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Explainer: China-Pakistan-Turkiye का गठजोड़ सुरक्षा से व्यापार तक भारत का सिरदर्द बढ़ाएगी ये तिकड़ी

Explainer: भारत के लिए पड़ोसी देशों के साथ कूटनीतिक संबंध बनाए रखते हुए अपने हितों का संरक्षण करना हमेशा से काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। एक ओर पाकिस्तान (India Pakistan Tension) अपनी जमीन का इस्तेमाल भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों के लिए करता रहा है और हालिया पहलगाम अटैक भी इसी कड़ी में एक हिस्सा है। दूसरी ओर चीन की विस्तारवादी रणनीति को देखते हुए भारत उस पर कभी भरोसा नहीं कर सकता है। चीन और पाकिस्तान का साथ आना पहले ही भारत के लिए सीमाओं की सुरक्षा के लिहाज से चुनौतीपूर्ण रहा था। अब इस गठजोड़ में तुर्किये का शामिल होना नया सिरदर्द बनने जा रहा है। साउथ एशिया में चीन अपने कर्ज का मकड़जाल फैलाकर कई पुराने भरोसेमंद दोस्तों को भारत से दूर करने की कोशिश कर चुका है। चीन-पाकिस्तान और तुर्किये की तिकड़ी कैसे भारत की चुनौती बढ़ा सकती है, इसके सभी पहलुओं के बारे में विस्तार से यहां समझें।

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Explainer China-Pakistan और तुर्किये के गठजोड़ की इनसाइड स्टोरी

पाकिस्तान और चीन के मंसूबे हमेशा से ही भारत के खिलाफ रहे हैं। भारत के साथ बड़े व्यापारिक संबंधों के बावजूद चीन खुलकर अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के साथ खड़ा नजर आता है। अब तुर्किये भी इस कड़ी में शामिल हो गया है। दुनिया के बदलते जियो पॉलिटिकल समीकरण में सऊदी अरब और यूएई अब अपनी कट्टर इस्लामिक छवि को पीछे छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर तुर्किये के राष्‍ट्रपति तैय्यप एर्दोआन अपनी निजी महत्वाकांक्षा को अमली जामा पहनाने में जुटे हैं। वह खुद को मुस्लिम उम्‍माह के स्वाभाविक नेतृत्‍वकर्ता के तौर पर पेश करना चाहते हैं। यही वजह है कि इस्‍लामी जियोपॉलिटिकल गुट के रूप में पाकिस्तान को साथ लेकर चलने की कोशिश कर रहे हैं।

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चीन ने पाकिस्तान में भारी निवेश कर रखा है और साउथ एशिया में अपने विस्तारवादी मंसूबों को अंजाम देने के लिए शी जिनपिंग ने पाकिस्तान के ग्वादर एयरपोर्ट में भारी निवेश किया है। चाइना पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) बेल्ट और रोड इनिशिएटिव (BRI) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। चीन की यह महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य मध्य पूर्व, अफ्रीका और यूरोप के साथ संपर्क बढ़ाना है। असल में यह चीन की विस्तारवादी सोच को धरातल पर उतारने की कोशिश है। चीन यूरोप के बड़े बाजार तक पहुंचने के लिए अपनी भौगोलिक दूरी को कम करते हुए वहां कब्जा जमाना चाहता है। पाकिस्तान चीन की रणनीति में अपनी भौगोलिक स्थिति की वजह से अहम है और इसलिए शी जिनपिंग खुलकर पाकिस्तान के साथ खड़े नजर आते हैं।

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शैतानी मंसूबों वाली ये तिकड़ी भारत के लिए बड़ी चुनौती

चीन सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है और तुर्किये नाटो (NATO) का सदस्य देश है। वैश्विक कूटनीति और रणनीतियों को प्रभावित करने की दिशा में ये दोनों देश अहम हैं। चीन ने वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान को कर्ज दिलाने से लेकर पाक में पनाह लिए आतंकियों को बचाने तक में बड़ी भूमिका निभाई है। इसके अलावा, तुर्की और चीन पाकिस्तान को लगातार महंगे आधुनिक हथियारों की सप्लाई कर रहे हैं, जिसका इस्तेमाल पाकिस्तान भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने में करता है। पाकिस्‍तान ने तुर्की की सरकारी रक्षा कंपनी ASFAT के साथ 1.5 अरब डॉलर का करार किया है। चीन के निवेश की वजह से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बल मिलता है और यह भी भारत के लिए सही नहीं है।

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