिल्कुल नहीं है। विज्ञापन साफ-साफ कहा गया है कि अगर कभी एनआरसी घोषणा की जाती है, तो ऐसी स्थिति में नियम और निर्देश ऐसे बनाए जाएंगे ताकि किसी भी भारतीय नागरिक को परेशानी न हो। इस विज्ञापन से साफ इशारा मिलता है कि फिलहाल एनआरसी नहीं आने वाली है।

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन 3 लोगों की मौत

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन 3 लोगों की मौत

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ राजधानी दिल्ली से लेकर लखनऊ, पटना, मंगलुरू समेत कई छोटे-बड़े शहर में देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जहां प्रदर्शनकारी सड़कों पर निकलकर एक्ट का विरोध कर रहे हैं। गुरूवार को लखनऊ में उस वक्त विरोध-प्रदर्शन हिंसक हो गया जब पुलिस की गाड़ी को प्रदर्शनकारियों द्वारा आग के हवाले कर दिया गया। सम्भल जिले में भी यूपी रोडवेज बस को प्रदर्शनकारियों द्वारा फूंक देने की खबर आई थी। हिंसा में अब तक कुल 3 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 2 मंगलुरू में और 1 लखनऊ में हुई है।

सीएए को लेकर मुस्लिम समुदायों में फैली हैं भ्रांतियां

सीएए को लेकर मुस्लिम समुदायों में फैली हैं भ्रांतियां

विपक्षी दलों द्वारा CAA को मुस्लिम विरोधी बताया जा रहा है जबकि खुद केंद्रीय गृह मंत्री बार-बार यह दोहरा चुके हैं कि सीएएन नागरिकता लेने का नहीं बल्कि नागरिकता देने का बिल है और एक्ट से किसी भी भारतीय मुसलमान की नागरिकता को कोई खतरा नहीं है, लेकिन विपक्षी दलों द्वारा लगातार यह अफवाह फैलाया जा रहा है कि NRC के लागू होने के बाद सीएए कानून से सबसे ज्यादा मुस्लिम प्रभावित होंगे। यही वजह है कि बिना तथ्यों की पड़ताल किए लोग नए कानून के विरोध में सड़क पर उतरकर विरोध-प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे हैं।

31 दिसंबर, 2014 तक भारत चुके तीनों पड़ोसी देशों को नागरिकता

31 दिसंबर, 2014 तक भारत चुके तीनों पड़ोसी देशों को नागरिकता

संशोधित कानून के मुताबिक, 31 दिसंबर, 2014 तक भारत आ चुके पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के नागरिकों को भारतीय नागरिकता दी जाएगी। इसमें 6 समुदाय - हिंदू, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी को जगह दी गई है। मुस्लिमों को इससे बाहर रखा गया है। सरकार ने मुस्लिमों को बिल से बाहर रखने का सटीक कारण बताया कि चिन्हित जिन तीनों पड़ोसी देशों के प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता देने की बात कानून में कही गई है, वहां मुस्लिम अल्पसंख्यक नहीं है, क्योंकि तीनों राष्ट्र मुस्लिम बहुसंख्यक और एक इस्लामिक राष्ट्र हैं, जहां मुस्लिमों को कोई खतरा नहीं हैं। बावजूद इसके भी अगर कोई मुस्लिम भारत की नागरिकता के लिए आवेदन करता है तो उसे प्रतिबंधित नहीं किया गया है।

गुजरात में पाकिस्तान से आई हसीना बेन को मिली भारतीय नागरिकता

गुजरात में पाकिस्तान से आई हसीना बेन को मिली भारतीय नागरिकता

अभी हाल में गुजरात में पाकिस्तान से आई हसीना बेन महिला को भारत की नागरिकता दे दी गई है। पाकिस्तान से वापस लौटकर भारत आईं हसीना बेन ने दो साल पहले नागरिकता के लिए आवेदन किया था, जिसके बाद अब उन्हें नागरिकता मिली है। गुजरात के द्वारका में हसीना बेन ने भारतीय नागरिकता लेने के लिए कलेक्टर को पत्र लिखा था। गत 18 दिसंबर 2019 को द्वारका कलेक्टर डॉ नरेंद्र कुमार मीणा की तरफ से हसीना बेन को भारतीय नागरिकता का प्रमाणपत्र दिया गया। जबकि वर्ष 2019 में 561 पाकिस्तानी नागरिकों को भारत की नागरिकता प्रदान की गई है। इनमें सिंगर अदनान सामी भी शामिल हैं।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, वापस नहीं होगा CAA

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, वापस नहीं होगा CAA

नागरिकता संशोधन बिल लोकसभा में 9 दिसंबर, 2019 को पास होने के बाद 11 दिसंबर, 2019 को राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने पेश किया, जहां एक लंबी बहस के बाद यह बिल पास हो गया। इस बिल के पास होने के बाद और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह नागरिकता संशोधन कानून बन गया। गृहमंत्री अमित शाह ने साफ कर दिया है कि चाहे जितना भी विरोध हो इस कानून को वापस नहीं लिया जाएगा। उनका कहना है कि यह कानून देश की जनता के लिए नहीं है, यह कानून उन अल्‍पसंख्‍यक लोगों के लिए है जो अफगानिस्‍तान, बांग्‍लादेश और पाकिस्‍तान में धार्मिक रूप से प्रताडि़त होकर भारत में शणार्थी के रूप में आए हैं।

भारत में सबसे पहले एनआरसी असम में लागू किया था

भारत में सबसे पहले एनआरसी असम में लागू किया था

भारत में सबसे पहले एनआरसी असम में लागू किया गया है। राज्य में ग़ैर क़ानूनी रूप से रह रहे लोगों को चिह्नित करने के लिए लागू किए राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर कानून के तहत 30 जुलाई 2018 में सरकार ने एक फ़ाइनल ड्राफ़्ट प्रकाशित किया था जिसमें तकरीबन 41 लाख लोगों का नाम नहीं थे। ये 41 लाख लोग वो हैं, जो असम में रह रहे हैं, इसमें बंगाली लोग हैं, जिनमें हिंदू और मुस्लिम दोनों शामिल हैं। इसी साल की 26 जून को फिर प्रकाशित हुई एक नई अतिरिक्त लिस्ट में तक़रीबन एक लाख नए नामों को सूची से बाहर किया गया।

CM सर्बानंद सोनोवाल ने असम के लोगों को भरोसा दिलाया

CM सर्बानंद सोनोवाल ने असम के लोगों को भरोसा दिलाया

केंद्र सरकार और असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने असम के लोगों को हालांकि भरोसा दिलाया है कि लिस्ट में नाम न होने पर किसी भी व्यक्ति को हिरासत में नहीं लिया जाएगा और उसे अपनी नागरिकता साबित करने का हरसंभव मौका दिया जाएगा। इन काग़ज़ों में 1951 की एनआरसी में आया उनका नाम, 1971 तक की वोटिंग लिस्ट में आए नाम, ज़मीन के काग़ज़, स्कूल और यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के सबूत, जन्म प्रमाण पत्र और माता-पिता के वोटर कार्ड, राशन कार्ड, एलआईसी पॉलिसी, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, रेफ़्यूजी रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट जैसी चीज़ें शामिल हैं।

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