Saket building collapse: दिल्ली बिल्डिंग हादसे में अबतक 6 की मौत, 2 इंजीनियर सस्पेंड, किसकी लापरवाही ने ली जान
Delhi Saket building collapse: दिल्ली के साकेत इलाके में हुई बिल्डिंग दुर्घटना ने कई परिवारों की जिंदगी बदल दी है। साउथ दिल्ली के सैदुलाजाब में मेट्रो स्टेशन के पास स्थित एक बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत के अचानक ढह जाने से अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। हादसे के बाद प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह सक्रिय हो गई है।
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और नगर निगम (MCD) ने शुरुआती कार्रवाई करते हुए दो इंजीनियरों को निलंबित कर दिया है। यह घटना सिर्फ एक इमारत गिरने का मामला नहीं है, बल्कि दिल्ली में निर्माण नियमों, निगरानी व्यवस्था और सुरक्षा मानकों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

कैसे हुआ साकेत का यह बड़ा हादसा?
30 मई शाम सईदुलाजाब इलाके के वेस्टर्न मार्ग पर स्थित एक व्यावसायिक इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हादसे से कुछ सेकंड पहले इमारत से ईंटें और पत्थर सड़क पर गिरने लगे थे। लोगों को कुछ समझ आता, उससे पहले पूरी संरचना मलबे में बदल गई।
बताया जा रहा है कि इमारत में कोचिंग सेंटर, कैफे और कई कार्यालय संचालित हो रहे थे। हादसे के समय ऊपरी मंजिल पर निर्माण कार्य भी चल रहा था। इसी वजह से जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं निर्माण गतिविधि या संरचनात्मक कमजोरी तो दुर्घटना की वजह नहीं बनी।
विदेश में मेडिकल पढ़ने की तैयारी कर रहे छात्र भी बने हादसे का शिकार
पुलिस सूत्रों के अनुसार, घायल और मृतकों में कुछ ऐसे छात्र भी शामिल थे जो विदेशी मेडिकल स्नातक परीक्षा (FMG Exam) की तैयारी कर रहे थे। साकेत और सईदुलाजाब का इलाका लंबे समय से विदेशों में मेडिकल और इंजीनियरिंग शिक्षा के लिए तैयारी कराने वाले संस्थानों का केंद्र माना जाता है। हादसे ने उन छात्रों और उनके परिवारों को भी गहरा झटका दिया है जो अपने भविष्य के सपने लेकर यहां पढ़ाई कर रहे थे।
6 लोगों की मौत, कई घायल
राहत और बचाव अभियान के दौरान कुल 14 लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया। इनमें से छह लोगों की मौत हो गई जबकि आठ घायल अवस्था में अस्पताल पहुंचाए गए। मृतकों की पहचान रवि (24), कपिल (28), नलिन राय (23), आलोक, पार्वती (35) और एकता (24) के रूप में हुई है।
घायलों में क्षितिज प्रताप, नीलम यादव, अनुज दीक्षित, तरुण, साइका खान, आस्था, आदित्य शर्मा और विशाल शामिल हैं। सभी को एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। इनमें से कुछ लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि अन्य अभी भी डॉक्टरों की निगरानी में हैं।
मलबे में बदल गई पूरी इमारत
अधिकारियों के मुताबिक पांच से सात मंजिल तक की यह इमारत लगभग 300 से 400 वर्ग गज क्षेत्र में फैली हुई थी। हादसे के बाद पूरी संरचना जमीन पर आ गिरी। इमारत का बड़ा हिस्सा पास में बने एक टिन शेड कैंटीन पर भी गिरा। यह कैंटीन पार्वती नामक महिला चलाती थीं और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र अक्सर वहां आते-जाते थे। पार्वती भी इस हादसे में जान गंवाने वालों में शामिल हैं।
रातभर चला रेस्क्यू ऑपरेशन
हादसे की सूचना शनिवार शाम करीब 7:40 बजे आपातकालीन संचालन केंद्र को मिली। इसके बाद कई एजेंसियों ने संयुक्त अभियान शुरू किया।
बचाव अभियान में शामिल एजेंसियां:
- NDRF
- दिल्ली फायर सर्विस
- DDMA
- दिल्ली पुलिस
- सिविल डिफेंस
- CATS एम्बुलेंस सेवा
- स्थानीय स्वयंसेवक
मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए हाइड्रा मशीन, जेसीबी, रोटावेटर, हाइड्रोलिक कटर, विक्टिम लोकेशन कैमरा और स्निफर डॉग्स का इस्तेमाल किया गया। पूरी रात चले अभियान के बाद सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ हादसे का वीडियो
घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है। वीडियो में दिखाई देता है कि कुछ लोग इमारत से गिरते मलबे को देखकर रिकॉर्डिंग शुरू करते हैं। कुछ ही सेकंड बाद पूरी इमारत धूल के विशाल गुबार के साथ धराशायी हो जाती है। यह वीडियो अब जांच एजेंसियों के लिए भी अहम सबूत माना जा रहा है।
FIR दर्ज, गैर इरादतन हत्या की धाराएं भी शामिल
दिल्ली पुलिस ने मेहरौली थाने में मामला दर्ज कर लिया है। एफआईआर में गैर इरादतन हत्या सहित कई गंभीर धाराएं जोड़ी गई हैं। पुलिस का कहना है कि अलग-अलग जांच टीमें गठित की गई हैं जो यह पता लगाएंगी कि हादसे के पीछे असली वजह क्या थी और क्या किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी की गई थी।
हादसे के बाद नगर निगम ने भी कार्रवाई शुरू कर दी है। दक्षिण जोन के आदेश के अनुसार सहायक अभियंता (भवन) सुदेश सिंह चौहान और कनिष्ठ अभियंता (भवन) अमन जैन को निलंबित कर दिया गया है। दोनों अधिकारियों पर इमारत से जुड़े मामलों की निगरानी में कथित लापरवाही के आरोप हैं। हालांकि अंतिम जिम्मेदारी तय होने से पहले विस्तृत जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिए जांच के आदेश
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार को घटनास्थल का दौरा किया और राहत कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर दक्षिण जिला मजिस्ट्रेट की निगरानी में जांच की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि यदि किसी अधिकारी, बिल्डर या अन्य व्यक्ति की जिम्मेदारी सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
साकेत बिल्डिंग हादसा अब सिर्फ एक दुर्घटना नहीं रह गया है। छह लोगों की मौत, दर्जनों परिवारों पर टूटा दुख और प्रशासनिक कार्रवाई यह संकेत दे रही है कि मामला गंभीर है। अब जांच का फोकस इस बात पर है कि क्या इमारत पहले से कमजोर थी, क्या अवैध निर्माण हो रहा था, क्या सुरक्षा नियमों की अनदेखी हुई और क्या समय रहते कार्रवाई की जाती तो छह लोगों की जान बचाई जा सकती थी। इन सवालों के जवाब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मिलेंगे, लेकिन फिलहाल दिल्ली का यह हादसा शहर की निर्माण व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान बनकर खड़ा है।














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